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संपादकीय: आदत से लाचार

पाकिस्तान के आतंकवाद को बढ़ावा देने के पीछे कई वजहें हैं। एक तो वह इस तरह भारत से छद्म युद्ध बनाए रखना चाहता है। दूसरे, इससे वहां की कट्टरपंथी ताकतों को संतुष्ट रखने में मदद मिलती है। तीसरे, वहां की सेना और खुफिया एजेंसी को अपनी अहमियत बनाए रखने में मदद मिलती है।

Author Published on: April 8, 2020 12:13 AM
कोरोना वायरस से पूरी दुनिया जूझ रही है। इस बीच पाकिस्तानी आतंकी भारत में घुसपैठ करने की कोशिश में लगे हैं। (फाइल फोटो)

इस वक्त सारी दुनिया कोरोना विषाणु के संक्रमण से पार पाने की जद्दोजहद में लगी है। पाकिस्तान खुद इस महामारी की चपेट में है और उसे अपने लोगों को सुरक्षित रख पाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा, तब भी वहां से आतंकी घुसपैठ की गतिविधियां नहीं रुक रहीं। वहां पल रहे आतंकी संगठनों और वहां की सेना का शायद एक ही मकसद है, आतंक फैलाना। यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर उधर से आतंकवादियों ने फिर घुसपैठ की कोशिश की। पिछले हफ्ते से ही उनकी ऐसी कोशिशें देखी जा रही हैं। बीते शुक्रवार को भी कुछ आतंकवादी भारत की सीमा में घुसते देखे गए थे, जिनमें से भारतीय सेना ने चार को मार गिराया था।

ताजा घुसपैठ में भी पांच आतंकी मारे गए। इस मुठभेड़ में सेना के भी तीन जवान शहीद हो गए। छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तान की तरफ से होने वाली घुसपैठ में वहां की सेना का भरपूर सहयोग होता है। जबसे कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा है, पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ गई है। दुनिया के तमाम मंचों पर गुहार लगा-लगा कर वह थक चुका है, कहीं से भी उसे सहारा नहीं मिला। इस झुंझलाहट में भी वह अपने यहां प्रशिक्षित चरमपंथियों को भारतीय सीमा में किसी तरह प्रवेश करा कर यहां अस्थिरता पैदा करना चाहता है।

हालांकि पाकिस्तान की ऐसी कोशिशें नई नहीं है, पर एक ऐसे वक्त में जब वह खुद कोरोना विषाणु के प्रभाव से परेशान है, उसका ध्यान उससे पार पाने के बजाय भारत में आतंकवादी भेजने पर लगा हुआ है, यह उसकी कैसी मानसिकता है, समझना मुश्किल है। इस वक्त भारत में बंदी का आलम है, हर तरफ सुरक्षाबलों की चौकसी है कि लोग घरों से बाहर न निकलें। सड़कों पर वाहनों का आवागमन बंद है। इससे घुसपैठ पर नजर रखना ज्यादा आसान हो जाता है, क्योंकि सामान्य नागरिक गतिविधियां बिल्कुल रुकी हुई हैं।

इसके बावजूद वहां की सेना अगर आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर रही है, तो यह उसकी कोई पुख्ता रणनीति नहीं, बल्कि बौखलाहट ही कही जा सकती है। दरअसल, कश्मीर में धीरे-धीरे स्थिति सुधर रही है। नजरबंद नेताओं को रिहा किया जा रहा है, वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली की सूरत बन रही है। लोग सामान्य जीवन की तरफ लौटना चाहते हैं। ऐसे में पाकिस्तान को अपनी पराजय नजर आ रही है। किसी भी तरह वहां अस्थिरता पैदा कर भारत को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान के आतंकवाद को बढ़ावा देने के पीछे कई वजहें हैं। एक तो वह इस तरह भारत से छद्म युद्ध बनाए रखना चाहता है। दूसरे, इससे वहां की कट्टरपंथी ताकतों को संतुष्ट रखने में मदद मिलती है। तीसरे, वहां की सेना और खुफिया एजेंसी को अपनी अहमियत बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा पाकिस्तानी हुक्मरान को अपने देश की असल समस्याओं की तरफ से अवाम का ध्यान भटकाए रखने में सहूलियत होती है। पाकिस्तान तमाम तरह की बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है, वहां की अर्थव्यवस्था खोखली हो चुकी है, स्वास्थ्य और शिक्षा का हाल बुरा है। तिस पर वहां कोरोना महामारी बन कर टूट पड़ा है।

ऐसे में उसे ध्यान भटकाने के लिए आतंकी संगठनों की मदद लेना मुफीद जान पड़ता होगा। मगर इस तरह भारत के खिलाफ गतिविधियां चला कर वह बहुत देर तक अपने लोगों को मुगालते में नहीं रख सकता, उसे यह बात जितनी जल्दी समझ आ जाए, उतना ही अच्छा।

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