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संपादकीयः विवाद का सम्मान

पद्म पुरस्कारों को जिस गरिमा की नजर देखा जाता है, उसमें कोशिश यह होनी चाहिए कि इसे लेकर कोई विवाद की स्थिति न बने।

Padma Awards, Indian Citizens, Indians Padma Awards, Padma Awards news, Padma Awards latest news, Padma Awards Hindi news2016 में 10 पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 83 पद्म श्री अवार्ड दिए गए थे।

पद्म पुरस्कारों को जिस गरिमा की नजर देखा जाता है, उसमें कोशिश यह होनी चाहिए कि इसे लेकर कोई विवाद की स्थिति न बने। लेकिन विडंबना है कि आमतौर पर हर साल कुछ ऐसे प्रसंग सामने आ जाते हैं, जिनके चलते कुछ लोगों को सवाल उठाने का मौका मिलता है। इस बार सितार वादक उस्ताद इमरत खान ने जिस शिकायत के आधार पर पद्मश्री ठुकरा दिया, उससे उनके दुख को समझा जा सकता है। उनकी उम्र बयासी साल हो चुकी है और पिछले कई दशक से वे दुनिया भर में भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक जाने-माने नाम रहे हैं। खासकर सितार वादन और सुरबहार के प्रचार-प्रचार में उनके योगदान को किसी भी हाल में कम करके नहीं आंका जा सकता। वे अपने बड़े भाई उस्ताद विलायत खान, उस्ताद बिस्मिल्ला खान, उस्ताद अहमदजान थिरकवा खान और पंडित वीजी जोग के साथ अपने संगीत का कौशल साबित कर चुके हैं। मगर अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हों में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाने लायक समझा गया। जबकि उनके कनिष्ठ उनसे काफी पहले पद्मभूषण पुरस्कार हासिल कर चुके हैं।

सवाल है कि आखिर उस्ताद इमरत खान का नाम हर साल दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों की सूची में क्यों भुलाया जाता रहा! अगर हर साल इन सम्मानों के वाजिब हकदारों के नाम तय किए जाते हैं, तो किन वजहों से किसी व्यक्ति के कई दशक के अहम योगदान दर्ज नहीं किए जा पाते हैं! इतने दिनों बाद उन्हें पद्मश्री देने की घोषणा यही बताती है कि पद्म पुरस्कारों के मामले में सरकारों पर अपनी सुविधा और पसंद के लोगों को चुनने के आरोप अगर पूरी तरह सच नहीं भी हैं तो इसमें लापरवाही जरूर बरती जाती है। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि कई बार पद्म सम्मान हासिल करने वालों की सूची में कुछ ऐसे नाम देखने को मिल जाते हैं, जिन्हें जिस उपलब्धि के नाम पर यह पुरस्कार दिया जाता है, उस क्षेत्र में उनकी उपलब्धि बेहद कम या महज औपचारिक होती है। आखिर ऐसा कैसे संभव हो जाता है कि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक ईमानदारी से अपने क्षेत्र में काम करने और बड़ी कामयाबियों के बावजूद ऐसे सम्मानों के लिए याद नहीं किया जाता है! इसलिए ऐसे सवाल उठने स्वाभाविक ही हैं कि किसी शख्सियत को पद्म सम्मानों के लिए चुने जाने के पैमाने क्या होते हैं! यह बेवजह नहीं होगा कि उस्ताद विलायत खान और कत्थक नृत्यांगना सितारा देवी जैसी संगीत की दुनिया की नामचीन हस्तियों ने चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पद्म सम्मान लौटा दिया था।

न पुरस्कारों की गरिमा के लिहाज से होना यह चाहिए कि इसके लिए अगर किसी व्यक्ति को चुना जाए तो उसे लेकर किसी को भी सवाल उठाने का मौका न मिले और उस पर किसी विवाद की गुंजाइश न रहे। इस पर अक्सर होने वाले विवादों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया था कि पद्म पुरस्कार के लिए चुने जाने वालों के लिए राष्ट्रीय चयन समिति गठित की जाए, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके प्रतिनिधि, लोकसभा में विपक्ष के नेता आदि शामिल हों। इसके अलावा, 1996 में जब केआर नारायणन उपराष्ट्रपति थे, तब उन्होंने एक उच्चस्तरीय समीक्षा समिति बनाई थी, ताकि पद्म पुरस्कारों के चयन में पारदर्शिता लाई जा सके। लेकिन सरकारों ने इन सम्मानों को निर्विवाद बनाने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है।

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