सरकार के तमाम दावों के बावजूद वाहनों की तेज रफ्तार पर लगाम नहीं लग पा रही है। देश भर में हर साल होने वाले सड़क हादसों में तेज गति से वाहन चलाना एक बड़े कारण के रूप में उभरकर सामने आता है। वजह साफ है कि यातायात नियमों का पूरी तरह अमल सुनिश्चित करने में हर स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। खास तौर से राजमार्गों पर चलने वाले भारी वाहनों से जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है। नतीजा यह है कि व्यवस्था में खामियों का खमियाजा निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा उत्तर प्रदेश में नोएडा के सेक्टर-62 के पास दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर सोमवार देर रात हुआ, जिसमें एक घायल व्यक्ति की मदद कर रहे तीन लोगों को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया, जिनमें से दो की मौत हो गई। इस घटना ने सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या राजमार्गों पर वाहनों के गति मापक यंत्रों का अभाव है या फिर उनका संचालन ठीक तरह से नहीं हो पा रहा है?
दरअसल, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर एक ट्रक की टक्कर से पिकअप वाहन में सवार व्यक्ति घायल हो गया था। इस दौरान वहां से गुजर रहे कुछ लोग घायल व्यक्ति की मदद के लिए आगे आए और उसे क्षतिग्रस्त वाहन से बाहर निकालने का प्रयास करने लगे। इस बीच सामने से आए एक अन्य तेज रफ्तार ट्रक ने तीन लोगों को टक्कर मार दी।
कहा जा रहा है कि इस हादसे में जख्मी लोगों को अस्पताल ले जाने के लिए तत्काल कोई मदद नहीं मिल पाई। ऐसे में राजमार्गों पर कोई हादसा होने पर तुरंत सहायता पहुंचाने के सरकारी तंत्र पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
दूसरा, इस बात पर भी गंभीरता से गौर करने की जरूरत है कि आखिर वाहनों की तेज रफ्तार पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? जाहिर है अगर कुछ वाहन चालकों को यातायात नियमों की परवाह नहीं है और न ही उन्हें कानून का खौफ है, तो इसकी मूल वजह का पता लगाए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं हो सकता है।
