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प्रभु का पिटारा

भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन सेवा है। इसलिए इससे ढेर सारी उम्मीदें जुड़ी रहती हैं और रेल बजट के समय वे परवान चढ़ी होती हैं। स्वाभाविक है कि रेल बजट को इन आकांक्षाओं के हिसाब से देखा जाता है। इसका असर भी पड़ता रहा है। हर रेल बजट में कई नई रेलगाड़ियां […]

Author February 27, 2015 10:00 PM
मोदी सरकार का पहला पूर्ण रेल बजट कई मायनों में लीक से हट कर है।

भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन सेवा है। इसलिए इससे ढेर सारी उम्मीदें जुड़ी रहती हैं और रेल बजट के समय वे परवान चढ़ी होती हैं। स्वाभाविक है कि रेल बजट को इन आकांक्षाओं के हिसाब से देखा जाता है। इसका असर भी पड़ता रहा है। हर रेल बजट में कई नई रेलगाड़ियां चलाने, अनेक रेलगाड़ियों की दूरी बढ़ाने से लेकर ढांचागत परियोजनाओं और कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने, रेलवे की माली हालत सुधारने जैसी ढेर सारी घोषणाएं होती रही हैं। दुर्घटनाएं रोकने और रेल यात्रियों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने के वादे दोहराए जाते रहे हैं।

पर रेलवे की कई मूलभूत समस्याएं ज्यों की त्यों रहती हैं। मसलन, सबसे ज्यादा लंबित और धीमी गति से चलने वाली केंद्रीय परियोजनाएं रेलवे की ही हैं, जिसके चलते लागत में इजाफा होता है और संसाधन जुटाने का बेजा दबाव बढ़ता है। रेलमंत्री सुरेश प्रभु से उम्मीद थी कि वे रेलवे की इस बीमारी को दूर करने के लिए कोई निर्णायक पहल करेंगे। पर रेल बजट इस बारे में खामोश है। संसाधन जुटाने की बाबत भी स्पष्ट ब्योरे का अभाव है। इस मामले में निवेश बढ़ाने पर जोर देकर छुट्टी पा ली गई है। लेकिन यह निवेश किस क्षेत्र में कहां से आएगा, इस बारे में साफ-साफ बताना रेलमंत्री ने जरूरी क्यों नहीं समझा? इन सवालों का उत्तर बजट नहीं देगा तो कहां से मिलेगा?

बहरहाल, मोदी सरकार का पहला पूर्ण रेल बजट कई मायनों में लीक से हट कर है। लोकलुभावन घोषणाएं नहीं की गई हैं। रेलमंत्री रेलवे की वित्तीय सेहत सुधारने पर जोर दे रहे थे। इससे लगने लगा था कि शायद किराए बढ़ेंगे। पर किराए नहीं बढ़े हैं। असल में किराया-वृद्धि से बचने की गुंजाइश डीजल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने पैदा कर दी थी। इस रेल बजट की सबसे बड़ी खासियत सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ाने की योजनाएं हैं।

मुसाफिरों की शिकायतें दूर करने के लिए पूरे देश में एक हेल्पलाइन नंबर शुरू किया जाएगा, एक मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया जा रहा है। चार सौ स्टेशनों पर वाइ-फाइ की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। सभी नवनिर्मित डिब्बे ब्रेलयुक्त होंगे, जिससे नेत्रहीनों को सुविधा होगी। अब जरूरतमंद लोग वीलचेयर के लिए आॅनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन के आने से पहले टेक्नोलॉजी के जरिए ऑडियो चेतावनी शुरू करने की बात भी रेल बजट में कही गई है। साफ-सफाई के लिए एक नया विभाग बनेगा और कर्मचारियों को नवीनतम तकनीक और तरीकों से लैस किया जाएगा। अब चार महीने पहले टिकट आरक्षित कराए जा सकेंगे, जिससे आरक्षण की आपाधापी कम हो सकेगी।

रेलवे के कामकाज को लेकर एक पुरानी शिकायत यात्रियों के प्रति रेल प्रशासन के व्यवहार और कर्तव्य में कोताही बरते जाने की रही है। रेलमंत्री ने कहा है कि संगठनात्मक प्रदर्शन में सुधार के लिए मानव संसाधन आॅडिट व्यवस्थित रूप से शुरू किया जाएगा। कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें नई तकनीकों और बेहतर तौर-तरीकों का प्रशिक्षण देने के लिए एक रेल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।

रेलवे अनुसंधान संस्थान भी खोला जाएगा। शायद यह पहला बजट है जब कोई नई ट्रेन चलाने की घोषणा नहीं की गई है। पर रेलमंत्री ने कहा है कि अभी समीक्षा हो रही है, इस तरह की कुछ घोषणाएं संसद के इसी सत्र में की जा सकती हैं। पर राजधानी और शताब्दी समेत तमाम रेलगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने का एलान रेलमंत्री ने जरूर किया है। अनारक्षित डिब्बों की संख्या बढ़ाने का भरोसा दिलाया गया है। इस तरह निश्चय ही इस बजट में कई सराहनीय कदम उठाए गए हैं। पर दूसरी ओर, लंबित परियोजनाओं से लेकर संसाधन तक, कई सवाल अनुत्तरित हैं।

 

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