ताज़ा खबर
 

राहत की दर

आखिरकार रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने वही किया, जैसा वित्त मंत्रालय चाहता था।

Author October 3, 2015 5:06 PM

आखिरकार रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने वही किया, जैसा वित्त मंत्रालय चाहता था। देश के सामने नई मौद्रिक नीति पेश करते हुए उन्होंने नीतिगत दरों में कटौती की घोषणा की। यह कटौती भी शायद उम्मीद से थोड़ी अधिक है। आमतौर पर रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में चौथाई फीसद की हेरफेर करता है।

मगर मंगलवार को घोषित की गई नई मौद्रिक नीति के मुताबिक नीतिगत दरों में आधा फीसद की कमी की गई है। जाहिर है, इसके पीछे पूंजी की उपलब्धता बढ़ाने तथा बाजार में मांग को प्रोत्साहित करने का मकसद होगा। जब भी मौद्रिक नीति की नई समीक्षा जारी करने का वक्त आता है, रिजर्व बैंक के सामने एक दुविधा खड़ी होती रही है, वह यह कि महंगाई नियंत्रण और विकास दर को प्रोत्साहित करने में वह किसे प्राथमिकता दे।

उद्योग जगत की हमेशा यही उम्मीद रहती है कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में नरमी लाए, ताकि निवेशकों और ग्राहकों, दोनों को बैंकों से अपेक्षया आसान दरों पर कर्ज उपलब्ध हों और कर्जों की किस्तों के भुगतान में भी राहत मिले। पर हर बार रिजर्व बैंक के लिए इस उम्मीद को पूरा करना संभव नहीं हो सकता। बल्कि कई महंगाई पर काबू पाने के मकसद से उसे ब्याज दरें बढ़ानी पड़ी हैं। कई बार दरों को यथावत रख कर रिजर्व बैंक बीच का रास्ता निकालता है या देखो और इंतजार करो की नीति अख्तियार करता है।

इस बार रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो रेट घटा कर 5.75 फीसद और रेपो रेट घटा कर 6.75 फीसद कर दिया है। अलबत्ता सीआरआर यानी नकद आरक्षित अनुपात को अपरिवर्तित रखा है, जो कि चार फीसद है। सीआरआर वह अनुपात होता है जिसे बैंकों को अनिवार्य तौर पर केंद्रीय बैंक के पास जमा रखना होता है। रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक अपनी राशि रिजर्व बैंक के पास जमा करते हैं, वहीं रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक, केंद्रीय बैंक से उधार लेते हैं।

ताजा फैसले का नतीजा यह होगा कि तमाम बैंक ग्राहकों को कर्ज देने के लिए उत्साहित होंगे, साथ ही ब्याज दरों में थोड़ी कमी आएगी। मकान, वाहन आदि के लिए लिये जाने वाले कर्जों की मासिक किस्तें कुछ कम होंगी। मौद्रिक नीति में ऐसा फेरबदल बिल्कुल मौजूं है। कुछ महीनों से जिस तरह के आंकड़े लगातार आ रहे थे उनसे साफ था कि रिजर्व बैंक को अब महंगाई की चिंता छोड़ कर अर्थव्यवस्था को गति देने के तकाजे की सुध लेनी होगी। रिजर्व बैंक ने जनवरी 2016 तक मुद्रास्फीति को छह फीसद की सीमा में लाने का लक्ष्य रखा था।

पिछले महीने यह चार फीसद से नीचे थी। दूसरी ओर, कुछ महीनों से घरेलू मांग में सुस्ती का आलम रहा है। इसलिए रिजर्व बैंक ने सही कदम उठाया है। पर यह दावे से नहीं कहा जा सकता कि अगली मौद्रिक समीक्षा में यही रुझान नजर आएगा। क्योंकि खुद रघुराम राजन का मानना है कि मुद्रास्फीति कुछ महीनों के लिए बढ़ सकती है, क्योंकि अब तक अनुकूल रहा आधार-प्रभाव अब उलट सकता है। इस अंदेशे के पीछे कई राज्यों में सूखे के हालात होना एक प्रमुख कारण होगा। शायद इसलिए भी रघुराम राजन ने नीतिगत दरों में कटौती की उद्योग जगत की मांग पूरी करने के बावजूद मौजूदा वित्तवर्ष में विकास दर का अनुमान पहले के 7.6 फीसद से घटा कर 7.4 फीसद कर दिया है।

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta
ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App