पंजाब में पिछले कुछ समय से आतंकी गतिविधियां जिस तरह से बढ़ रही हैं, वह बड़े खतरे की ओर इशारा करती हैं। बीते दस दिनों के भीतर राज्य में तीन बम धमाकों ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। अब तक की जांच-पड़ताल के निष्कर्षों की जो तस्वीर सामने आई है, उससे इस बात के साफ संकेत मिलते हैं कि उग्रवाद का कठिन दौर झेल चुके इस राज्य में खालिस्तान समर्थक आतंकी तंत्र फिर से सिर उठाने लगा है। जलंधर और अमृतसर में मंगलवार रात हुए दो सिलसिलेवार विस्फोटों ने राज्य की सुरक्षा एजंसियों की सतर्कता और खुफिया चौकसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन विस्फोटों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दोनों जगह सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। आतंक के इस तंत्र को लेकर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विभिन्न समूहों से जुड़े ज्यादातर आतंकी किसी आम नागरिक की तरह समाज में घुल-मिलकर रहते हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल होता है। मौका मिलने पर वे अपने आकाओं के निर्देश पर हमला करने के लिए सक्रिय हो जाते हैं।
गौरतलब है कि पंजाब के जलंधर में मंगलवार रात करीब आठ बजे सीमा सुरक्षा बल के पंजाब फ्रंटियर के मुख्यालय के बाहर विस्फोट हुआ। इसके बाद दूसरा धमाका रात करीब ग्यारह बजे अमृतसर में सैन्य छावनी के पास हुआ। जलंधर में हुए विस्फोट की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है और पुलिस ने भी इसकी पुष्टि की है। इससे पहले पटियाला के शंभू इलाके में 27 अप्रैल को एक मालगाड़ी की पटरी पर विस्फोट हुआ था।
पुलिस ने इस सिलसिले में खालिस्तान समर्थक एक आतंकी गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया था। ये घटनाएं खुफिया तंत्र की विफलता और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामी की ओर इशारा करती हैं। राज्य पुलिस का मानना है कि इन आतंकी वारदातों के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। सीमा पार से खालिस्तान समर्थक आतंकी समूहों को प्रशिक्षण, विस्फोटक सामग्री और हथियार मुहैया कराए जा रहे हैं। मगर सवाल है कि सुरक्षा एजंसियां इस तरह की गतिविधियों पर नियमित नजर रखने और किसी भी वारदात से पहले ही आतंकियों को धर-दबोचने में नाकाम क्यों हो रही हैं?
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पुलिस के मुताबिक, अमृतसर में विस्फोट स्थल पर आईईडी के टुकड़े मिले हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह या तो टाइम बम से किया गया विस्फोट था या फिर रिमोट कंट्रोल से धमाका किया गया। ऐसे में सुरक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। अगर सुरक्षाबलों के परिसर में ही चौकसी के बंदोबस्त इतने कमजोर हैं कि कोई भी वहां विस्फोटक सामग्री रख सकता है, तो फिर अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था का स्तर कैसा होगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है।
पंजाब में आतंकी तंत्र के फैलते दायरे का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष जुलाई में सुरक्षा एजंसियों ने बब्बर खालसा इंटरनेशनल के तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इसके करीब तीन माह बाद ग्रेनेड हमले की साजिश में दस संदिग्धों को पकड़ा गया। इससे स्पष्ट है कि उग्रवाद के खात्मे के बाद शांति और समृद्धि की राह पर लौटे इस राज्य में आतंक का खतरा फिर से बढ़ता जा रहा है। अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया, तो निस्संदेह राज्य में हालात फिर से बिगड़ सकते हैं।
