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संपादकीय: साजिश की सुरंग

सीमापार से होने वाली घुसपैठ को रोकना भारतीय सुरक्षा बलों के लिए चुनौती रही है। इसकी वजह यह है कि भारत-पाकिस्तान सीमा कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात तक फैली है। कई स्थानों पर जटिल भौगोलिक बनावट, पहाड़ियों, नालों और घने जंगलों के कारण वहां अनवरत पहरा दे पाना संभव नहीं है और आतंकी इसी का फायदा उठा कर घुस आते हैं। पाकिस्तान हर साल कश्मीर में बर्फबारी से पहले बड़ी संख्या में आतंकियों को घुसाने का अभियान चला रहा है।

Deployभारत-पाक सीमा पर तैनात सुरक्षा कर्मी। फाइल फोटो।

जम्मू संभाग के सांबा जिले में रिगाल गांव के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरंग का मिलना बता रहा है कि भारतीय क्षेत्र में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तान कैसे-कैसे हथकंडे अपना रहा है। पिछले एक साल में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत ने जिस तरह से चौकसी कड़ी की है और चप्पे-चप्पे पर सीमा सुरक्षा बल और सेना के जवान पहरा दे रहे हैं, उससे आतंकियों की घुसपैठ पर काफी हद तक लगाम लगी है।

ऐसे में पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नित नए तरीके निकाल रहा है। हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब सुरंग के रास्ते आतंकियों को घुसाया जा रहा है। पहले भी कई बार ऐसी सुरंगों का पता लगा है और भारत ने साजिश को नाकाम किया है। अगर पांच दिन पहले नगरोटा में बन टोल प्लाजा पर जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकी नहीं मारे जाते तो इस सुरंग का पता शायद ही चल पाता और आतंकी भारत में बेधड़क घुसते रहते। इन आतंकियों के मारे जाने के बाद इनके पास से मिले कई सैटेलाइट फोन की जांच से पता लगा कि ये कहां-कहां से गुजरे थे। इसी को आधार बना कर इलाके की छानबीन की गई और सुरंग का पता चला। इस सुरंग के जरिए अब तक कितने आतंकी भारत में घुस चुके होंगे, कहा नहीं जा सकता।

सीमापार से होने वाली घुसपैठ को रोकना भारतीय सुरक्षा बलों के लिए चुनौती रही है। इसकी वजह यह है कि भारत-पाकिस्तान सीमा कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात तक फैली है। कई स्थानों पर जटिल भौगोलिक बनावट, पहाड़ियों, नालों और घने जंगलों के कारण वहां अनवरत पहरा दे पाना संभव नहीं है और आतंकी इसी का फायदा उठा कर घुस आते हैं। पाकिस्तान हर साल कश्मीर में बर्फबारी से पहले बड़ी संख्या में आतंकियों को घुसाने का अभियान चला रहा है।

लेकिन अब जब आतंकियों को भेज पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है तो उसने सुरंग जैसे रास्ते निकाल लिए। इसे को लेकर जो जानकारियां सामने आई हैं, उनसे साफ है कि घुसपैठ जैसा काम बिना सेना की मदद के संभव नहीं है। यह कोई छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ही आतंकी संगठनों को खड़ा करते हैं, उन्हें हथियार और धन मुहैया कराते हैं, नौजवानों को बम बनाने से लेकर तमाम आतंकी गतिविधियों का प्रशिक्षण देते हैं और फिर इन्हें अपने मिशन पर भेजते हैं। जिस तरह से इस सुरंग को तैयार किया गया, वह प्रशिक्षित इंजीनियरों की टीम ही कर सकती है, अकेले आतंकियों के बस की बात नहीं है। इन कामों के लिए जिस बड़े पैमाने पर संसाधनों की जरूरत होती है, वे सेना और सरकारी तंत्र की मदद के बिना संभव कैसे हो सकते हैं!

सीमा पर बढ़ती आतंकी गतिविधियों को लेकर कई तरह की सूचनाएं हैं। मसलन, पठानकोट हमले के आरोपी और जैश के कमांडर कासिम को भारतीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आतंकी घुसपैठ कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह सीमा क्षेत्रों में दूसरे आतंकी संगठन भी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं। सवाल है कि क्या पाकिस्तान सरकार इन सब गतिविधियों से अनजान है? नगरोटा की घटना के बाद भारत ने नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी को बुला कर चेताया भी है। एक तरफ तो पाकिस्तान अपने यहां मौजूद आतंकी संगठनों पर कार्रवाई का भरोसा दे रहा है और दूसरी ओर भारत से लगती सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ करवा रहा है। उसकी यह दोहरी नीति ही उसके असल चेहरे को उजागर कर रही है।

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