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संपादकीयः साहब और साहबी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद अब्बासी ने आतंकी सरगना हाफिज सईद के बारे में जिन लफ्जों का इस्तेमाल किया, उससे एक बार फिर जाहिर हो गया है कि पाकिस्तानी हुक्मरान दहशतगर्दी पर लगाम कसने को लेकर कतई संजीदा नहीं हैं।

Author January 18, 2018 2:45 AM
शाहिद अब्बासी ने हाफिज सईद के बारे में पूछे जाने पर ‘साहब’ कहते हुए बड़े अदब से उसका नाम लिया। उन्होंने साफ कहा कि सईद साहब पर पाकिस्तान में कोई मुकदमा नहीं है, भारत बेवजह उन्हें बदनाम करने की कोशिश करता रहा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद अब्बासी ने आतंकी सरगना हाफिज सईद के बारे में जिन लफ्जों का इस्तेमाल किया, उससे एक बार फिर जाहिर हो गया है कि पाकिस्तानी हुक्मरान दहशतगर्दी पर लगाम कसने को लेकर कतई संजीदा नहीं हैं। शाहिद अब्बासी ने हाफिज सईद के बारे में पूछे जाने पर ‘साहब’ कहते हुए बड़े अदब से उसका नाम लिया। उन्होंने साफ कहा कि सईद साहब पर पाकिस्तान में कोई मुकदमा नहीं है, भारत बेवजह उन्हें बदनाम करने की कोशिश करता रहा है। यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तानी हुकूमत ने हाफिज सईद का इस तरह बचाव किया है। हालांकि अनेक सबूतों से जाहिर है कि मुंबई के आतंकी हमले और भारत में हुई दहशतगर्दी की कई दूसरी वारदातों में हाफिज सईद का हाथ था। मगर भारत की तरफ से पेश किए गए तमाम सबूतों को पाकिस्तान खारिज करता रहा है। इस तरह वह दुनिया भर में साबित करने की कोशिश करता है कि पाकिस्तान में दहशतगर्दी की कोई जगह नहीं है। मगर इस बात का उसके पास कोई जवाब नहीं है कि अमेरिका ने भी वांछित वैश्विक आतंकवादियों की सूची में हाफिज सईद का नाम दर्ज कर रखा है। जब अमेरिकी दबाव बना तो पाकिस्तान सरकार ने हाफिज के संगठनों पर प्रतिबंध तो लगा दिया, लेकिन उस पर शिकंजा कसने से बचती रही।

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छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तानी हुक्मरान चरमपंथी संगठनों, सेना और वहां की खुफिया एजेंसी के हाथों की कठपुतली की तरह काम करते हैं। सेना और खुफिया एजेंसी आतंकी संगठनों के जरिए भारत और दूसरे देशों में दहशत का माहौल बनाए रख कर अपनी ताकत दिखाती हैं। आतंकी संगठन सरकार पर दबाव बनाए रखते हैं। ऐसे में हाफिज सईद की ताकत बढ़ती गई है। वह पाकिस्तान में खुलेआम भारत और अमेरिका के खिलाफ रैलियां कर जहर उगलता रहता है, इस्लाम के नाम पर दहशतगर्दी को उकसाता रहता है। पाकिस्तान सरकार उसे समाज सेवक कह कर इसलिए बचाव करती है कि अगर उसने उसके खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाने की कोशिश की तो सेना और खुफिया एजेंसी तख्तापलट का व्यूह रच सकती हैं। हाफिज सईद की ताकत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि माना जा रहा है, वह मिल्ली मुसलिम लीग नाम से राजनीतिक संगठन खड़ा करने वाला है, जिसके साथ मिल कर परवेज मुशर्रफ के चुनाव लड़ने की संभावना बताई जा रही है।

पाकिस्तानी हुकूमत चाहे जितना बचाव करे, पर यह हकीकत दुनिया के सामने है कि हाफिज सईद पाकिस्तान में आतंकी संगठनों का सरगना है। खासकर भारत में दहशतगर्दी फैलाने में उसका अक्सर हाथ रहता है। मुंबई के आतंकी हमले में उसका हाथ होने से पाकिस्तान सरकार भले इनकार करे, पर खुद उसके पूर्व विदेशमंत्री और पूर्व सुरक्षा सलाहकार सार्वजनिक रूप से बता चुके हैं कि भारत में हुए अनेक आतंकी हमलों में लश्करे-तैयबा और जैशे-मोहम्मद का हाथ रहा है। फिर यह भी छिपी बात नहीं है कि लश्करे-तैयबा का जुड़ाव हाफिज सईद से रहा है। जब अमेरिकी दबाव पड़ा तो पाकिस्तान ने लश्करे-तैयबा पर प्रतिबंध जरूर लगा दिया था, लेकिन जमात-उद-दावा नाम से उसने नया संगठन खड़ा कर लिया था। यानी संगठन ने सिर्फ अपना चोला बदल लिया। भारत में आतंकी हमलों से जुड़े सबूतों से आंख चुराते समय पाकिस्तान यह भूल जाता है कि वह खुद आतंकवाद प्रभावित देश है। अपनी हुकूमत महफूज रखने की मंशा से बेशक पाकिस्तान सरकार हाफिज सईद का बचाव कर ले, पर इसका खमियाजा उसे भुगतना ही पड़ेगा।

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