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संपादकीयः सहज कराधान

पिछले कुछ सालों से कर चोरी रोकने के मकसद से जिस तरह कराधान संबंधी कानूनों को कड़ा बनाया और बड़े कारोबारियों पर आयकर अधिकारियों का अंकुश कुछ अधिक ही कसता देखा गया, उससे उद्योगपतियों में खासी नाराजगी थी।

केंद्र सरकार लगातार कर-प्रणाली को लचीला और सुविधाजनक बनाने का प्रयास कर रही है।

कर सुधार संबंधी केंद्र की नई घोषणाओं से करदाताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है। प्रधानमंत्री ने करदाता चार्टर- पारदर्शी कराधान : ईमानदार का सम्मान- का उद्घाटन करते हुए उम्मीद जताई कि इससे करदाताओं और आयकर विभाग के बीच का विवाद खत्म होगा और कराधान प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। भारत में यह चार्टर पहली बार लागू किया जा रहा है। कुछ देश इसे पहले से अपना रहे हैं। केंद्र सरकार लगातार कर-प्रणाली को लचीला और सुविधाजनक बनाने का प्रयास कर रही है। उसी क्रम में इस साल वेतनभोगी आयकरदाताओं के लिए दो तरह की प्रणाली लागू की गई, जिनमें से वे अपनी सुविधा से किसी एक प्रणाली का चुनाव कर सकते हैं। अब बड़े कारोबारी गतिविधियों से जुड़े करदाताओं को ध्यान में रख कर यह कराधान चार्टर लागू किया गया है। इसमें कंप्यूटर प्रणाली के तहत कर मूल्यांकन और भुगतान की सुविधा उपलब्ध होगी। इस तरह करदाता आयकर विभाग के अधिकारियों की बेजा दखल से बच सकेंगे और किसी प्रकार के विवाद की गुंजाइश नहीं रहेगी। चूंकि आयकर रिटर्न के लिए कंप्यूटरीकृत प्रणाली पहले से काम कर रही है और उसमें रिटर्न दावों का निपटारा शीघ्र हो जाता है, इसलिए बड़े कारोबारों के कर मूल्यांकन में भी इस प्रणाली की सफलता की उम्मीद स्वाभाविक है।

दरअसल, पिछले कुछ सालों से कर चोरी रोकने के मकसद से जिस तरह कराधान संबंधी कानूनों को कड़ा बनाया और बड़े कारोबारियों पर आयकर अधिकारियों का अंकुश कुछ अधिक ही कसता देखा गया, उससे उद्योगपतियों में खासी नाराजगी थी। बहुत सारे उद्योगपतियों को कर संबंधी मूल्यांकन और भुगतान को लेकर आयकर विभाग और अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे थे। इस तरह कारोबारियों का विश्वास जीतना बहुत जरूरी था। लिहाजा, नए चार्टर में कर संबंधी विवाद की गुंजाइश खत्म करने की कोशिश की गई है। अब आयकर अधिकारियों और कारोबारियों का आमना-सामना नहीं होगा। स्वाभाविक ही इससे आयकर विभाग के छापे कम होंगे और कारोबारी कुछ निश्चिंत होकर व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। कोरोना संकट और पूर्णबंदी के बाद जिस तरह पूरी दुनिया आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है, उसमें व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। इसलिए भी उद्योग क्षेत्र के लिए दूसरी सुविधाएं जुटाने के साथ-साथ आयकर संबंधी नियमों और प्रावधानों को सहज बनाना जरूरी था। उम्मीद की जा रही है कि इस नई व्यवस्था से कर भुगतान में भी कुछ तेजी आएगी। सरकार का राजस्व घाटा कुछ कम होगा।

पर जिन देशों में यह कराधान चार्टर लागू है, वहां आबादी का दबाव बहुत कम है और मशीनों के जरिए व्यावसायिक गतिविधियों पर नजर रखना कठिन नहीं है। इसलिए भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में इसकी सफलता को लेकर कुछ लोग संदेह जाहिर कर रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद कर उगाही की जैसी उम्मीद की गई थी, वह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। फिर हमारे यहां कर-चोरी की प्रवृत्ति बड़ी समस्या है, जिस पर काबू पाने के लिए आजमाए गए तमाम उपाय अभी तक विफल ही साबित हुए हैं। इसलिए नए चार्टर में सरकार ने काला धन, गंभीर धोखाधड़ी और कर चोरी के मामलों को इस चार्टर की सुविधाओं से अलग रखा है। उन्हें किसी तरह की रियायत की कोई गुंजाइश नहीं है। फिर भी जो लोग ईमानदारी से कर भुगतान करते थे, उनके लिए इस नए प्रावधान से काफी सहूलियत होगी। उम्मीद की जाती है कि इससे सरकार के प्रति कारोबारियों में विश्वास बहाली भी संभव होगी।

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