ताज़ा खबर
 

संपादकीयः नई पटरी

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक अहम फैसला किया, यह कि अब रेल बजट अलग से नहीं आएगा, वह आम बजट में निहित रहेगा जैसा कि अन्य मंत्रालयों की बाबत होता है।
Author September 23, 2016 03:04 am

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक अहम फैसला किया, यह कि अब रेल बजट अलग से नहीं आएगा, वह आम बजट में निहित रहेगा जैसा कि अन्य मंत्रालयों की बाबत होता है। पहला रेल बजट 1924 में आया था। इस तरह मोदी सरकार ने बानबे साल पुरानी परिपाटी समाप्त कर दी है। दरअसल, इसे जारी रखने का बहुत औचित्य नहीं रह गया था। जब रक्षा समेत कई मंत्रालयों का बजट रेलवे के मुकाबले अधिक होते हुए भी आम बजट में समाहित रहता हो, तब अलग से रेल बजट क्यों? इसलिए रेल सुधार के उपाय सुझाने के लिए नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता में बनी समिति ने भी सिफारिश की थी कि रेल बजट का समावेश आम बजट में कर दिया जाए। पर इसके पीछे समिति के कुछ और भी तर्क थे।

मसलन, अलग से रेल बजट की रिवायत होने से रेलमंत्री को अतिरिक्त महत्त्व मिला रहता है और रेलवे के बहुत-से अहम फैसले राजनीतिक समीकरण को ध्यान में रख कर होते हैं। खासकर गठबंधन सरकारों के दौर में रेलमंत्री किसी क्षेत्रीय दल के क्षत्रप होते रहे और रेलवे की परियोजनाएं ज्यादा से ज्यादा अपने गृहराज्य और अपने निर्वाचन क्षेत्र में लगाने की उनकी दिलचस्पी किसी से छिपी नहीं रही। रेल बजट में की जाने वाली घोषणाओं से अपनी छवि चमकाने का इरादा भी साफ जाहिर होता रहा। मंत्रिमंडल के ताजा फैसले ने रेलवे के इस तरह के सियासी इस्तेमाल की गुंजाइश खत्म कर दी है। यह भी माना जा रहा है कि रेलवे अब आय-व्यय की चिंता से मुक्त होकर ढांचागत सुधार तथा लंबित परियोजनाओं को पूरा करने पर ज्यादा ध्यान दे सकेगा और अपनी पेशेवर क्षमता बढ़ा सकेगा। इसलिए उद्योग जगत ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। पर आलोचना के स्वर भी उठे हैं। मसलन, पूर्व रेलमंत्री नीतीश कुमार ने रेलवे की लंबे समय से चली आ रही स्वायत्तता नष्ट हो जाने का अंदेशा जताया है।

सरकार के फैसले को परिवहन के लिए एक ही मंत्रालय बनाए जाने की संभावना के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है; हो सकता है रेल बजट को समाप्त करना उसका प्रस्थान-बिंदु हो। जैसा कि ऊर्जा के मामले में हुआ कि सरकार ने बिजली, कोयला और गैर-पारंपरिक ऊर्जा मंत्रालयों की जिम्मेदारी एक ही मंत्री को सौंप दी, वैसा ही परिवहन के मामले में भी संभावित है, यानी हो सकता है रेलवे, भूतल परिवहन, राजमार्ग, नागर विमानन, जहाजरानी, सबको मिला कर एक कर दिया जाए। ऐसा हुआ तो यह सरकार का आकार घटाने के प्रधानमंत्री के वादे के अनुरूप ही होगा। यही नहीं, इससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी। रेल बजट पर विराम लगाने के साथ ही सरकार ने एक और फैसला किया है, आम बजट अब फरवरी के आखीर में पेश न होकर संभवत: उसी महीने की पहली तारीख को पेश किया जाएगा। बजट की तारीख एक महीना पहले करने से लाभ यह होगा कि सरकार बजट प्रस्तावों पर संसद की रजामंदी और पहले ले सकेगी ताकि बजट की सारी कवायद मार्च के अंत तक पूरी हो जाए और बजट प्रस्ताव वास्तव में एक अप्रैल से यानी नए वित्तवर्ष के पहले दिन से ही लागू किए जा सकें। बजटीय प्रावधान समय से लागू हों, इसका उपाय करना जरूरी था, मगर योजनागत व गैर-योजनागत खर्चों का भेद मिटाने के सरकार के फैसले पर विवाद उठ सकता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.