read editorial about narendra modi china visit - संपादकीयः रिश्तों में मजबूती - Jansatta
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संपादकीयः रिश्तों में मजबूती

शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में जिस तरह भारत और चीन थोड़ा और करीब आए उससे दोनों देशों के बीच काफी समय से चल रहे तनाव कम होने और विश्व पटल पर भारत की मजबूती बढ़ने के संकेत मिले हैं।

Author June 11, 2018 4:41 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। (फोटो सोर्स- ट्विटर/@MEAIndia)

शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में जिस तरह भारत और चीन थोड़ा और करीब आए उससे दोनों देशों के बीच काफी समय से चल रहे तनाव कम होने और विश्व पटल पर भारत की मजबूती बढ़ने के संकेत मिले हैं। हालांकि करीब एक महीना पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के वुहान शहर में वहां के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अनौपचारिक रूप से मिले थे, पर उस मुलाकात में ही दोनों देशों के रिश्तों में आई गर्मजोशी स्पष्ट हो गई थी। जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी का विशेष सत्कार किया था और तभी दोनों देशों के बीच बहने वाली नदियों के जलस्तर, व्यापार और आतंकवाद रोकने संबंधी मसलों पर सहयोग की सहमति बन गई थी। शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के मोके पर दोनों नेताओं ने दो महत्त्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। अब दोनों देश ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के जलस्तर संबंधी जानकारी साझा करेंगे। अभी तक चीन ब्रह्मपुत्र के जलस्तर की जानकारी देने में आनाकानी करता रहा है, जिसके चलते भारत में बाढ़ से तबाही की स्थिति पैदा होती रही है। अब चीन का सहयोग मिलने से बाढ़ के संकट से पार पाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा चीन भारत से चावल की खरीद करेगा, जिससे कारोबार में इजाफा होगा।

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की इस मुलाकात की एक उपलब्धि यह भी रही कि दोनों देश आतंकवाद रोकने के लिए परस्पर सहयोग बढ़ाने पर राजी हुए हैं। इसकी रूपरेखा जल्दी ही तैयार कर ली जाएगी। दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए अपेक्षित कदम उठाए जाएंगे। इस बार शंघाई सहयोग संगठन की बैठक का केंद्र बिंदु क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने पर था। आतंकवाद रोकने में सहयोग देने को लेकर चीन की रजामंदी का अर्थ है कि न सिर्फ दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव हो सकेगा, बल्कि पाकिस्तान पर नकेल कसना भी आसान होगा। अभी तक आतंकवाद के मुद्दे पर चीन पाकिस्तान का बचाव करता रहा है। भारत के साथ सहयोग का करार होने के बाद वह ऐसा करने से बचेगा। पिछले चार सालों में यह प्रधानमंत्री मोदी की चौदहवीं चीन यात्रा थी और इस बार दोनों देशों के बीच जिस तरह नजदीकी कुछ और बढ़ती दिखी उससे उम्मीद बनती है कि चीन का ध्यान पाकिस्तान की तरफ से हटेगा।

यह अकारण नहीं है कि भारत और चीन के बीच बढ़ती नजदीकियों से पाकिस्तान बहुत आहत है। प्रधानमंत्री मोदी की वुहान यात्रा के समय पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मीडिया से कहा भी कि चीन हमारा स्वाभाविक दोस्त रहा है, पर हमारी सुस्ती और कमजोर नीतियों के चलते वह भारत के नजदीक जाने लगा है। उसे चिंता है कि अगर भारत और चीन की दोस्ती इसी तरह बढ़ती रही और आतंकवाद रोकने के मुद्दे पर वे सहयोग को तत्पर हो गए, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी स्थिति और कमजोर हो जाएगी। कहीं किसी दिन चीन संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकी सूची में मौलाना मसूद अजहर का नाम शामिल करने का विरोध न छोड़ दे। उसे यह भी चिंता है कि चीन से नजदीकी बढ़ा कर भारत अपने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के अभियान में सफल हो सकता है। इसके अलावा चीन के सहयोग से भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता भी प्राप्त कर सकता है। अभी तक चीन उसकी सदस्यता का विरोध करता रहा है। इस तरह दोनों देशों के नेताओं की ताजा मुलाकात और आगे की योजनाओं पर बातचीत से अच्छे संकेत मिले हैं।

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