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संपादकीयः पाक को सबक

पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद की फैक्टरी के रूप में कुख्यात है। उसका सबसे बड़ा मददगार और हमदर्द अमेरिका तक कह चुका है कि वह धरती पर आतंकवाद फैलाने वाला सबसे बड़ा देश है। अमेरिका को दहला देने वाला अलकायदा सरगना उसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सुरक्षा में रह रहा था।

Author Published on: August 24, 2019 3:15 AM
पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद की फैक्टरी के रूप में कुख्यात है। उसका सबसे बड़ा मददगार और हमदर्द अमेरिका तक कह चुका है कि वह धरती पर आतंकवाद फैलाने वाला सबसे बड़ा देश है। लेकिन फिर भी पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने सबक नहीं लिया।

इस बात में अब कोई संदेह नहीं रह गया है कि पाकिस्तान अभी भी आतंकी संगठनों को पाल रहा है और उन्हें भरपूर मदद दे रहा है। आतंक फैलाने वाले देशों पर निगरानी रखने वाली वैश्विक संस्था- फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के एशिया प्रशांत समूह ने पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कदम उठाते हुए उसे ‘काली सूची’ में डाल दिया है। यह कड़ी कार्रवाई पाकिस्तान के लिए इस बात का सख्त संदेश है कि अगर उसने अभी भी आतंकवाद का कारोबार नहीं छोड़ा तो जल्द ही वह और मुश्किल में पड़ जाएगा। हालांकि कुछ ही महीने पहले जैश ए मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान ने कुछ आतंकी संगठनों पर कार्रवाई का अभियान तो चलाया था, लेकिन वह दुनिया की आंखों में धूल झोंकने से ज्यादा कुछ नहीं था। एफएटीएफ के एशिया-प्रशांत समूह की ऑस्ट्रेलिया में हुई लंबी बैठक के बाद पाकिस्तान के खिलाफ यह कदम उठाया गया है। एफएटीएफ ने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जो चालीस पैमाने बनाए थे उनमें से बत्तीस पर पाकिस्तान जरा भी खरा नहीं उतरा। जाहिर है, उसने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जैसा कुछ किया ही नहीं।

पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद की फैक्टरी के रूप में कुख्यात है। उसका सबसे बड़ा मददगार और हमदर्द अमेरिका तक कह चुका है कि वह धरती पर आतंकवाद फैलाने वाला सबसे बड़ा देश है। अमेरिका को दहला देने वाला अलकायदा सरगना उसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सुरक्षा में रह रहा था। आतंकी संगठनों को पनाह देने, उन्हें पालने का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है! चाहे अफगानिस्तान हो या भारत, सब जगह उसने एक तरह से छाया युद्ध चला रखा है। भारत तो तीन दशक से सीमापार आतंकवाद झेल ही रहा है। संसद पर हमला, मुंबई हमला, पठानकोट और उड़ी हमले के तो भारत ने पुख्ता सबूत तक दिए हैं। लेकिन पाकिस्तान ने कभी इन सबूतों को नहीं माना।

हैरानी की बात तो यह है कि इन हमलों की जिम्मेदारी उसके यहां बैठे आतंकी संगठन लेते रहे हैं लेकिन पाकिस्तान सरकार इससे इनकार करती रही है। एफएटीएफ पिछले डेढ़ साल से पाकिस्तान को चेता रहा है लेकिन उसकी सारी कवायद बेअसर ही साबित हो रही है। इससे एक बात तो साफ है कि पाकिस्तान को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसे निगरानी सूची में डाला जाता है या काली सूची में। वह आज भी भारत के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए है। पुलवामा का हमला तो ताजा मिसाल है। हाल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खुद कह चुके हैं कि पुलवामा जैसे हमले और हो सकते हैं। यह कौन नहीं जानता-समझता कि भारत में ऐसे आतंकी हमले कौन करवा रहा है!

एफएटीएफ का एशिया प्रशांत समूह आतंकी संगठनों को पैसा उपलब्ध कराने वाले, जनसंहार करने वाले हथियारों की खरीद के लिए होने वाले वित्तीय लेनदेन से रोकने वाली एक क्षेत्रीय संस्था है और इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही एफएटीएफ कार्रवाई करती है। यह समूह पाकिस्तान से आइएस, अलकायदा, जमात-उद-दावा, लश्करे तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और तालिबान से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए कहता रहा है। लेकिन हकीकत में अब तक ऐसा कुछ भी होता नहीं दिखा है। निगरानी सूची में रहने का पाकिस्तान का इतिहास पुराना है। आतंक पर लगाम लगाने के लिए सबसे पहली जरूरत है कि आतंकी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद बंद हो। इसके लिए पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान को इच्छाशक्ति दिखाने की जरूरत है। हालांकि अब तक का अनुभव बताता है कि उससे ऐसी उम्मीद करना व्यर्थ ही है।

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