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दक्षता को संबल

सरकार सोलह जनवरी से स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में की..

Author नई दिल्ली | December 28, 2015 1:24 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

सरकार सोलह जनवरी से स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में की। हालांकि लाल किले की प्राचीर से पंद्रह अगस्त को ही वे इस कार्यक्रम की घोषणा कर चुके थे, अब उसकी विधिवत शुरुआत हो सकेगी। मेक इन इंडिया कार्यक्रम के बाद यह सरकार की दूसरी महत्त्वाकांक्षी योजना है। इस कार्यक्रम का मुख्य जोर तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और उन्हें अपने देश के विकास में सहभागी बनाने पर है। इसके लिए आइआइटी, आइआइएम, सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय तकनीकी संस्थानों को जोड़ा जाएगा। यह कार्यक्रम केवल डिजिटल तकनीक के विकास के लिए नहीं, बल्कि भारत की तमाम जरूरतों के मुताबिक दक्ष युवाओं को अपनी सेवाएं देने का अवसर मुहैया कराएगा।

सरकार इसके लिए सभी बैंकों से कर्ज मुहैया कराने की व्यवस्था करेगी। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा है कि देश के बैंकों की हर शाखा अगर साल में कम से कम एक दलित और एक महिला तकनीकी विशेषज्ञ युवा को उद्यमी बनाने का लक्ष्य रखे तो इससे विकास की दिशा में काफी बड़ी मदद मिल सकेगी। देश में युवाओं के पास प्रतिभा है, पर उन्हें उचित अवसर और संसाधन मुहैया न हो पाने के कारण वे अपना कोई स्वतंत्र व्यवसाय शुरू कर पाने में परेशानी महसूस करते हैं। काफी युवा रोजगार की तलाश में दूसरे देशों की तरफ पलायन कर जाते हैं। अगर स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम को सही तरीके से लागू किया जा सका, तो निस्संदेह इससे न सिर्फ युवा प्रतिभाओं के पलायन में कमी आने, बल्कि अपने ही देश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने की उम्मीद बनेगी।

पिछले महीने प्रधानमंत्री जब अमेरिका की यात्रा पर गए तो वहां उन्होंने फेसबुक, गूगल सहित अनेक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिल कर भारत में तकनीक के इस्तेमाल के नए क्षेत्रों की पहचान करने की कोशिश की। उनमें से कई कंपनियों ने हमारे यहां निवेश का आश्वासन भी दिया। ऐसे में स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत के बाद यहां के युवाओं को उन कंपनियों की मदद से ऐसे अनेक क्षेत्रों में भी काम करने का अवसर उपलब्ध होगा, जो लंबे समय से अछूते हैं। मगर फिर भी इस कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि युवाओं को आर्थिक मदद कितनी आसानी से उपलब्ध हो पाती है और बाजार में उनके लिए कितनी जगह मिल पाती है। सूचना तकनीक का क्षेत्र चूंकि निरंतर विकास करता हुआ क्षेत्र है, इसलिए इसमें कामयाबी की संभावना अब भी बनी हुई है, पर दूसरे अनेक क्षेत्रों में काम करना जोखिम भरा है।

अब तक सरकार का जोर बड़े उद्योगों को बढ़ावा देने पर रहा है, इसलिए छोटे और मझोले कारोबारी संघर्ष करते नजर आते हैं। स्टार्ट अप इंडिया में भी युवाओं को छोटे और मझोले स्तर के कारोबार के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसलिए जहां उन्हें बड़े उद्योगों की प्रतिस्पर्धा में खड़ा होना होगा, उनके कमजोर साबित होने की आशंका बनी रहेगी। फिर कृषि एक ऐसा विशाल क्षेत्र है, जहां भंडारण, प्रसंस्करण, कृषि आधारित उत्पाद तैयार करने आदि की ढेर संभावनाएं हैं, पर युवा इस ओर साहस के साथ इसलिए कदम नहीं बढ़ा पाते कि सरकारी नीतियां उनके अनुकूल नहीं हैं। ऐसे में सरकार को स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम लागू करने के साथ ही उद्योग-धंधों से जुड़ी नीतियों को भी व्यावहारिक बनाने पर विचार करना चाहिए।

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