Opinion India Q2 2017-18 GDP growth rate rebounds to 6.3% as GST jitters recede - Jansatta
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संपादकीयः बढ़ोतरी का अर्थ

चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर का 6.3 फीसद पर आ जाना अर्थव्यवस्था के फिर से गति पकड़ने का ही संकेत है।

Author December 2, 2017 3:16 AM
वर्ल्ड बैंक ने देश में आर्थिक सुधारों की गति तेज होने की उम्मीद जताई है। प्रतीकात्मक चित्र

चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर का 6.3 फीसद पर आ जाना अर्थव्यवस्था के फिर से गति पकड़ने का ही संकेत है। लगातार पांच तिमाही से गिरावट दर्ज हो रही थी और इसके चलते सरकार को काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी। एक के बाद एक कई तिमाहियों तक गिरावट के आंकड़े आने पर जहां तमाम आलोचक नोटबंदी पर नए सिरे से निशाना साध रहे थे वहीं जीएसटी की विसंगतियां गिनाते हुए उसके क्रियान्वयन की खामियां भी बताई जा रही थीं। लेकिन जीडीपी के ताजा आंकड़े ने जहां सरकार को आलोचना के घेरे से बाहर लाने में मदद की है, वहीं उसे फिर से यह दावा करने का मौका भी दिया है कि नोटबंदी और जीएसटी दो बड़े सुधारात्मक कदम थे, और इनके शुरुआती प्रभाव भले नकारात्मक रहे हों, पर अब अर्थव्यवस्था उस दौर से बाहर निकल कर फिर से रफ्तार पकड़ चुकी है, तथा आने वाली तिमाहियों में और बढ़ोतरी होगी। यों आठ से नौ फीसद की वृद्धि दर के सुनहरे दौर के मुकाबले 6.3 फीसद का आंकड़ा बहुत संतोषजनक नहीं कहा जा सकता, मगर पिछली तिमाही और उससे पहले की चार तिमाहियों के निराशाजनक प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में ताजा आंकड़ा उत्साहवर्धक ही माना जाएगा। और स्वाभाविक ही इस पर उद्योग जगत ने खुशी जताई है। जीवीए यानी सकल मूल्यवर्धन में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पिछली तिमाही में यह 5.6 फीसद था, वहीं दूसरी तिमाही में यह 6.1 फीसद दर्ज हुआ।

लेकिन कई कारणों से अब भी यह नहीं कहा जा सकता कि सबकुछ ठीकठाक है। निर्यात के मोर्चे पर पिछली तिमाही जैसी ही कमजोरी दर्ज हुई है। दूसरी तिमाही में विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग में सात फीसद की तेजी दर्ज की गई, पर एक साल पहले समान अवधि में विनिर्माण की विकास दर 7.7 फीसद रही थी। चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही में कृषिक्षेत्र में केवल 1.7 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पहली तिमाही में यह आंकड़ा 2.3 फीसद था। यह भी गौरतलब है कि ठीक इसी समय आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के भी आंकड़े आए हैं, जो इनकी वृद्धि दर में गिरावट को दर्शाते हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली- इन आठ क्षेत्रों की वृद्धि दर अक्तूबर में सिर्फ 4.7 फीसद रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 7.1 फीसद था। इसलिए सहज ही सवाल उठता है कि यह अस्थायी मुकाम है, या टिकाऊ रुझान? इस बारे में कुछ कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। जब तक निर्यात की कमजोरी कायम है, आठ बुनियादी क्षेत्रों में सुस्ती बनी रहती है, तब तक दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को लेकर अर्थव्यवस्था की टिकाऊ रफ्तार का दावा करना अति उत्साह होगा।

अगर अगली तीन-चार तिमाही तक वृद्धि का रुझान बना रहे, तब जरूर यह कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था की गाड़ी ठीक चल रही है। निर्यात की कमजोरी और आठ बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों की गिरावट के अलावा एक और कमजोर पहलू की तरफ भी ध्यान जाना चाहिए। पिछली तिमाहियों के खराब प्रदर्शन से चिंतित होकर सरकार ने अपना खर्च तो बढ़ाया, पर निजी निवेश में अब भी ठहराव का ही आलम है। रोजगार के मोर्चे पर भी स्थिति शोचनीय बनी हुई है। क्या विडंबना है कि जिस दिन जीडीपी की वृद्धि दर में इजाफे की खबर आई उसी दिन सेंसेक्स ने साल की सबसे बड़ी गिरावट का मुंह देखा। इस गिरावट के पीछे एक खास वजह वित्तीय घाटा बढ़ने से उत्पन्न चिंता थी। ताजा आंकड़े के बाद चालू वित्तवर्ष की पहली छमाही की वृद्धि दर छह फीसद हो गई है। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि इस साल की वृद्धि दर 6.7 फीसद रहेगी। क्या ऐसा हो पाएगा!

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