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अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह लक्ष्य बड़ा है, पर सब साथ मिल कर प्रयास करें, तो इसे हासिल करना कठिन नहीं है। इसके लिए उन्होंने सभी राज्यों से सहयोग की अपील की।

Author June 17, 2019 1:09 AM
प्रधानमंत्री मोदी की फाइल फोटो।

नीति आयोग की संचालन परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री ने जो संकल्प दोहराए, अगर उन पर संजीदगी से अमल हो तो अर्थव्यवस्था को लक्ष्य तक पहुंचाने में काफी हद तक कामयाबी मिल सकती है। प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को अगले पांच सालों में पांच हजार अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य बड़ा है, पर सब साथ मिल कर प्रयास करें, तो इसे हासिल करना कठिन नहीं है। इसके लिए उन्होंने सभी राज्यों से सहयोग की अपील की। इसके लिए उन्होंने राज्यों का निर्यात बढ़ाने, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करने, मूलभूत ढांचे के विकास में तेजी लाने, गरीबी, बेरोजगारी आदि जैसी समस्याओं पर काबू पाने की दिशा में रणनीति तैयार करने पर बल दिया। आम चुनाव के बाद सरकार ने सबसे पहले अपना ध्यान अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर केंद्रित किया है। इसके पहले सभी विभागों की बैठक कर प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में संभावित प्रयासों पर विचार-विमर्श के लिए दो समितियों का गठन किया, जिसमें अलग-अलग विभागों के मंत्री शामिल हैं। रिजर्व बैंक को भी इस दिशा में नीतियां बनाने को कहा गया है। इसके तहत बाजार में पूंजी का प्रवाह बढ़ाने के मकसद से पिछले दिनों उसने अपनी रेपो दर में पच्चीस आधार अंक की कटौती भी की।

दरअसल, पिछले कुछ समय से देश की विकास दर संतोषजनक नहीं है। इसमें नोटबंदी, जीएसटी जैसे कुछ फैसलों का भी प्रभाव देखा गया है। सकल घरेलू उत्पाद की दर नीचे गई है। इसमें औद्योगिक क्षेत्र की भागीदारी संतोषजनक नहीं है। इसका असर यह हुआ है कि बेरोजगारी पर काबू पाने में कामयाबी नहीं मिल पाई है। फिर कुछ बैंकों के बट्टे खाते में काफी वृद्धि हुई है। बड़े कर्जों की वसूली नहीं हो पाई, कई बड़े कर्जदार धोखे से बैंकों की पूंजी सोख कर देश छोड़ गए। फिर अपेक्षित विदेशी निवेश भी नहीं आ पाया। महंगाई पर काबू पाने की मंशा से कई मामलों में सरकार को राजस्व में कटौती करनी पड़ी। शिक्षित और कुशल युवाओं को प्रोत्साहन देने तथा देश में उत्पादन बढ़ाने की मंशा से भारी पैमाने पर कर्ज बांटे गए, पर उसके नतीजे अभी तक नजर नहीं आ रहे हैं। इन तमाम बातों की वजह से अर्थव्यवस्था का रुख नीचे की तरफ बना हुआ है। इसे लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। इसलिए सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सबसे पहले ध्यान केंद्रित किया है और बड़ा लक्ष्य सामने रखा है, तो यह अच्छी बात है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती सभी क्षेत्रों के सम्मिलित सहयोग से आती है। उसमें कोई भी क्षेत्र कमजोर रह जाता है, तो वह विकास दर को ऊपर नहीं बढ़ने देता। इसलिए केंद्र सरकार ने सभी विभागों, देश की सभी राज्य सरकारों को इसमें सहभागी बनाने की कोशिश की है, तो बेहतर नतीजों की उम्मीद बनती है। जीएसटी जैसे फैसलों के नतीजे अब नजर आने शुरू होंगे। कौशल विकास और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के परिणाम भी अब दिख सकते हैं। पर इसके लिए औद्योगिक क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ अंदरूनी और बाहरी बाजार के आकार में विस्तार पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा। निर्यात के मामले में हम लंबे समय से पीछे हैं, अगर इसकी दर में बढ़ोतरी होती है, तो औद्योगिक क्षेत्र का विकास होगा और रोजगार की नई संभावनाएं बनेंगी। इस तरह सरकार जिन समस्याओं से पार पाना चाहती है, उसमें कामयाबी मिल सकती है।

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