वैश्विक व्यापार के विस्तार के लिए यह जरूरी है कि समुद्री क्षेत्र पूरी तरह खुले एवं स्वतंत्र हों। विश्व की मौजूदा व्यवस्था में हर देश की अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर काफी हद तक निर्भर करती है। ऐसे में अगर किसी समुद्री क्षेत्र पर एक देश का कब्जा हो जाए, तो वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला बाधित होने से अन्य देशों के हित स्वाभाविक रूप से प्रभावित होंगे, जैसा कि होर्मुज जलमार्ग को अवरुद्ध करने से दुनिया भर में ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी इस तरह की आशंकाएं व्यक्त की जाती रही हैं, क्योंकि चीन इस क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करने की लगातार कोशिश करता रहा है।

यही वजह है कि चार देशों के संगठन क्वाड (Quadrilateral Security Dialogue) की नई दिल्ली में मंगलवार को हुई बैठक में इस मसले पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान समुद्री निगरानी और बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत करने के लिए नए उपायों की घोषणा भी की गई। साथ ही इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को खतरे में डालने, बल प्रयोग या दबाव बनाने वाली एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध किया गया।

क्वाड में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं

क्वाड में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। इसके गठन का मूल उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के साथ जहाजों की मुक्त आवाजाही को बनाए रखना है। यह बात छिपी नहीं है कि इस क्षेत्र में चीन अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ाने की कोशिश में जुटा है, ताकि उसका दबदबा कायम हो सके और वह अपने हितों के अनुरूप इस समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल कर सके।

होर्मुज जलमार्ग को बाधित करने से उपजे वैश्विक संकट के मद्देनजर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त आवाजाही का मसला और भी ज्यादा प्रासंगिक एवं महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि वैश्विक समुद्री व्यापार का साठ प्रतिशत इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।

ऐसे में अगर भविष्य में होर्मुज जलमार्ग जैसी जटिल स्थिति इस क्षेत्र में पैदा होती है, तो दुनिया में कितना बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

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भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अभिन्न हिस्सा हैं और इस मुद्दे पर किसी भी दूसरे देश की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी। चीन और पाकिस्तान की तरफ से जारी किए गए संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने इसे “बिल्कुल बेवजह और अनुचित” बताया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक