बदलते दौर में भू-राजनीतिक उथल-पुथल और अनिश्चितताओं के बीच भारत आर्थिक एवं रणनीतिक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को और व्यापक बनाने की राह पर आगे बढ़ रहा है। ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों के बाद भारत ने अब फ्रांस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में बदल दिया है। इसके तहत दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और निवेश समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया है।

नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच मंगलवार को मुंबई में हुई वार्ता के दौरान बनी सहमति के बाद इक्कीस समझौतों को स्वीकृति दी गई। इस साझेदारी को वैश्विक स्थिरता और रणनीतिक दृष्टिकोण से कई मायनों में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल द्विपक्षीय व्यापार और आधुनिक प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान में संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे, बल्कि रक्षा के मोर्चे पर भी भारत की स्थिति मजबूत होगी।

पिछले दिनों भारत ने ब्रिटेन और ओमान के साथ व्यापार समझौते किए थे

पिछले दिनों भारत ने ब्रिटेन और ओमान के साथ व्यापार समझौते किए थे। उसके बाद न्यूजीलैंड और फिर यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया। हाल में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का एलान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने भारत पर लगाए गए पचास फीसद शुल्क को घटाकर अठारह फीसद कर दिया। इसमें दोराय नहीं कि अमेरिका की ओर से भारत पर भारी-भरकम शुल्क लगाए जाने के बाद देश का निर्यात कारोबार प्रभावित हुआ।

इस संकट से निपटने के लिए भारत ने अपने उत्पादों के वास्ते दुनिया के विभिन्न देशों में वैकल्पिक बाजार तलाशने की हरसंभव कोशिश की तथा व्यापार समझौतों की शक्ल में उसके सफल नतीजे भी सामने आए। अब फ्रांस के साथ विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी से भारत के व्यापार, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में सशक्तीकरण की संभावनाओं को और बल मिलेगा। भारत और फ्रांस ने परस्पर निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष समझौता किया है, जिससे दोनों देशों के नागरिकों और कंपनियों को अब दोहरा कर नहीं देना पड़ेगा। इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आवागमन को नई गति मिलेगी।

गौरतलब है कि फ्रांस की मदद से कर्नाटक के वेमागल में एयरबस एच-125 हेलिकाप्टरों के निर्माण के लिए कलपुर्जों को जोड़ने का कारखाना भी स्थापित किया गया है, जहां अब काम शुरू हो गया है। यहां दुनिया के ऐसे शक्तिशाली हेलिकाप्टर का निर्माण किया जाएगा, जो विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम होगा।

द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और फ्रांस के बीच ‘हैमर’ मिसाइलों के उत्पादन को लेकर भी अहम समझौता हुआ है। इसके तहत भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड और फ्रांसीसी रक्षा कंपनी सैफरान संयुक्त उद्यम स्थापित करेगी। यह सच है कि फ्रांस, भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक है और अब दोनों देशों के बीच सहयोग का नया अध्याय शुरू हो रहा है।

विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की पहल फ्रांस की विशेषज्ञता और भारत की विशाल क्षमता को एक साथ लाने का प्रयास है और इससे निश्चित तौर पर भारत की विनिर्माण एवं निर्यात क्षमताओं में इजाफा होगा।

यह भी पढ़ें- हम बनाएंगे एवरेस्ट के ऊपर उड़ने वाला हेलीकॉप्टर

भारत दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुंबई में मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हुई। फ्रांसिसी राष्ट्र प्रमुख इमैनुअल मैक्रों से बातचीत और साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने कहा है कि अब ऐसे हेलीकॉप्टर बनाए जाएंगे, जो कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई पर भी उड़ सकेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक