ताज़ा खबर
 

संपादकीयः अफवाह पर शिकंजा

पिछले कुछ समय से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिनमें बच्चा चोरी या किसी अन्य अफवाह के असर में लोगों की भीड़ जमा हो गई और किसी निर्दोष व्यक्ति को पीट-पीट कर मार डाला।

Author July 12, 2018 4:52 AM
प्रतीकात्मक चित्र

पिछले कुछ समय से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिनमें बच्चा चोरी या किसी अन्य अफवाह के असर में लोगों की भीड़ जमा हो गई और किसी निर्दोष व्यक्ति को पीट-पीट कर मार डाला। आमतौर पर ऐसी अफवाहें फैलाने के लिए आज हर हाथ में मौजूद स्मार्टफोन के वाट्सऐप का सहारा लिया गया। फेसबुक या ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के अलग-अलग मंचों से भी ऐसे ऑडियो या वीडियो संदेश प्रसारित कर दिए गए, जिनका कोई आधार नहीं था, लेकिन अपने असर में उसने संवेदनशील हालात खड़े कर दिए। कई बार इस तरह के फर्जी संदेश या भड़काऊ वीडियो बिना किसी पुष्टि के जारी कर दिए जाते हैं जिससे लोगों के बीच उन्माद का माहौल बन जाता है। जबकि जिस घटना के संदर्भ में उसका हवाला दिया जाता है, वह पूरी तरह गलत होती है और किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो जाती है। निश्चित रूप से यह स्थिति चिंताजनक है और इस पर लगाम लगाने की जरूरत है। इसी के मद्देनजर हाल ही में भारत सरकार ने फर्जी खबरें फैलाने के लिए किसी मंच का उपयोग किए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी जारी की थी।

अच्छा यह है कि अब यू-ट्यूब, वाट्सऐप और ट्विटर ने भी यह कहा है कि भ्रामक सूचनाओं, संदेशों और विवादित वीडियो पर शिकंजा कसा जाएगा। गौरतलब है कि पिछले दिनों ऐसे सवाल उठे थे कि फेसबुक और उसके स्वामित्व वाले वाट्सऐप के जरिए ऐसी फर्जी खबरें धड़ल्ले से फैलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधार नहीं होता। लेकिन ये खबरें एक बार जब लोगों के बीच चली जाती हैं तो उसकी सच्चाई की पुष्टि करना लोग जरूरी नहीं समझते और उसके असर में अपना और दूसरों का बड़ा नुकसान कर डालते हैं। मुश्किल यह है कि हमारे यहां ज्यादातर लोग ऐसे सामाजिक प्रशिक्षण से नहीं गुजरते जिनमें अपने पास आई किसी सूचना के सही और गलत के बीच फर्क करने के बाद ही उस पर अपनी राय बनाने की समझ पैदा की जाती हो। सुनी-सुनाई बातों पर पहले भी लोगों के आवेश में आने और किसी दुखद घटना को अंजाम देने की खबरें आती रही हैं। लेकिन जब से इंटरनेट और स्मार्टफोन का प्रसार व्यापक हुआ है, तब से इस प्रवृत्ति ने ज्यादा नकारात्मक रुख अख्तियार कर लिया है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि विज्ञान के हिस्से के तौर पर कोई भी तकनीक अपने आप में एक निरपेक्ष औजार है। लेकिन यह इसे इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति पर निर्भर है कि वह इसका उपयोग सकारात्मक काम के लिए करता है या नकारात्मक के लिए। अपनी शुरुआत के बाद से अब तक इंटरनेट ने इस दुनिया को बहुत कुछ अच्छा दिया है। लेकिन यह भी हकीकत है कि स्मार्टफोन या इंटरनेट का इस्तेमाल आज सूचना और ज्ञान हासिल करने से अलावा ऐसे संदेशों को फैलाने में भी हो रहा है, जिनकी जद में आने के बाद लोग किसी खबर के सही या गलत होने का अंदाजा लगा पाने में सक्षम नहीं रह जाते हैं। यह स्थिति बहुत सारे लोगों को एक हिंसक भीड़ में तब्दील कर रही है। सोशल मीडिया के जरिए फैलाए गए कई संदेशों को देख कर साफ लगता है कि नफरत या हिंसा फैलाने के एजंडे के तहत उन्हें संगठित और सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया है। जाहिर है, वाट्सऐप, फेसबुक या ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के मंचों पर अफवाह के संदेशों पर नजर रखने की जरूरत है। लेकिन नफरत, उन्माद या हिंसा फैलाने के मकसद से फर्जी संदेश या वीडियो को तैयार करने वालों तक पहुंचना और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई ज्यादा जरूरी है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App