इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि जो कानून या नियम-कायदे कभी आपात स्थिति या बहुत जरूरी होने पर ही प्रयोग किए जाने के लिए बनाए गए होंगे, उन्हें कई बार कुछ खास लोगों को विशेष सुविधा मुहैया कराने का औजार बना लिया जाता है। यह एक तरह से किसी कानून का दुरुपयोग है और जब लगातार ऐसा होता है, तो सवाल उठता है कि क्या सरकार नागरिकों के प्रति किसी कानून को बरतने के मामले में अपने स्तर से भी भेदभाव करती है। वरना क्या वजह है कि जघन्य अपराधों में दोषी ठहराए गए किसी सजायाफ्ता को सिर्फ इसलिए बार-बार किसी कानून का लाभ दिया जाता है कि वह ऊंची रसूख वाला है या फिर उसकी खासी राजनीतिक पैठ है?

गौरतलब है कि हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर इक्कीस दिन की फरलो दी गई है। यानी इस सुविधा के मिलने के बाद फिर से राम रहीम रोहतक स्थित सुनारिया जेल से बाहर निकल कर अपने आश्रम में रहेगा। इससे पहले भी उसे बारह बार पैरोल और पांच बार फरलो की सुविधा मिल चुकी है। ऐसा लगता है कि राम रहीम अपनी सजा को सिर्फ औपचारिकता भर के लिए अपनी सुविधा के मुताबिक काट रहा है और उसे जब जरूरत पड़ती है, वह किसी न किसी बहाने जेल से बाहर आने का रास्ता बना लेता है।

सवाल है कि जिन नियम-कायदों के तहत राम रहीम को इस तरह की छूट बार-बार दी जा रही है, क्या सरकार यह दावा करने की स्थिति में है कि इस मामले में वह पूरी तरह तटस्थ और न्याय के तकाजे के मुताबिक काम कर रही है। बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध में जिस व्यक्ति को सजा हुई, उसे लेकर इस स्तर पर जाकर नरमी बरतने का आखिर क्या कारण है? इस पर विपक्षी दलों और अनेक सामाजिक संगठनों की ओर से तीखी आपत्ति और विरोध जाहिर किए जाने पर सरकार की सफाई है कि राम रहीम को इस तरह की रिहाई नियमों के तहत दी जाती है।

क्या सरकार गंभीर अपराधों की सजा काटने वाले अन्य लोगों के प्रति भी समान मानकों के तहत ऐसा ही रुख अपनाती है? फिर किसी भी कैदी को लेकर इतना उदार रवैया दिखाने की क्या वजह हो सकती है कि पिछले दस साल में उसे सत्रह बार अलग-अलग कारणों से कभी पैरोल पर, तो तभी फरलो पर जेल से बाहर अपना समय सुविधाजनक तरीके से काटने की छूट दी जाती है?

यों राम रहीम को इस तरह जेल से बाहर रहने की सुविधा मुहैया कराते हुए शायद केवल उसकी जरूरतों का ही ध्यान रखा जाता है! मगर एक विचित्र संयोग यह भी देखा गया है कि जब भी उसके प्रभाव क्षेत्र में चुनाव होने वाले होते हैं, तब आमतौर पर उसे खासी अवधि के लिए पैरोल या फिर फरलो की सुविधा मिल जाती है। फिलहाल पंजाब में विधानसभा चुनावों का समय करीब है और कई उत्तरी राज्यों सहित हरियाणा तथा पंजाब में राम रहीम के अनुयायी बड़ी संख्या में हैं।

ऐसे में स्वाभाविक ही ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि राम रहीम को दरअसल चुनावी लाभ उठाने के मकसद से बार-बार जेल से बाहर निकलने की इजाजत दी जाती है। सरकार को शायद इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि राम रहीम के प्रति इस तरह उदारता बरतने के क्रम में कानून की मनमानी व्याख्या करने की वजह से न्याय की अवधारणा को किस स्तर पर चोट पहुंच रही है।