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संपादकीय: आतंक का रास्ता

विडंबना तो यह है कि इस वक्त पाकिस्तान खुद कोरोना महामारी से जूझ रहा है, लेकिन फिर भी वह भारत के खिलाफ अभियान चलाने से बाज नहीं आ रहा। जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमितों की घुसपैठ कराने की उसकी साजिश बता रही है कि उसके या दुनिया के समक्ष कितने ही बड़े संकट क्यों न हों, लेकिन वह भारत के खिलाफ अपना अभियान बंद नहीं करने वाला।

पाकिस्तानी घुसपैठिए और आतंकी (फाइल फोटो)।

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में बीते शनिवार को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए दोनों आतंकियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि से साफ हो गया है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान घाटी में कोरोना संक्रमितों की घुसपैठ करवा रहा है। वह आतंकवादियों के जरिए हमले तो करा ही रहा है, साथ ही घाटी में अब ‘कोरोना बम’ का विस्फोट करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

पिछले कुछ समय में कश्मीर घाटी में आतंकी हमलों में आई तेजी से साफ है कि बड़ी संख्या में आंतकी सरहद पार से घुस आए हैं और खासतौर से ग्रामीण इलाकों को निशाना बना रहे हैं। हालांकि कोरोना संक्रमितों की घुसपैठ कराने को लेकर खुफिया सूचनाएं अप्रैल के शुरू में ही आने लगी थीं और इसीलिए भारतीय सेना और सुरक्षाबलों सतत निगरानी कर रहे हैं। लेकिन फिर भी कुछ रास्तों के जरिए आतंकी घाटी में घुसने में कामयाब हो गए। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत और पाकिस्तान की लंबी सीमा पर ज्यादातर सीमाई हिस्सा घने जंगलों और पहाड़ों वाला है। ऐसे में हर एक आंतकी की घुसपैठ पर निगाह रख पाना आसान नहीं है। आंतकी इसी का फायदा उठा कर घुस जाते हैं।

विडंबना तो यह है कि इस वक्त पाकिस्तान खुद कोरोना महामारी से जूझ रहा है, लेकिन फिर भी वह भारत के खिलाफ अभियान चलाने से बाज नहीं आ रहा। जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमितों की घुसपैठ कराने की उसकी साजिश बता रही है कि उसके या दुनिया के समक्ष कितने ही बड़े संकट क्यों न हों, लेकिन वह भारत के खिलाफ अपना अभियान बंद नहीं करने वाला। पड़ोसी मुल्क की ओर से इस तरह की गतिविधियों का जारी रहना चिंता का विषय तो है ही।

यों हर साल अप्रैल-मई के महीने में जब बर्फ पिघलनी शुरू होती है, पाकिस्तान सेना बड़े पैमाने पर आतंकियों को घुसाने में जुट जाती है। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमितों की घुसपैठ से यह खतरा ज्यादा गंभीर रूप धारण कर चुका है। यह कोई छिपी बात नहीं है कि भारत में अशांति और अस्थिरता पैदा करने के लिए पाकिस्तान की सेना और आइएसआइ का एक बड़ा तंत्र काम करता है।

आइएसआइ भारत में आतंक फैलाने के लिए योजना और रणनीति बनाती है और आतंकियों के जरिए सेना इस काम को करने में मदद करती है। बड़ी संख्या में हिज्बुल मुजाहिद्दीन और लश्कर ए तैयबा के आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसाने के लिए पाकिस्तानी सेना और आइएसआइ ने नियंत्रण रेखा के पास सोलह ठिकाने तैयार किए हैं। इनमें से कुछ ठिकाने नौशेरा और छंब की दुर्गम पहाड़ियों में भी हैं, जहां आतंकी जमा हैं और इसी रास्ते आतंकवादी गुलमर्ग में प्रवेश करते हैं।

भारतीय सुरक्षा बलों को इस वक्त दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक तो सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ रोकनी है और दूसरा राज्य में घुस चुके आतंकियों का पता लगा कर उनका सफाया करना है। आंतकी गांवों को अपना ठिकाना बना कर जबरन ग्रामीणों के घरों में जाकर रुक रहे हैं और इनके साथ खाना खा रहे हैं। ऐसे में गांवों में कोरोना संक्रमण फैल गया तो रोक पाना मुश्किल होगा। इसलिए सेना आतंकियों को खोज कर जल्द से जल्द मार गिराने की रणनीति पर काम कर रही है। वैसे तो पाकिस्तान भारत से अच्छे रिश्तों और शांति की उम्मीदें करता है, लेकिन दूसरी ओर जिस तरह से कोरोना संक्रमितों की घुसपैठ करवा रहा है, उससे उसका चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है।

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