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संपादकीयः बेलगाम महंगाई

पिछले कुछ महीनों से महंगाई के चलते लोगों के घरेलू बजट पर भी जब असर गहरा रहा है, तो ऐसे में उम्मीद यही की जा रही थी कि सरकार इससे निपटने के लिए कुछ ठोस कदम उठाएगी।

Author Published on: October 2, 2018 2:15 AM
जहां सबसिडी वाले गैस सिलेंडर में 2.89 रुपए और बिना सबसिडी वाले में सीधे उनसठ रुपए की बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई, वहीं दिल्ली और आसपास के शहरों में सीएनजी भी अब पौने दो से दो रुपए तक महंगी मिलेगी।

पिछले कुछ महीनों से महंगाई के चलते लोगों के घरेलू बजट पर भी जब असर गहरा रहा है, तो ऐसे में उम्मीद यही की जा रही थी कि सरकार इससे निपटने के लिए कुछ ठोस कदम उठाएगी। लेकिन रविवार को पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के साथ-साथ इस बार सीएनजी और एटीएफ यानी विमान र्इंधन की कीमतों में एक और बढ़ोतरी के बाद एक तरह से यह साफ है कि महंगाई की वजह से आम जनता की बढ़ती परेशानियों को लेकर सरकार शायद फिक्रमंद नहीं है। हैरानी की बात यह है कि एक ओर सरकार लगातार लोगों को भरोसा दे रही है कि वह महंगाई को कम करने के उपाय कर रही है और दूसरी ओर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी के इंतजाम कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव की दलील के मुताबिक लगातार इजाफे की वजह से आज हालत यह है कि राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत रिकार्ड ऊंचाई पर यानी 83.73 रुपए और डीजल की 75.09 रुपए तक पहुंच गई। मुंबई में तो पेट्रोल प्रति लीटर इक्यानबे रुपए पार कर गया। इसके अलावा, जहां सबसिडी वाले गैस सिलेंडर में 2.89 रुपए और बिना सबसिडी वाले में सीधे उनसठ रुपए की बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई, वहीं दिल्ली और आसपास के शहरों में सीएनजी भी अब पौने दो से दो रुपए तक महंगी मिलेगी। जाहिर है, इसका सीधा असर लोगों की रसोई से लेकर बाहर तक की गतिविधियों पर पड़ेगा।

यह किसी से छिपा नहीं है कि डीजल की कीमतों के साथ ही माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है और कारोबारी इसे वस्तुओं की कीमतें बढ़ा कर वसूलते हैं। इसी तरह पेट्रोल निजी वाहनों से लोगों के कहीं भी आवाजाही का एक मुख्य साधन हो चुका है, तो सीएनजी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के अनेक शहरों में परिवहन का एक अहम जरिया है। फिर हाल के दिनों में सरकार की ओर से यह दावा बार-बार किया गया है कि हवाई सफर को अब इतना सस्ता बना दिया जाएगा कि लोगों के लिए यह प्राथमिकता बन जाएगा। मगर विमान र्इंधन की घरेलू दर में अगर 2650 रुपए प्रति किलोलीटर की वृद्धि की गई है तो हवाई सफर का खर्च बढ़ना तय है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहले से ही महंगाई से त्रस्त लोगों की जेब पर कितना बोझ बढ़ने जा रहा है। ताजा वृद्धि की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को बताया जा रहा है और फिलहाल बाजार का जो रुख है, उसमें आने वाले दिनों में आम लोगों को कोई राहत मिलने के आसार नहीं नजर आ रहे।

लगभग हर मद में बढ़ते खर्च के दौर में लोगों की आय में जिस तरह का ठहराव आया है या कमी ही हुई है, उसमें साधारण लोग स्वाभाविक रूप से यह उम्मीद कर रहे थे कि सरकार इसका कोई हल निकालेगी। लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि महंगाई की वजह से आम जनजीवन किस कदर प्रभावित हो रहा है। इसमें कोई शक नहीं कि महंगाई की मार कमोबेश समाज के सभी तबकों पर पड़ती है। लेकिन इसका सबसे बुरा असर उस गरीब और निम्न आयवर्गीय आबादी पर पड़ता है जिसकी आमदनी का कोई नियमित जरिया नहीं है। जबकि कई तरह की कटौतियों के बाद रोजमर्रा के उपभोग की अनिवार्य चीजों के बगैर काम चलाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में अगर एक तरफ अर्थव्यवस्था की चमकती तस्वीर पेश की जाए और दूसरी ओर देश की एक बड़ी आबादी को अपनी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही हो तो उन नीतियों पर सवाल उठना लाजिमी है, जिनकी वजह से महंगाई को इस कदर बेलगाम छोड़ दिया गया है।

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