ताज़ा खबर
 

संपादकीय: पाक की बौखलाहट

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्बी ने अधिसूचना पर दस्तखत कर गिलगित में चुनाव कराने का रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन साथ ही यह कदम एक विवाद को और हवा देने वाला है। पाकिस्तान की यह हरकत भारत को उकसाने वाली है।

Author Updated: September 26, 2020 12:54 AM
भारत के लगातार प्रयासों के बावजूद पाकिस्तान नापाक हरकतों को करने से बाज नहीं आ रहा है। गिलगिट से निकलते मालवाहक वाहन।

पिछले कुछ समय से पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्तिस्तान को लेकर जिस तरह की गतिविधियां छेड़ रखी हैं, वे पड़ोसी देश की बौखलाहट को बताने के लिए काफी हैं। यह जानते-बूझते भी कि गिलगित-बाल्तिस्तान भारत का क्षेत्र है जिसे उसे एक न एक दिन तो खाली करना ही पड़ेगा, पाकिस्तान वहां चुनाव जैसी राजनीतिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। पाकिस्तान सरकार की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार गिलगित-बाल्तिस्तान में अब पंद्रह नवंबर को विधानसभा के चुनाव होंगे।

हालांकि चुनाव की कवायद काफी पहले ही शुरू हो गई थी। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिलने के बाद राष्ट्रपति ने भी सहमति जता दी थी। पहले ये चुनाव अठारह अगस्त को होने थे, लेकिन भारत के कड़े प्रतिरोध और दबाव को देखते हुए पाकिस्तान ने कोरोना महामारी की आड़ लेते हुए इससे कदम खींच लिए थे। लेकिन अब फिर से वह सक्रिय हो गया है।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्बी ने अधिसूचना पर दस्तखत कर गिलगित में चुनाव कराने का रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन साथ ही यह कदम एक विवाद को और हवा देने वाला है। पाकिस्तान की यह हरकत भारत को उकसाने वाली है। लेकिन गिलगित-बाल्तिस्तान के मसले पर भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि यह क्षेत्र लद्दाख में पड़ने में हिस्से में शामिल है और भारत का अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान इस इलाके में भले कब्जा जमाए बैठा रहे, लेकिन असलियत को तो बदल नहीं सकता।

पाकिस्तान लंबे समय से इस कोशिश में लगा है कि गिलगित-बाल्तिस्तान को देश का पांचवां प्रांत घोषित कर दिया जाए। लेकिन सवाल इस बात का है कि क्या पाकिस्तान को इस क्षेत्र की वैधानिक स्थिति मालूम नहीं है, जो वह इस तरह के विवादित कदम उठा रहा है। जब यह इलाका पाकिस्तान का प्रांत ही नहीं है तो वहां चुनाव जैसी गतिविधियों को अंजाम देना क्षेत्र में अशांति के नए मोर्चे खोलना ही है।

कुछ महीनों पहले पाकिस्तान ने इस इलाके में लद्दाख से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर करीब बीस हजार जवानों की तैनाती की थी और इसके पीछे मंशा यह थी कि अगर चीन के साथ भारत का तनाव बढ़ता है तो पाकिस्तान भी भारत के खिलाफ यहां से जंग छेड़ सकता है। यह कोई छिपी बात नहीं है कि चीन गिलगित में पाकिस्तान की मौजूदगी बनाए रखने के लिए उसे किस तरह से मदद दे रहा है। गिलगित क्षेत्र में चीन की मदद से बांध बनाने की परियोजना चल रही है।

पिछले साल जब भारत ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था, तभी से पाकिस्तान की नींद उड़ी हुई है। उसने इस मसले को अंतरराष्ट्रीय मंचों से उठाया, लेकिन हर जगह मुंह की खाई। इसलिए अब गिलगित-बाल्तिस्तान को भारत के खिलाफ हथियार बना लिया है। पाकिस्तान को यह भय है कि जिस तरह भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर कठोर फैसला करते हुए कदम बढ़ाए हैं, उसी तरह पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित क्षेत्र को भी भारत कभी भी ले सकता है।

क्षेत्रों को लेकर विवाद पाकिस्तान की पुरानी नीति रही है। ऐसा नहीं है कि विवाद सिर्फ कश्मीर को लेकर ही है। गुजरात में कच्छ क्षेत्र में जल सीमा के नजदीक सरक्रीक और गिलगित भी ऐसे ही इलाके हैं। हालांकि ये कोई ऐसे विवाद नहीं है जिन्हें लेकर युद्ध और आतंकवाद का रास्ता अपनाया जाए, जैसा कि वह हमेशा से करता आया है। इन विवादों को हल करने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से तर्कसंगत बातचीत और हकीकत को स्वीकारने की जरूरत है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 संपादकीयः मुनाफे का भंडारण
2 संपादकीयः संयुक्त राष्ट्र में सुधार
3 संपादकीय: मोर्चे पर महिलाएं
IPL 2020
X