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संपादकीय: आतंक का वित्त

संयुक्त राष्ट्र ने हाफिज सईद को आतंकवादी घोषित किया हुआ है और अमेरिका ने उस पर एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा हुआ है। सवाल है कि इस तरह की सख्ती के बावजूद पाकिस्तान उसे किस वजह से घोषित-अघोषित तौर पर संरक्षण मुहैया कराता रहा है!

Author Published on: July 14, 2020 1:29 AM
Jamat-ud-dawa, Terrorist, pak terrorismहाफिज सईद दुनिया भर में घोषित आतंकी है, उस पर अमेरिका ने एक करोड़ रुपए का इनाम रखा, लेकिन पाकिस्तान में उसे संरक्षण मिला हुआ है।

भारत की ओर से जब भी पाकिस्तान पर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं कि वह आतंकवादियों और उनके संगठनों को संरक्षण दे रहा है, तो वह ऐसे आरोपों को खारिज कर देता है। लेकिन फिर कुछ ही दिनों बाद उसकी कोई न कोई ऐसी गतिविधि सामने आ जाती है, जिससे यह साफ होता है कि पाकिस्तान वहां मौजूद आतंकवादियों पर मेहरबान रहता है। हैरानी की बात यह है कि वैश्विक स्तर पर जिस व्यक्ति को एक खतरनाक आतंकवादी के रूप में चिह्नित किया गया है और उस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, उसकी मदद करने में भी पाकिस्तान को हिचक नहीं होती है।

ताजा खबर के मुताबिक उसने वहां आतंकवाद के जाने-माने चेहरे हाफिज सईद और उसके शीर्ष चार सहयोगियों के बैंक खातों पर रोक हटा कर एक बार फिर यही बताना चाहा है कि उसका असली चेहरा क्या है! जिन लोगों को यह राहत दी गई है, वे सभी पाकिस्तान स्थित पंजाब आतंकवाद निरोधी विभाग की ओर से उनके खिलाफ दायर आतंकी वित्त पोषण के मामले में अभी जेल में कैद की सजा काट रहे हैं। यानी वहां के कानूनों के मुताबिक भी महज आरोपी नहीं हैं, बल्कि सजायाफ्ता हैं। इसके बावजूद उनके प्रति नरमी दिखा कर आखिर पाकिस्तान दुनिया को क्या बताना चाहता है?

यों कहने को जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद ने संयुक्त राष्ट्र से बैंक खातों से लेनदेन पर लगी रोक को हटाने का इसलिए अनुरोध किया था कि उसे घर चलाने तक में दिक्कत हो रही है। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति ने इसकी स्वीकृति दे दी थी। लेकिन यह समझना मुश्किल नहीं है कि जो व्यक्ति और उसका संगठन परदे के पीछे से आतंक और आतंकी संगठनों का वित्त पोषण करता रहा है और उसे इन्हीं हरकतों की वजह से प्रतिबंधित किया गया, वह अब एक बार फिर मिली आर्थिक सुविधा का इस्तेमाल कैसे और किन कामों के लिए कर सकता है।

एक अहम तथ्य यह है कि संयुक्त राष्ट्र ने हाफिज सईद को आतंकवादी घोषित किया हुआ है और अमेरिका ने उस पर एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम रखा हुआ है। सवाल है कि इस तरह की सख्ती के बावजूद पाकिस्तान उसे किस वजह से घोषित-अघोषित तौर पर संरक्षण मुहैया कराता रहा है!

गौरतलब है कि हाफिज सईद को मुंबई में 2008 में हुए आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। भारत की ओर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है। लेकिन अब तक हाफिज सईद को पाकिस्तान के भीतर किसी ऐसी बड़ी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा है, जिससे उसकी गतिविधियां बंद हो जाएं। आज वह जिस जमात-उद-दावा का मुखिया है, वह दरअसल पुराने लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन है, जो अपने आतंकी वारदात के लिए कुख्यात रहा है।

इस तरह पाकिस्तान इन सबको प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संरक्षण देने की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अक्सर फजीहत झेलता रहता है। इसके बावजूद वह हर बार कार्रवाई के नाम पर इनके प्रति नरम रवैया अख्तियार करता है। जबकि सच यह है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे कई संगठनों की आतंकी गतिविधियों की वजह से न केवल भारत को नुकसान उठाना पड़ा है, बल्कि खुद पाकिस्तान के आम लोग भी इसके पीड़ित रहे हैं। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि आतंकवाद में विश्वास रखने वाले संगठन और उसके नेता अगर दूसरे देशों पर कहर बरपाते हैं तो इसका खमियाजा खुद उन्हें शह देने वाले देश को भी उठाना पड़ता है।

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