पंजाब में पिछले कुछ समय से आतंकी गतिविधियां अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। साफ है कि उग्रवाद का दंश झेल चुके इस राज्य में खालिस्तान समर्थक आतंकी तंत्र फिर से सांस लेने लगा है। अलग-अलग समूहों के जरिए सक्रिय आतंकी अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए मौके की तलाश में रहते हैं। इनके ठिकानों का पता लगाना और इनकी धर-पकड़ सुरक्षा एजंसियों के लिए बड़ी चुनौती है।

पटियाला में शंभू इलाके के पास सोमवार देर रात एक मालगाड़ी के गलियारे की पटरी पर विस्फोट की घटना से स्पष्ट है कि राज्य में आतंक का खतरा बढ़ रहा है। हालांकि, पुलिस ने इस आतंकी समूह से जुड़े चार संदिग्ध व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया, तो राज्य में हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। सुरक्षा एजंसियों का दावा है कि पंजाब में सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन सवाल है कि आतंकी तंत्र को कैसे खत्म किया जाए।

गौरतलब है कि पटियाला में शंभू इलाके के पास आतंकियों ने रेल की पटरी को निशाना बनाकर विस्फोट किया था। घटनास्थल से एक संदिग्ध व्यक्ति का शव भी बरामद किया गया और पुलिस का दावा है कि वह उसी आतंकी गिरोह का सदस्य था, जिसने इस वारदात की साजिश रची थी। पटरी पर विस्फोटक लगाने के दौरान हुए धमाके में उसकी मौत हो गई। पिछले तीन माह में मालगाड़ी के गलियारे को निशाना बनाकर किया गया यह दूसरा हमला था।

इससे पहले फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद में 23 जनवरी को विस्फोट हुआ था, जिसमें एक ट्रेन का इंजन क्षतिग्रस्त हो गया था और एक रेलवे अधिकारी को चोटें आईं थी। पंजाब में आतंकी तंत्र के फैलते दायरे का अंदाजा इससे लगाया जा सकता कि पिछले वर्ष जुलाई में सुरक्षा एजंसियों ने बब्बर खालसा इंटरनेशनल के तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इसके करीब तीन माह बाद ग्रेनेड हमले की साजिश रच रहे दस संदिग्धों की धर-पकड़ की गई थी। हाल में मोहाली की एक अदालत और कुछ स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां दी गई थीं।

यह सच है कि पंजाब में पिछले कुछ समय में सुरक्षा एजंसियों ने कई आतंकी गिरोहों का भंडाफोड़ किया है और जांच में सामने आया है कि उन्हें सीमा पार से तस्करी के जरिए हथियार और विस्फोटक पदार्थ मुहैया कराए जाते रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, पटियाला के शंभू इलाके में हुए विस्फोट में जिस आतंकी की मौत हुई, वह उस खालिस्तान समर्थक आतंकी तंत्र का हिस्सा था, जिसे मलेशिया से संचालित किया जा रहा था। राज्य के एक राजनीतिक दल से उसके संबंधों की खबरें भी आई हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि अभी नहीं की गई है।

इस गिरोह के सदस्य कट्टरपंथी युवाओं को आतंकी प्रशिक्षण के लिए मलेशिया भेजते थे। यही नहीं, राज्य में सक्रिय कुछ आतंकियों के तार पाकिस्तान और कनाडा से भी जुड़े हैं। इससे स्पष्ट है कि उग्रवाद के खात्मे के बाद शांति और समृद्धि की राह पर लौटे पंजाब में आतंक का खतरा फिर से बढ़ता जा रहा है। राज्य में विपक्षी दलों की ओर से भी बार-बार यह मसला उठाया जाता रहा है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर इस खतरे से निपटने के लिए रणनीति बनानी होगी, ताकि आतंक की जड़ पर प्रहार किया जा सके।