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संपादकीयः आशंका और उम्मीद

इस बार लग रहा था कि नए वित्तवर्ष 2018-19 की पहली मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में कमी करेगा।

Author April 7, 2018 4:20 AM
उर्जित पटेल

इस बार लग रहा था कि नए वित्तवर्ष 2018-19 की पहली मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में कमी करेगा। पर उसने ऐसा नहीं करके आर्थिक विश्लेषकों को चौंका दिया। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों को यथावत रखा है। रेपो दर छह फीसद पर और रिवर्स रेपो दर पौने छह फीसद पर ही बनी रहेगी। यह लगातार चौथी बार है जब रिजर्व बैंक ने इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले साल अगस्त में रेपो दर में चौथाई फीसद की कटौती की गई थी। जिन लोगों ने मकान, गाड़ी या दूसरी जरूरतों के लिए बैंकों से कर्ज ले रखा है, वे बड़ी आस लगाए रहते हैं कि नीतिगत दरों में कमी हो तो उनके बैंक भी ब्याज घटाएं और मासिक किस्तों का बोझ हल्का हो। लेकिन केंद्रीय बैंक को फिलहाल भविष्य के बारे में ऐसे संकेत नजर नहीं आ रहे हैं जिनके भरोसे वह नीतिगत दरों को नीचे लाने का साहस कर पाता। रिजर्व बैंक ने पूरे वित्तवर्ष का जो खाका पेश किया है, उससे लगता नहीं कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती होगी। हालांकि व्यावसायिक बैंकों को यह छूट दी गई है कि वे चाहें तो अपने स्तर पर ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं। पर क्या ये बैंक अपने स्तर ऐसा कर बड़ा जोखिम लेंगे? दरअसल, ज्यादातर बैंक इस वक्त एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) के संकट से जूझ रहे हैं। बैंकों की हालत खस्ता है। ऐसे में अगर बैंक ग्राहकों को राहत देते भी हैं तो इसकी भरपाई दाएं-बाएं करके ग्राहकों से ही करेंगे।

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पिछले कुछ समय में ज्यादातर देशों में ब्याज दरें बढ़ी हैं। लेकिन रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नीतिगत दरों में बदलाव न करने के पीछे जो तर्क दिया है, वह आने वाले वक्त में सीधा महंगाई की ओर इशारा करता है। इस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान चढ़े हुए हैं। यह चुनावी साल भी है जिसमें खरीफ फसलों की ज्यादा कीमत देने से महंगाई बढ़ने के आसार हैं। कई राज्यों ने अपने कर्मचारियों का आवास भत्ता भी बढ़ाया है। सबसे चिंताजनक बात राजकोषीय स्थिति को लेकर है। सरकार कह चुकी है कि 31 मार्च को समाप्त पिछले वित्तवर्ष के दौरान राजस्व लक्ष्य प्राप्ति आम बजट में रखे गए संशोधित अनुमान से कम रहेगी। ऐसे में रिजर्व बैंक नीतिगत दरों को नीचे लाने का जोखिम कैसे उठाता?

यह सही है कि महंगाई की आशंकाओं को लेकर ही केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरें कम नहीं कीं। लेकिन पहली छमाही के लिए रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति केअनुमानों को घटाया है। फरवरी में मौद्रिक समीक्षा के दौरान पहली छमाही के लिए रिजर्व बैंक ने महंगाई दर 5.1 से 5.8 फीसद रहने का अनुमान व्यक्त किया था, लेकिन अब इसमें संशोधन करते हुए इसे 4.7 से 5.1 फीसद कर दिया है। अगर मानसून अच्छा रहा, जैसी कि भविष्यवाणी की गई है, तो दूसरी छमाही के लिए महंगाई दर का यह अनुमान और कम यानी 4.4 फीसद तक आ सकता है। कुल मिलाकर सब अनुमानों और संभावनाओं पर आधारितहै, ठोस रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता और इस हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता कि महंगाई की मार आम आदमी को ही झेलनी है।

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