Viksit Bharat 2047: इसमें कोई दोराय नहीं कि देश को आजादी मिलने के बाद बीते करीब आठ दशक का सफर जहां बहुस्तरीय विकास का जीवंत उदाहरण है, वहीं इस दौरान लोगों ने बहुत सारे उतार-चढ़ाव भी देखे। मगर इस सबके बीच एक संकल्प कायम रहा कि जिन तूफानों और मुश्किलों का सामना करके देश ने स्वतंत्रता हासिल की थी, उसकी गरिमा को कायम रखना और भविष्य को ज्यादा बेहतर बनाना सभी का दायित्व है।

इसमें आमतौर पर सभी नागरिकों ने अपने स्तर पर अपनी सीमा में हर संभव योगदान दिया है और इसे कर्तव्य की तरह निभाया है। यही वजह है कि हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर आजादी के आंदोलन को याद करते हुए देश के पास संतोष और उल्लास के साथ न केवल एक सुनहरे भविष्य का सपना होता है, बल्कि उसे जमीन पर उतारने का हौसला भी दिखता है।

आबादी के ज्यादातर हिस्से के पास विकास की रोशनी पहुंचाने के लिए अलग-अलग दौर की सरकारों ने जिस स्तर पर काम किया, उसे बहुत जटिल संघर्षों के बाद मिली स्वतंत्रता की गरिमा और सपने को नया आयाम देने के प्रयासों के तौर पर देखा जा सकता है।

यों देश की उपलब्धियों को आजादी की लड़ाई के नायकों की भूमिका के आईने में देखना स्वाभाविक ही है, लेकिन हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के मौके पर संघर्ष की संवेदना को महसूस करने की अपनी अहमियत है। इस वर्ष भी यह उत्साह देश के अलग-अलग राज्यों में हर जगह दिखा। जाहिर है, इस अवसर पर जहां अतीत की उपलब्धियों को याद करना एक औपचारिक, लेकिन संवेदना से जुड़ा अध्याय है, वहीं भविष्य की बेहतरी के संकल्प भी जरूरी हिस्सा हैं।

इसी संदर्भ में दिल्ली में लालकिले से प्रधानमंत्री ने भी एक बार फिर वक्त के सुनहरे अध्यायों को याद करते हुए देश को एक बेहतर भविष्य की दिशा में आगे ले जाने का संकल्प दोहराया। उनकी इस बात का अपना महत्त्व है कि देश के विकास के लिए बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और दृढ़ संकल्प होने पर कठिनाइयों और आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने की सामर्थ्य अपने आप सामने आती है।

उन्होंने महिलाओं, युवाओं, किसानों, गरीब और मध्यवर्ग के परिवारों को साथ लेकर 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराया। विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए तैंतीस फीसद आरक्षण लागू करने के लिए सभी राजनीतिक दलों का आह्वान करने के साथ-साथ उन्होंने विकसित भारत बनाने के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का दृष्टिकोण भी साझा किया।

दरअसल, यह देश की आत्मा में बसे उस जीवट का संकेत है, जिसका उदाहरण समय-समय पर दुनिया ने देखा है। यह सही है कि आज भी देश के सामने विकास की कसौटियों के समांतर अनेक जटिलताएं और चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं, लेकिन इन सबके बीच सामान्य स्थितियों से लेकर बेहद संवेदनशील और संकट जैसे हालात में भी लोगों ने धीरज के साथ देश की गति को बनाए रखने में अपना योगदान दिया है, जो वक्त के दस्तावेज में दर्ज होता रहा है।

हालांकि आज भी सीमा पार और कई बार आंतरिक मोर्चों से मिलती चुनौतियां नई रणनीति के तकाजे की जरूरत को रेखांकित करती रही हैं, लेकिन देश ने अपना सफर जारी रखा है। यह बेवजह नहीं है कि आधुनिक तकनीक और दुर्लभ खनिजों के मामले में आज दुनिया भारत की ओर देख रही है। इसलिए यह उम्मीद स्वाभाविक है कि आजादी के बाद अब तक देश में जो मजबूत नींव तैयार हुई है, उस पर विकास की नई इबारत लिखी जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस के.एम. जोसेफ ने हाल ही में केंद्र सरकार से कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा दोबारा की गई जजों की नियुक्ति संबंधी सिफारिशों को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी सिफारिशें केंद्र सरकार पर बाध्यकारी होती हैं और उन पर अमल किया जाना चाहिए, जब तक कि नियुक्ति के खिलाफ कोई ठोस, प्रासंगिक और उचित कारण न हो। पढ़िए पूरा लेख…