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संपादकीयः लापरवाही की जांच

गुरुग्राम में रेयान इंटरनेशनल स्कूल के एक बच्चे प्रद्युम्न की हत्या के मामले में सीबीआइ का खुलासा चौंकाने वाला है।

Author Published on: November 10, 2017 2:47 AM
आठ सितंबर को जब स्कूल में प्रद्युम्न की हत्या की घटना सामने आई थी, तब पुलिस ने स्कूल-बस के कंडक्टर को गिरफ्तार कर उसे एक तरह से कातिल घोषित कर दिया था।

गुरुग्राम में रेयान इंटरनेशनल स्कूल के एक बच्चे प्रद्युम्न की हत्या के मामले में सीबीआइ का खुलासा चौंकाने वाला है। सीबीआइ ने इस हत्या के आरोप में उसी स्कूल के सोलह साल के एक छात्र को गिरफ्तार किया है। आठ सितंबर को जब स्कूल में प्रद्युम्न की हत्या की घटना सामने आई थी, तब पुलिस ने स्कूल-बस के कंडक्टर को गिरफ्तार कर उसे एक तरह से कातिल घोषित कर दिया था। पुलिस ने कंडक्टर के कबूलनामे के साथ यह निष्कर्ष पेश किया था कि उसने बच्चे का यौन शोषण करने के इरादे से उसे पकड़ा और नाकाम रहने पर गला रेत कर उसे मार डाला। इससे स्वाभाविक ही समाज में गुस्सा फैला। लेकिन तब भी कई लोगों ने पुलिस के निष्कर्ष पर सवाल उठाए थे।

यहां तक कि खुद प्रद्युम्न के पिता ने कहा था कि पुलिस ने जिस व्यक्ति को मुख्य आरोपी बना कर पकड़ा है, वह असली अपराधी को बचाने की कवायद है। आखिर सीबीआइ को कंडक्टर के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। जबकि सीसीटीवी फुटेज सहित कई लोगों से बातचीत और कइयों के फोन कॉल के रिकार्ड खंगालने, सबूतों की फोरेंसिक जांच के साथ अलग-अलग कोण से पड़ताल करने के बाद सीबीआइ ने ग्यारहवीं कक्षा के छात्र को गिरफ्तार किया।

अधिकारियों के मुताबिक छात्र ने परीक्षा और शिक्षक-अभिभावक बैठक को टालने के लिए इस घटना को अंजाम दिया। लेकिन ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस ‘सुनियोजित’ हत्या में निशाने पर प्रद्युम्न नहीं था। पूछताछ के दौरान आरोपी छात्र ने कहा कि मुझे कुछ समझ नहीं आया, मैं पूरी तरह शून्य हो गया था और मैंने उसे मार डाला! सीबीआइ के एक अधिकारी का कहना है कि आरोपी छात्र जिस तैयारी के साथ आया था, उसमें किसी न किसी को उस दिन मरना था! उस छात्र के कबूलनामे में जो बातें सामने आई हैं, अगर वे सच साबित होती हैं तो यह मामला केवल आपराधिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समाज के बनने की प्रक्रिया के लिहाज से भी गंभीर चिंता की बात है। कोई भी संस्थान अपने दायरे में एक सांस्कृतिक माहौल भी रचता है। आखिर रेयान इंटरनेशनल जैसे अभिजात स्कूल में पढ़ते हुए आरोपी बच्चे का कैसा निर्माण हो रहा था कि महज परीक्षा और शिक्षक-अभिभावक बैठक टलवाने के इरादे से उसने एक बच्चे की हत्या कर दी!

अब नए कानून के तहत आरोपी छात्र को संभवत: वयस्कों के समकक्ष माना जाए। लेकिन जांच के दौरान ऐसे संकेत भी सामने आए हैं कि घटनास्थल के आसपास आरोपी छात्र के अलावा कई लोग मौजूद थे। अगर ऐसा है कि तो स्कूल प्रबंधन को भी इस बात के लिए कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए कि क्या उसने मामले पर परदा डालने की कोशिश की! सीबीआइ के दावे ने गुरुग्राम पुलिस की तफतीश को सवालों के घेरे में ला दिया है। पुलिस का निष्कर्ष काम में केवल कोताही का नतीजा था, या कोई और बात भी थी?

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