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शरीफ का साहस

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान से भरोसा जगा है कि वे आतंकवाद से निपटने को लेकर संजीदा हैं।

Author Published on: February 1, 2016 2:18 AM
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान से भरोसा जगा है कि वे आतंकवाद से निपटने को लेकर संजीदा हैं। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार पठानकोट हमले से जुड़े तथ्यों की जांच करा रही है और जल्दी ही इस मामले में किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सकेगा। भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया की बहाली के लिए शुरू हुई बातचीत सही दिशा में चल रही थी, मगर पठानकोट हमले की वजह से उसमें रुकावट आ गई।

दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और विदेश सचिवों की बातचीत से किसी सकारात्मक नतीजे तक पहुंचने की जो उम्मीद बनी थी, उसमें बाधा आ गई। नवाज शरीफ ने भरोसा दिलाया है कि वे पाकिस्तान की सरजमीं से किसी भी आतंकवादी संगठन को ऐसी कोई गतिविधि चलाने नहीं देंगे, जिससे दोनों देशों के बीच किसी तरह की कड़वाहट पैदा हो। जनवरी में दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच तय बातचीत टाल दी गई थी। भारत ने कहा था कि पाकिस्तान पहले पठानकोट हमले से जुड़े तथ्यों के आधार पर दहशतगर्दों के खिलाफ कड़ी कारर्वाई करे।
पाकिस्तान ने कुछ आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की भी, पर उतने से भरोसा नहीं बन सका है कि वह सचमुच दहशतगर्दी पर नकेल कसने को लेकर गंभीर है। मुंबई मामले से जुड़े सबूतों पर अभी तक उसका रवैया टालमटोल का ही रहा है। पठानकोट मामले में भी उसका कोई निर्णायक कदम नजर नहीं आया है। मगर फिर भी नवाज शरीफ ने विश्वास दिलाया है कि उन्होंने तथ्यों की जांच के लिए सेना, पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारियों का एक दल गठित किया है, जो जल्दी ही अपनी रिपोर्ट दे देगा और किसी भी सूरत में आतंकवादियों को पाकिस्तान की सरजमीं से नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा, तो उनके निश्चय का पता चलता है।

नवाज शरीफ व्यक्तिगत रूप से भारत के साथ बेहतर रिश्तों के हिमायती रहे हैं। इसके पहले भी जब वे प्रधानमंत्री थे और भारत में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी तब दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया की बहाली के लिए कई उल्लेखनीय कदम उठाए गए थे। मगर नवाज शरीफ सरकार की मुश्किल यह है कि उसे सेना, कट्टरपंथी ताकतों और खुफिया एजंसी आइएसआइ के दबाव में काम करना पड़ता है। इस बार जब दोनों देशों के बीच आतंकवाद समाप्त करने को लेकर बातचीत शुरू हुई तभी कयास लगाए जाने लगे थे कि आतंकवादी संगठन कोई न कोई ऐसा कदम जरूर उठाएंगे, जिससे उसमें बाधा पहुंचे। वही हुआ।

आतंकवादी गतिविधियों के कारण केवल भारत नहीं, पाकिस्तान के लिए भी मुश्किलें बढ़ी हैं। वहां से प्रशिक्षण लेकर दहशतगर्द दुनिया भर में दहशत का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। इस वक्त पाकिस्तान पर दुनिया के तमाम ताकतवर मुल्कों का दबाव है कि वह दहशतगर्दी के ठिकानों को नेस्तनाबूद करे। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साफ कहा है कि यह पाकिस्तान के लिए निर्णायक वक्त है। ब्रिटेन और फ्रांस भी चेतावनी दे चुके हैं। इसलिए भी नवाज शरीफ के ताजा बयान को बनावटी मानने का कोई आधार फिलहाल नजर नहीं आता। मगर उनके सामने बड़ी चुनौती है कि वे सेना और आएसआइ की जकड़बंदी से खुद को मुक्त करने का कितना साहस दिखा पाते हैं। जब तक उन्हें इन दोनों का सही मायनों में साथ नहीं मिलेगा, कट्टरपंथी ताकतों और दहशतगर्दों पर नकेल कसना उनके लिए कठिन बना रहेगा। इसके लिए उन्हें इन दोनों महकमों के नेतृत्व का भरोसा जीतना होगा।

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