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संपादकीयः पाक का रवैया

भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय से जबर्दस्त आक्रामक रवैया अपनाया हुआ है। कश्मीर से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक में पाकिस्तान अपनी इन हरकतों की वजह से बेनकाब हो गया है।

Author October 2, 2018 2:03 AM
बाद में कहा यह गया कि इस हेलिकॉप्टर में पाक अधिकृत कश्मीर के प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के तीन मंत्री सवार थे, जो एक निजी यात्रा पर थे।

भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय से जबर्दस्त आक्रामक रवैया अपनाया हुआ है। कश्मीर से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक में पाकिस्तान अपनी इन हरकतों की वजह से बेनकाब हो गया है। सीमा पर उसकी आतंकी गतिविधियां पहले की तरह ही जारी हैं। हद तो तब हो गई जब रविवार को पाकिस्तान का एक हेलिकॉप्टर नियंत्रण रेखा को लांघते हुए भारत की हवाई सीमा में घुस आया। हालांकि भारतीय सैनिकों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई कर उसे लौटने को मजबूर कर दिया। यह घटना काफी गंभीर मामला है। भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। बाद में कहा यह गया कि इस हेलिकॉप्टर में पाक अधिकृत कश्मीर के प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के तीन मंत्री सवार थे, जो एक निजी यात्रा पर थे। लेकिन सवाल है कि इतने महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों को ले जा रहा हेलिकॉप्टर इतनी बड़ी चूक कैसे कर सकता है? इसके पीछे कहीं कोई गहरी साजिश तो नहीं थी? या फिर इस तरह अतिमहत्त्वपूर्ण लोगों की आड़ में पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी भारत के सीमाई इलाकों की जासूसी करवा रही है? हालांकि इसका खुलासा गहन जांच के बाद ही हो पाएगा। लेकिन वायु क्षेत्र के अतिक्रमण की घटना बताती है कि पाकिस्तान दरअसल भारत को खुली चुनौती दे रहा है। इसलिए भारत के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को चेता दिया है कि अब उसकी हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

यह तो स्पष्ट है कि पाकिस्तान भारत के साथ शांति नहीं चाहता। यों पिछले कई दशकों से पाकिस्तानी सेना और आएसआइ जिस तरह से भारत के खिलाफ छद्म युद्ध जारी रखे हुए हैं, वह किसी से छिपा नहीं है। इस बात के भी ठोस प्रमाण पाकिस्तान को दिए जा चुके हैं कि मुंबई हमले से लेकर भारत के सैन्य ठिकानों पर आतंकी हमलों के पीछे उसी का हाथ था। लेकिन हाल में पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद उम्मीद बनी थी कि वह रास्ते पर आएगा, आतंकवाद पर लगाम लगाएगा और रिश्ते सुधारने के बारे में सोचेगा। लेकिन नई सरकार ने अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र में हाल में उसने फिर कश्मीर राग अलापा। पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति ने भी अपने पहले संबोधन में ही कश्मीर को लेकर अपना रुख जाहिर कर दिया था। लेकिन जब कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सेना ने एक भारतीय जवान को मारने के बाद उसके शव को क्षत-विक्षत कर डाला तो इस घटना के बाद भारत को संयुक्त राष्ट्र की बैठक से इतर होने वाली भारत-पाक विदेश मंत्रियों की बैठक रद्द करने जैसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस भारत की यात्रा पर हैं और उन्होंने जम्मू-कश्मीर के हालात पर चिंता जताई है। गुतारेस ने कश्मीर मुद्दा शांति से सुलझाने को कहा है। लेकिन लगता है पाकिस्तान इस बात को समझते हुए भी न केवल इस वैश्विक निकाय की अनदेखी कर रहा है, बल्कि उसने इसे भारत के खिलाफ जहर उलगने का स्थायी मंच बना लिया है। हाल में उसने भारत पर फिर से यह आरोप जड़ दिया कि 2014 में पेशावर के एक स्कूल में हुए कत्लेआम में भारत का हाथ था, जिसमें डेढ़ सौ बच्चे मारे गए थे। जबकि यह साबित हो चुका है कि पाकिस्तान में मौजूद और अपनी सरकार से खफा आतंकी संगठनों ने इसे अंजाम दिया था। पाकिस्तान अगर समस्याओं को सुलझाने और सकारात्मक रुख अपनाने के बजाय वैश्विक मंचों से भारत को इसी तरह बदनाम करता रहा तो इससे दोनों देशों के बीच रिश्ते और बिगड़ेंगे ही। पाकिस्तान का सबसे बड़ा मददगार अमेरिका खुद उसे सबसे बड़ा आतंकवादी कहता आया है। ऐसे में यह वक्त पाकिस्तान को सबक लेने का है।

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