ताज़ा खबर
 

संपादकीयः भ्रष्टाचार के खिलाफ

आयकर विभाग ने फिलहाल जो बड़ी कार्रवाई की है उसमें नोएडा में चार सौ करोड़ रुपए की कीमत वाली जमीन को जब्त कर लिया है। इस जमीन पर मालिकाना हक आनंद कुमार और उनकी पत्नी का बताया गया है।

Author July 20, 2019 1:59 AM
मायावती के भाई आनंद कुमार के खिलाफ यही कार्रवाई सालों पहले भी की जा सकती थी, लेकिन क्यों नहीं हुई, यह गंभीर सवाल है। बसपा हमेशा से गरीबों और दलितों की आवाज उठाने का दावा करती रही है।

बहुजन समाज पार्टी के उपाध्यक्ष आनंद कुमार के पास गैरकानूनी तरीके से बनाई गई अकूत संपत्ति का जो खुलासा हो रहा है, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सत्ता की मदद से कैसे कोई व्यक्ति धनकुबेर बन सकता है। यह भारत के भ्रष्ट तंत्र की जीती-जागती मिसाल है। आनंद कुमार बसपा प्रमुख मायावती के भाई और पार्टी में दूसरे नंबर की हैसियत वाले नेता हैं। जाहिर है, उन्होंने मायावती के मुख्यमंत्री रहते हुए जम कर भ्रष्टाचार किया और खुद को सारे नियम-कायदों से ऊपर रखते हुए बेनामी संपत्ति का पहाड़ खड़ा कर डाला। आयकर विभाग ने फिलहाल जो बड़ी कार्रवाई की है उसमें नोएडा में चार सौ करोड़ रुपए की कीमत वाली जमीन को जब्त कर लिया है। इस जमीन पर मालिकाना हक आनंद कुमार और उनकी पत्नी का बताया गया है। यहां एक पांच सितारा होटल और आलीशान इमारतें बनाने की योजना थी। बसपा प्रमुख और उनका परिवार लंबे समय से आयकर विभाग के निशाने पर है। आयकर विभाग ने कुछ समय पहले ही आनंद कुमार के ठिकानों पर छापे मारे थे और साढ़े तेरह अरब रुपए से ज्यादा की संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए थे। इन संपत्तियों की जांच अभी चल रही है।

आनंद कुमार ने 1994 में नोएडा विकास प्राधिकरण में जूनियर असिस्टेंट पद पर नौकरी शुरू की थी और तब उन्हें सात सौ रुपए तनख्वाह मिलती थी। सन 2000 में नौकरी छोड़ कर वे कारोबार करने लगे और तभी से अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए संपत्ति बनाने का खेल शुरू कर दिया था। यह काम कोई ऐसा नहीं था जिसे वे अकेले कर जाते। जाहिर है, बिना अफसरों के सहयोग के यह संभव नहीं होता। अफसर किसके इशारे पर काम करते रहे, यह भी किसी से छिपा नहीं है। आयकर विभाग की जांच में पता चला है कि आनंद कुमार की एक दर्जन कंपनियां हैं जिनमें छह कंपनियां तो सिर्फ कागजों में हैं। इन कंपनियों के जरिए ही पैसे का खेल चलता रहा। मामला सिर्फ आनंद कुमार का नहीं है, उन जैसे सैकड़ों लोग होंगे जिन्होंने भ्रष्टाचार से अरबों-खरबों की बेनामी संपत्ति जमा की है, लेकिन कानून की पहुंच से बाहर हैं। कभी यह सुनने में नहीं आता कि किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई हो। आयकर विभाग और दूसरी जांच एजेंसियां भी जिस तरह से काम करती हैं, जांच के नाम पर मामले को लटकाए रखती हैं और फिर उपयुक्त समय देख कर कदम उठाती हैं, वह कम हैरान करने वाली बात नहीं है।

आनंद कुमार के खिलाफ यही कार्रवाई सालों पहले भी की जा सकती थी, लेकिन क्यों नहीं हुई, यह गंभीर सवाल है। बसपा हमेशा से गरीबों और दलितों की आवाज उठाने का दावा करती रही है। लेकिन जिस तरह गरीबों और दलितों के नाम पर पार्टी के चंद नेता करोड़ों-अरबों कमा रहे हों तो यह हैरान करने वाली बात है! इन नेताओं ने जिस तरह बेहिसाब दौलत बनाई है, वह दलित, गरीब और वंचित तबके के प्रति उनकी और पार्टी की प्रतिबद्धता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। हकीकत तो यह है कि बसपा ही नहीं, तमाम छोटे-बड़े राजनीतिक दल भ्रष्टाचार की इस संस्कृति में रंगे हुए हैं, भले भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के कितने ही वादे और दावे क्यों न करें! बस कोई पकड़ में आ रहा है और कोई बच जा रहा है या बचा लिया जा रहा है। बेनामी संपत्ति बनाने वालों के खिलाफ, चाहे वे राजनीतिक दलों के नेता हों या सरकार में काम करने वाले अफसर-कर्मचारी, अगर ईमानदारी से अभियान चलाया जाए तो निश्चित ही भ्रष्ट नेताओं-अफसरों की जमात से देश की जनता को मुक्ति मिल सकती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 संपादकीयः अराजकता की हिंसा
2 संपादकीयः सच का साथ
3 संपादकीयः प्रधानमंत्री की नसीहत