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संपादकीयः संघर्ष अविराम

पाकिस्तान की ओर से भारतीय ठिकानों पर हमलों का सिलसिला जारी है। हाल की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि समझाने की तमाम कोशिशों के बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।

Author June 14, 2018 5:10 AM
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान जिस तरह से भारतीय ठिकानों को लगातार निशाना बना रहा है, उससे स्पष्ट है कि संघर्ष विराम उसके लिए कोई अर्थ नहीं रखता है।

पाकिस्तान की ओर से भारतीय ठिकानों पर हमलों का सिलसिला जारी है। हाल की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि समझाने की तमाम कोशिशों के बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। रमजान के पवित्र महीने में भी जिस तरह के हमले किए जा रहे हैं, वह उसकी मंशा के बारे में बताने के लिए काफी है। ताजा घटना में मंगलवार रात सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने भारतीय चौकियों पर गोलियां बरसार्इं। छह घंटे तक की गई गोलीबारी में भारतीय सीमा सुरक्षा बल के एक सहायक कमांडेंट सहित चार जवान शहीद हो गए और पांच जवान घायल हो गए। शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब पाकिस्तान भारत को नुकसान पहुंचाने वाली कोई कार्रवाई न करता हो। मंगलवार को ही आतंकवादियों ने पुलवामा की जिला अदालत की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया, जिसमें दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए। अनंतनाग जिले में भी आतंकियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर हथगोलों से हमला कर दिया, जिसमें पांच जवान घायल हो गए। ये घटनाएं सिर्फ एक दिन की हैं।

अभी एक महीना भी नहीं बीता है जब पाकिस्तान ने संघर्ष विराम पर अमल करने का भरोसा दिया था। पिछले महीने की उनतीस तारीख को भारत और पाकिस्तान के सैन्य महानिदेशकों की बैठक में 2003 में किए गए संघर्ष विराम समझौते को लागू करने पर सहमति बनी थी। तब पाकिस्तान ने भरोसा दिया था कि वह अपनी ओर से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करेगा जो उकसावे वाली हो। लेकिन पाकिस्तान ने तीन जून को ही अपना रंग दिखा दिया और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर प्रागवाल, कानाचक और खौर सेक्टर में भारतीय ठिकानों पर जमकर गोलियां बरसार्इं। इस हमले में बीएसएफ के दो जवान शहीद हो गए और कुछ नागरिकों सहित दस लोग घायल हुए। पाकिस्तान जिस तरह भारतीय चौकियों और सीमा के पास स्थित गांवों की बस्तियों को निशाना बनाता रहा है, उससे साफ है कि उसका मकसद अधिक से अधिक संख्या में भारतीय जवानों को हताहत करना और नागरिकों में खौफ पैदा करना है। वह इन कामों को पाकिस्तानी रेंजर्स के जरिए तो कराता ही है, जगह-जगह आतंकी हमले करना भी उसकी रणनीति का हिस्सा है। पिछले महीने के मध्य में पाकिस्तान की ओर से भारी गोलीबारी के कारण हजारों लोग अपने घरों को छोड़ सुरक्षित ठिकानों पर जाने को मजबूर हुए थे।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान जिस तरह से भारतीय ठिकानों को लगातार निशाना बना रहा है, उससे स्पष्ट है कि संघर्ष विराम उसके लिए कोई अर्थ नहीं रखता है। हमले नहीं करने का उसका वादा भी झूठा साबित हुआ है। पिछले महीने उसने घुसपैठ की कई घटनाओं को अंजाम दिया। यह जगजाहिर है कि पिछले महीने प्रधानमंत्री के कश्मीर दौरे से पहले इस तरह की घटनाओं का मकसद क्या रहा। लेकिन इन सबके बाद भी भारत ने अपनी तरफ से सदाशयता का परिचय दिया है। रमजान के दौरान सैन्य अभियानों और कार्रवाइयों पर रोक इसका बड़ा सबूत है। हालांकि इस दौरान भी रोजाना कहीं न कहीं आतंकी हमले होते रहे। भारत हमेशा से कहता आया है कि वह पाकिस्तान के साथ बातचीत का विरोधी नहीं है, लेकिन पहले पाकिस्तान को हमले बंद करने होंगे। जबकि पाकिस्तान की ओर से कभी कोई ऐसा संकेत नहीं मिला। बल्कि रमजान के महीने का इस्तेमाल उसने भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने में किया। कश्मीर में आतंकी संगठनों में स्थानीय नौजवानों के भर्ती होने की खबरें भी चिंता पैदा करने वाली हैं।

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