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पाकिस्तान का पेच

भारत की तरफ से जो प्रस्ताव रखे गए हैं, उन्हें पाकिस्तान मानने को तैयार नहीं है या फिर कई प्रस्तावों पर खामोश है। भारत की तरफ से प्रस्ताव है कि हर रोज पांच हजार दर्शनार्थियों को जाने की इजाजत दी जाए। विशेष दिनों में यह संख्या दस हजार तक बढ़ी दी जाए।

Author Published on: June 24, 2019 1:02 AM
दूसरे देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों को परमिट पर जाने की इजाजत नहीं होगी।

पाकिस्तान करतारपुर गलियारा खोलने पर राजी हुआ, तो उम्मीद बनी थी कि गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन करने जाने वाले भारतीय नागरिकों को काफी सुविधा हो जाएगी। मगर अब पाकिस्तान जिस तरह उसमें अड़चनें पैदा कर रहा है, उससे इसकी उम्मीद धुंधली ही बनी हुई है। गुरद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर पंजाब की सीमा से लगभग सटा हुआ है, मगर बगैर वीजा के जाने की इजाजत न होने की वजह से बहुत सारे लोग वहां नहीं जा पाते। जो जाते भी हैं, उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इसलिए भारत सरकार लंबे समय से मांग कर रही थी कि करतारपुर गलियारा खोल दिया जाए। इमरान खान की सरकार बनी, तो वे इसके लिए राजी हो गए। मगर भारत की तरफ से जो प्रस्ताव रखे गए हैं, उन्हें पाकिस्तान मानने को तैयार नहीं है या फिर कई प्रस्तावों पर खामोश है। भारत की तरफ से प्रस्ताव है कि हर रोज पांच हजार दर्शनार्थियों को जाने की इजाजत दी जाए। विशेष दिनों में यह संख्या दस हजार तक बढ़ी दी जाए। दर्शनार्थियों में भारतीय नागरिकों के अलावा दूसरे देशों में रह रहे उन लोगों को भी इस रास्ते से जाने की इजाजत हो, जिनके पास भारत की नागरिकता है। फिर दर्शनार्थियों को जत्थे के रूप में भी जाने की इजाजत मिले।

मगर पाकिस्तान ने इन सभी मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। उसका कहना है कि हर दिन सिर्फ सात सौ दर्शनार्थियों को जाने की इजाजत होगी, वह भी विशेष परमिट पर। दूसरे देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों को परमिट पर जाने की इजाजत नहीं होगी। पंद्रह से अधिक लोग समूह में नहीं जा सकते। इससे करतारपुर गलियारा खोलने का मकसद पूरा नहीं होता दिख रहा। इन कड़ी शर्तों के पीछे पाकिस्तान का तर्क है कि अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को जाने की इजाजत देने से आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखने में दिक्कत आएगी। समूह में जाने की खुली छूट देने से पहचान करना मुश्किल होगा कि वास्तव में सभी लोग दर्शन के लिए ही जा रहे हैं या उनमें कुछ शरारती तत्त्व भी शामिल हैं। भारत में रह रहे नागरिकों की पहचान और विशेष स्थितियों में उन पर नजर रखना आसान होगा, जबकि दूसरे देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों पर नजर रखना कई तरह की मुश्किलें पैदा करेगा। पाकिस्तान के इस तर्क में बहुत दम नजर नहीं आता।

यह ठीक है कि दोनों देश दहशतगर्दी का दंश झेल रहे हैं और तमाम कड़ाइयों के बावजूद आतंकवादी घुसपैठ पर काबू पाना चुनौती बना हुआ है, मगर करतारपुर गलियारे को खोलने से इस समस्या से पार पाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। भारत सीमा से करतारपुर का रास्ता बहुत लंबा नहीं है। इतने छोटे रास्ते से होकर गुजरने वाले श्रद्धालुओं पर नजर रखना बड़ी बात नहीं है। फिर हर श्रद्धालु का पंजीकरण होगा, तो उसकी पहचान करना और यह जानना कि कितने लोग दर्शन के लिए गए और कितने लोग वापस लौटे, कोई पेचीदा काम नहीं है। चाहे वे समूह में जाएं या अकेले। भारत में अमरनाथ गुफा और मानसरोवर यात्रा के समय भी यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर ऐसे ही इंतजाम किए जाते हैं। करतारपुर जाने वाले यात्रियों पर सुरक्षा की दृष्टि से भारत की भी नजर होगी, इसलिए पाकिस्तान को कोई मुश्किल पेश नहीं आएगी। मगर उसकी आदत है भारत के साथ संबंध बेहतर बनाने का दिखावा करने और फिर अड़ंगेबाजी करते रहने की, सो करतारपुर गलियारा मामले में भी वह वही कर रहा है।

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