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राजस्व का राजमार्ग

इस तरह राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश से बचने के लिए चोर गली निकाल ली है जिसमें राजमार्गों के किनारे आधा किलोमीटर के भीतर शराब की बिक्री प्रतिबंधित कर दिया गया था।

Author June 26, 2017 5:23 AM
शराब।

पंजाब सरकार का ताजा फैसला राजमार्गों के किनारे शराब बिक्री पर पाबंदी के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में सेंध लगाने का प्रयास ही मालूम पड़ता है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते राज्य मंत्रिमंडल ने पंजाब आबकारी अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी। संशोधन के मुताबिक हाइवे से पांच सौ मीटर के भीतर होटल, रेस्तरां और क्लब शराब की बिक्री कर सकेंगे। संशोधन के इस प्रस्ताव को विधानसभा की भी मंजूरी मिल गई। इस तरह राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश से बचने के लिए चोर गली निकाल ली है जिसमें राजमार्गों के किनारे आधा किलोमीटर के भीतर शराब की बिक्री प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसी के साथ उसने अदालत के उस आदेश की मनचाही व्याख्या भी पेश की है। उसका कहना है कि अदालत ने राजमार्गों के किनारे आधा किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों के लिए प्रतिबंध लगाया था, जो कि होटल, रेस्तरां, क्लब आदि पर लागू नहीं होता। पता नहीं यह व्याख्या अदालत को स्वीकार होगी या नहीं, पर इस सुविधाजनक व्याख्या के पीछे पंजाब सरकार की मंशा का अंदाजा लगाया जा सकता है। पंजाब में शराब का कारोबार काफी बड़ा है और शराब की बिक्री राजस्व का एक बड़ा स्रोत रही है। इसका अंदाजा इस तथ्य से भी लगाया जा सकता है कि हाल में शराब की दुकानों की नीलामी से पंजाब सरकार की झोली में छब्बीस सौ करोड़ रुपए आए।

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लेकिन पंजाब अकेला राज्य नहीं है जिसे सर्वोच्च अदालत के फैसले से परेशानी हो रही थी। कई और राज्यों ने अदालत का आदेश आते ही रोना-धोना शुरू कर दिया था। राजस्व की चिंता तो सारी राज्य सरकारों को थी, पर कुछ राज्यों ने आदेश के पालन में व्यावहारिक कठिनाई भी बताई। मसलन, पूर्वोत्तर के राज्यों का कहना था कि उनके यहां के राजमार्ग पहाड़ी इलाकों से गुजरते हैं और वहां यह गुंजाइश नहीं है कि किनारे की दुकान को आधा किलोमीटर से ज्यादा भीतर स्थानांतरित किया जा सके। उन्हें बस बंद किया जा सकता है। सर्वोच्च अदालत ने राजमार्गों के किनारे आधा किलोमीटर के दायरे में शराब बिक्री न करने का आदेश एक स्वयंसेवी संगठन की याचिका पर दिया था। याचिका में देश में सड़क हादसों से संबंधित खुद सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए राजमार्गों के किनारे शराब की बिक्री प्रतिबंधित करने की मांग की गई थी।

भारत सड़क हादसों में दुनिया में पहले नंबर पर है। 2015 में भारत में हर रोज औसतन चार सौ लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए। तब से यह आंकड़ा कुछ और बढ़ा ही है। फिर, बड़ी तादाद में लोग जख्मी भी होते हैं और उनमें से कुछ हमेशा के लिए अपंग हो जाते हैं। तेज रफ्तार, ओवरटेक करने समेत यातायात नियमों के उल्लंघन से लेकर सड़कों में गड््ढे होने और रात के समय कई जगह पर्याप्त रोशन न होने तक, सड़क हादसों की अनेक वजहें हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाना भी एक मुख्य वजह है, और यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इसलिए सर्वोच्च अदालत के आदेश की प्रासंगिकता से इनकार नहीं किया जा सकता। फिर, अदालत के आदेश में सेंध लगाने, चोर गली निकालने या आदेश की अपनी-अपनी मनचाही व्याख्या कर उसे लागू करने से क्या अदालत की अवमानना नहीं होगी?

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