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संपादकीयः विवाद की जमीन

हरियाणा के गुरुग्राम में ग्वाल पहाड़ी से जुड़ा विवाद इसका एक उदाहरण है कि जमीन की खरीद-बिक्री के नियमन को लेकर सरकारी लापरवाही से कैसी जटिल स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
Author March 11, 2017 03:53 am
हरियाणा के गुरुग्राम में ग्वाल पहाड़ी से जुड़ा विवाद इसका एक उदाहरण है कि जमीन की खरीद-बिक्री के नियमन को लेकर सरकारी लापरवाही से कैसी जटिल स्थितियां पैदा हो सकती हैं। संसद में विवाद में बातचीत करते सीएम मनोहर लाल खट्टर (फाइल फोटो)

हरियाणा के गुरुग्राम में ग्वाल पहाड़ी से जुड़ा विवाद इसका एक उदाहरण है कि जमीन की खरीद-बिक्री के नियमन को लेकर सरकारी लापरवाही से कैसी जटिल स्थितियां पैदा हो सकती हैं। फिलहाल ग्वाल पहाड़ी गांव में भूमि पर मालिकाना हक संबंधी अदालत में दायर मुकदमे के बीच नगर निगम सरकारी आदेश के बाद जमीन पर कब्जा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने वाली है, लेकिन इससे जुड़ा विवाद थमता नहीं नजर आता। हालांकि यह मामला नया नहीं है। मगर इस मसले की लंबे समय से की जा रही अनदेखी का ही नतीजा है कि आज हरियाणा सरकार को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है। गौरतलब है कि गुरुग्राम के ग्वाल पहाड़ी गांव में चार सौ चौंसठ एकड़ जमीन पर एक सौ अस्सी लोगों का कब्जा है। यह पूरा भूखंड मुख्य सड़क पर है और इस पर जिन लोगों के फार्म हाउस और भवन बने हुए हैं, उनमें कई सरकारी अधिकारी भी हैं। एक अनुमान के मुताबिक ग्वाल पहाड़ी में करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपए की जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा है। इसी में से गुरुग्राम नगर निगम ने अड़सठ लोगों को नोटिस जारी करके जमीन खाली करने का आदेश दिया है।
इस मामले में ज्यादातर लोगों ने अलग-अलग अदालतों में अपने मालिकाना हक से संबंधित मुकदमे दायर कर रखे हैं और उनमें से कई को स्थगनादेश भी मिला हुआ है।

यानी जब तक अदालत का कोई नया आदेश नहीं आता है, तब तक जमीन पर से संबंधित लोगों का कब्जा नहीं हटाया जा सकता। शायद इसी के मद्देनजर नगर निगम फिलहाल उस जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश में है, जिसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है। इस पहल के मुताबिक अभी पहले चरण में ऐसी लगभग अस्सी एकड़ जमीन पर कब्जा लिया जाएगा। मगर इस बीच हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से स्थिति साफ करने की मांग को लेकर सरकार बचाव की स्थिति में है। विपक्ष के नेता अभय चौटाला ने इसे बड़ा घोटाला करार देते हुए सीबीआइ जांच की मांग की और कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री पर अंगुली उठ रही है। भाजपा के मौजूदा शासनकाल में गुरुग्राम में भूमि से संबंधित कई विवाद और घोटाले सामने आए हैं, जिनमें सरकार और भूमाफिया के बीच सांठगांठ के आरोप हैं।

दरअसल, इस जमीन से संबंधित विवाद काफी पुराना है। लेकिन 2008 के आसपास ग्वाल पहाड़ी में जम कर जमीन की खरीद-फरोख्त हुई, जिसमें कई बड़े भूमाफिया और नामी कंपनियों ने सैकड़ों एकड़ जमीन पंचायतों से खरीद ली थी। इसके अलावा, कई लोगों ने अपने फार्म हाउस और विला बनाने के लिए भी जमीन खरीदी थी। सबसे ज्यादा कब्जा पच्चीस बड़ी कंपनियों का है। जबकि ग्वाल पहाड़ी गांव की जमीन बहुत पहले से मूल रूप से ग्राम पंचायत की शामलात थी और नियमों के मुताबिक ऐसी जमीन को किसी व्यक्ति या प्राइवेट बिल्डर को नहीं बेचा जा सकता है। लेकिन जब नगर निगम बना तो ग्राम पंचायत की यह जमीन निगम में ही स्थानांतरित हो गई थी। इसी के बाद निगम ने पंचायतों को जमीन बेचने के अधिकार पर सवाल उठाया और इसके साथ ही विवाद की भी शुरुआत हो गई थी। हालांकि अदालतों से फैसला कई बार नगर निगम के पक्ष में आ चुका है, मगर सरकार की भूमिका पर जिस तरह अंगुलियां उठ रही हैं, उसमें इस जमीन की बंदोबस्ती और भूमाफिया के कब्जे से छुड़ाना शायद आसान नहीं है।

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