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संपादकीयः म्यूनिख के आंसू

जर्मनी के तीसरे सबसे बड़े शहर म्यूनिख में एक किशोर की अंधाधुंध फायरिंग ने जर्मनी ही नहीं, सारे यूरोप को दहला दिया है।
Author July 25, 2016 03:03 am
(Photo-Agency)

जर्मनी के तीसरे सबसे बड़े शहर म्यूनिख में एक किशोर की अंधाधुंध फायरिंग ने जर्मनी ही नहीं, सारे यूरोप को दहला दिया है। बाकी दुनिया भी हिंसा के इस भयावह सिलसिले से हैरान और गमगीन है। म्यूनिख में बीते शुक्रवार को अठारह साल के एक लड़के की बेलगाम फायरिंग ने नौ लोगों की जान ले ली। करीब तीस लोग घायल हैं जिनमें से कइयों की हालत गंभीर है। आठ दिनों में नागरिकों पर हमले की यूरोप में यह तीसरी घटना है और दक्षिण जर्मनी में दूसरी। म्यूनिख में गोलीबारी की खबर आते ही इसे पिछले दिनों नीस में ट्रक से कुचल कर चौरासी लोगों को मार डालने और वर्जबर्ग में हुए हमले से जोड़ कर देखा जाने लगा। आइएस ने म्यूनिख कांड पर सोशल मीडिया में जश्न मनाया। इसलिए भी शुरू में लग रहा था कि हो सकता है इसके पीछे आइएस का ही हाथ हो।

पर म्यूनिख पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक हमलावर के आइएस से संबंधित या प्रभावित होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस की जांच से फिलहाल जो तथ्य सामने आए हैं उनके मुताबिक हमलावर किशोर अवसादग्रस्त या मानसिक रूप से असंतुुलित था, और उसकी मानसिक बीमारी का कुछ इलाज भी चला था। तो क्या किसी कट््टर मिशन के नाम पर पनपे आतंकवाद के अलावा दुनिया में एक और तरह की हिंसा का खतरा दिनोंदिन बढ़ रहा है, जिसमें कोई सिरफिरा या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति अचानक खूनखराबे के लिए उतारू हो जाए? कई बार दोनों तरह के आतंक का मेल भी हो सकता है, जैसे कि ओरलैंडो में। पिछले महीने अमेरिका के ओरलैंडो के पल्स नाइट क्लब में रात दो बजे के करीब एक बंदूकधारी हमलावर घुस आया और उसने वहां मौजूद लोगों को बंधक बना लिया। कुछ घंटों बाद वह पुलिस की कार्रवाई में मारा गया, पर इसके पहले उसने अंधाधुंध गोलियां चला कर पचास लोगों की जान ले ली।

ओरलैंडो के हमलावर के बारे में भी यह जानकारी सामने आई कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था। अलबत्ता उसके आइएस के प्रभाव में आने के भी संकेत मिले थे। म्यूनिख के हमलावर के किसी संगठन से प्रभावित होने के संकेत नहीं मिले हैं, पर उसके सामान की जांच-पड़ताल से पता चला कि किशोरों के अंधाधुंध गोलीबारी करने की घटनाओं पर उसने काफी पढ़ रखा था। इस तरह म्यूनिख की घटना बच्चों के लालन-पालन, उनके मानसिक विकास, उन्हें पढ़ने और मनोरंजन के तौर पर मिलने वाली सामग्री से लेकर बंदूकों की आसान उपलब्धता तक अनेक सवाल खड़े करती है।

जो आइएस जैसे बेहद क्रूर संगठन से प्रभावित हैं उन्हें भी मानसिक रूप से विकृत ही कहा जाएगा, पर म्यूनिख की घटना इस मायने में अलग है कि कोई बड़ी योजना या साजिश न होते हुए भी, कोई मानसिक रूप से विकृत व्यक्ति एक क्षणिक उन्माद में कहर बरपा देता है। इस तरह का दिल दहला देने वाला एक कांड पांच साल पहले नार्वे में हुआ था, जब ऐंडर्स बेहरिंग ब्रीविक ने युवाओं के एक शिविर पर हमला कर सतहत्तर लोगों को मार डाला था। म्यूनिख के हमलावर की अंधाधुंध फायरिंग में मारे गए लोगों में भी ज्यादातर युवा ही थे। क्या उसने नार्वे कांड की नकल की? जो हो, यह जांच का विषय है। पर म्यूनिख की घटना ने दुनिया को एक साथ कई चीजों पर सोचने को विवश किया है।

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