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संपादकीयः आतंक का सामना

संघर्ष विराम समझौते के बावजूद पाकिस्तान की ओर से उकसावे की कार्रवाई होती रहती है।

Author Published on: January 17, 2018 3:07 AM
पाकिस्तान के सैनिक अकसर सीमा पर भारतीय क्षेत्र में नाहक गोलीबारी करते हैं, तो दूसरी ओर आतंकवादियों के समूह कश्मीर में घुसपैठ की कोशिश करते हैं।

संघर्ष विराम समझौते के बावजूद पाकिस्तान की ओर से उकसावे की कार्रवाई होती रहती है। कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि भारतीय सैनिकों के पास जवाबी कार्रवाई के अलावा कोई चारा नहीं बचता। सोमवार को पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर संघर्ष विराम की स्थिति का उल्लंघन किया गया। भारतीय सैनिकों ने इसका करारा जवाब दिया। भारत की एक सैन्य टुकड़ी ने जवाबी कार्रवाई के तहत सीमा पार जाकर पाकिस्तान की एक चौकी तबाह कर दी और उसके सात फौजियों को मार गिराया। इसके अलावा, एक अन्य घटनाक्रम में सेना ने घुसपैठिए आतंकवादियों के एक समूह के सभी पांच सदस्यों का सफाया करने में भी कामयाबी हासिल की। इसका महत्त्व इस तथ्य के मद्देनजर और बढ़ जाता है कि घुसपैठ की कोशिश में मारे जाने वाले आतंकवादियों का मकसद उड़ी में सैन्य शिविर पर किए गए हमले की तरह की किसी बड़ी वारदात को अंजाम देना था।
गौरतलब है कि लगभग सवा साल पहले घुसपैठिए आतंकवादियों ने उड़ी के सैन्य शिविर पर हमला किया था, जिसमें भारत को अपनेसत्रह जवानों को खोना पड़ा था। उसके बाद भी पाकिस्तानी ठिकानों से अपनी गतिविधियां चलाने वाले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी समय-समय पर ऐसे हमले करते रहे हैं। यानी ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ दोतरफा मोर्चा खोला हुआ है।

संघर्ष विराम कायम रखने की शर्त के बावजूद एक ओर उसके सैनिक अकसर सीमा पर भारतीय क्षेत्र में नाहक गोलीबारी करते हैं, तो दूसरी ओर आतंकवादियों के समूह कश्मीर में घुसपैठ की कोशिश करते हैं। जाहिर है, ऐसे में भारतीय सुरक्षा बलों की चुनौती बढ़ जाती है। सीमा पर भारतीय सैनिकों की चौकसी और चुस्ती की वजह से पाकिस्तान का हर दांव उलटा पड़ जा रहा है। एक खबर के मुताबिक भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में पिछले साल रणनीतिक अभियानों के तहत और नियंत्रण रेखा पर सीमा पार से होने वाली गोलीबारी का मुकाबला करते हुए एक सौ अड़तीस पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया।

विचित्र है कि एक तरफ पाकिस्तान शांति बहाली में अड़चन के लिए भारत पर अंगुली उठाता है, लेकिन दूसरी तरफ सीमा पर उसके सैनिक संघर्ष विराम का खयाल रखना जरूरी नहीं समझते। इसके अलावा, ऐसे अनेक मौके आ चुके हैं जब दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने आतंकी गिरोहों को पनाह देने के लिए पाकिस्तान की तीखी आलोचना की। कुछ समय पहले ब्रिक्स सम्मेलन के घोषणापत्र में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहों को शरण देने के लिए पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा किया गया था। इसके बाद खुद पाकिस्तान के विदेशमंत्री ने भी स्वीकार किया था कि ये आतंकी संगठन पाकिस्तान के ठिकानों से अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं। विडंबना यह है कि ऐसे तमाम आरोपों और कबूलनामे के बावजूद पाकिस्तान भारत में आतंकी हमले करने वालों को पनाह देने से लेकर सीमा पर बेवजह टकराव से बाज नहीं आता। क्या यह बेहतर नहीं होगा कि सीमा पर संघर्ष विराम की स्थिति बहाल रखने से लेकर आतंकवादियों को शरण देने के मामले में पाकिस्तान कोई ठोस पहलकदमी करे? पर समस्या यह है कि सुरक्षा और भारत संबंधी मामलों में वहां के राजनीतिक नेतृत्व की कम, फौज की ज्यादा चलती है।
तेल की धार

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