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संपादकीयः लापरवाही पर लगाम

सड़क पर अंधाधुंध रफ्तार से या शराब पीकर वाहन चलाने पर लगाम लगाने के मकसद से सख्त कानून की जरूरत लंबे समय से जताई जा रही थी।

Author August 5, 2016 3:18 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

सड़क पर अंधाधुंध रफ्तार से या शराब पीकर वाहन चलाने पर लगाम लगाने के मकसद से सख्त कानून की जरूरत लंबे समय से जताई जा रही थी। अब बुधवार को मोटर यान (संशोधन) विधेयक, 2016 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के साथ ही इस मसले पर एक अहम पहल हुई है। पहले जहां नशे में गाड़ी चलाने वाले लोग कानूनी कार्रवाई की ज्यादा फिक्र नहीं करते थे, अब अगर वे शराब पीकर वाहन चलाते पकड़े गए तो दस हजार रुपए तक जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा, नए नियमों के तहत ‘हिट ऐंड रन’ के शिकार व्यक्ति को दो लाख रुपए और सड़क हादसे में मौत होने पर दस लाख रुपए मुआवजे का प्रावधान किया गया है।

सड़कों पर खतरनाक ढंग से गाड़ी चलाने पर पहले जहां एक हजार रुपए जुर्माने की व्यवस्था थी, उसे बढ़ा कर पांच हजार रुपए कर दिया गया है। ऐसे ही कई और सख्त प्रावधान रखे गए हैं, ताकि सड़कों को आम यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाया जा सके। हालांकि सड़क पर सफर करते हुए नियम-कायदों का ध्यान रखना एक स्वाभाविक नागरिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। लेकिन हमारे यहां इस मामले में लोग कितने लापरवाह हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। दरअसल, सड़क हादसों को लेकर कानूनी व्यवस्था अब तक ऐसी रही है कि आम नागरिकों के भीतर उसका खयाल रखने या उससे खौफ खाने की स्थिति नहीं बन सकी है। अगर ऐसे लोग कभी पकड़े भी जाते हैं तो सजा या जुर्माने की रकम इतनी कम है कि उससे उनकी गैरजिम्मेदार आदत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

भारत में हर साल अमूमन पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनकी वजह से सालाना लगभग डेढ़ लाख लोगों की जान चली जाती है। यह तादाद दूसरी अकाल मौतों के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह भी गौरतलब है कि सड़क हादसों के विभिन्न कारणों में शराब पीकर गाड़ी चलाने को सबसे बड़े कारण के तौर पर दर्ज किया गया है। चार साल पहले दिल्ली के बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू सड़क हादसे पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शहर के अभिजात वर्ग में देर रात की पार्टियां और इसके बाद नशे में गाड़ी चलाना जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है और यह आदत हमारे समाज के लिए बड़ा खतरा बन गई है।

इसकी वजह से रोजाना अनेक लोगों की जान चली जाती है और शहरों में राहगीर सुरक्षित नहीं हैं। दरअसल, शराब पीकर वाहन चलाने वाले लोगों की दृष्टि विकृत हो जाती है, चेतना और नजर में तालमेल नहीं रह जाता है। इस वजह से किसी वस्तु की दूरी का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। अक्सर ऐसे हादसों की खबरें आती रहती हैं जिनमें नशे की हालत में वाहन चलाने वाले व्यक्ति ने किसी दूसरी गाड़ी में टक्कर मार दी या फिर फुटपाथ पर सोते लोगों को कुचल कर मार डाला। विडंबना यह है कि दूसरे लोगों के लिए जानलेवा साबित होने के बावजूद ऐसे मामलों में सजा की दर बहुत कम रही है। जबकि अगर सड़क पर वाहन चलाते हुए सामान्य नियम-कायदों का ही ध्यान रखा जाए तो हादसों पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

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