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संपादकीयः काबुल में आतंक

अफगानिस्तान में कई तरह के आतंकी संगठन सक्रिय रहे हैं। तालिबान खुद अफगानिस्तान की जमीन से पैदा हुआ था। पर पाकिस्तान में जनमे हक्कानी नेटवर्क से भी यह देश पीड़ित रहा है।

Author December 30, 2017 3:35 AM
काबुल में हमला (AP)

अफगानिस्तान में कई तरह के आतंकी संगठन सक्रिय रहे हैं। तालिबान खुद अफगानिस्तान की जमीन से पैदा हुआ था। पर पाकिस्तान में जनमे हक्कानी नेटवर्क से भी यह देश पीड़ित रहा है। बाहर से आकर अल कायदा ने यहां अपनी जड़ें जमार्इं और अब आइएस भी यहां पैर पसार रहा है। गौरतलब है कि गुरुवार को काबुल में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी आइएस ने ली है। एक शिया सांस्कृतिक केंद्र को निशाना बना कर किए गए इस हमले में चालीस लोग मारे गए। खबरों के मुताबिक यह फिदायीन हमला था। एक फिदायीन हमलावर ने तबायान सांस्कृतिक केंद्र में इकट्ठा हुए लोगों के बीच पहुंच कर खुद को विस्फोट से उड़ा लिया। विस्फोट के वक्त वहां पर सोवियत संघ के आक्रमण के अड़तीस वर्ष पूरे होने के मौके पर कुछ छात्र मीडिया-समूह के सदस्यों के साथ एक चर्चा में मशगूल थे। आइएस ने अपनी प्रचार इकाई ‘अमाक’ के जरिए जारी बयान में कहा है कि उसने शिया सांस्कृतिक केंद्र को निशाना बना कर विस्फोट किया। कुछ दिन पहले अफगान खुफिया एजेंसी के परिसर में भी आतंकी हमला हुआ था, और इसकी भी जिम्मेदारी आइएस ने ही ली थी। इस तरह, अफगानिस्तान में आइएस की सक्रियता कोई पहली बार सामने नहीं आई है। लेकिन ताजा मामले में जो पहलू अलग से ध्यान खींचता है वह है शिया सांस्कृतिक केंद्र को निशाना बनाया जाना।
आतंकी संगठन अपनी बर्बरता के बरक्स यह जताते रहे हैं कि वे सारी दुनिया के मुसलमानों के खैरख्वाह हैं और दुनिया को इस्लामी उसूलों के मुताबिक बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन बहुत-से ऐसे लोग भी उनकी बर्बरता के शिकार हुए हैं जो इस्लाम को मानते हैं। ज्यादा वक्त नहीं बीता, जब मिस्र में एक सूफी मस्जिद पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था, और उसके पीछे भी आइएस का ही हाथ था। अब अफगानिस्तान में शिया सांस्कृतिक केंद्र आइएस का शिकार हुआ है। इससे साफ हो जाता है कि दूसरे धर्मों की तो छोड़िए, आइएस सारे मुसलमानों को भी अपना नहीं मानता। और यह बात पाकिस्तान में सक्रिय और वहीं पले-बढ़े आतंकी संगठनों पर भी लागू होती है, जहां शिया मसजिदों और मुजाहिरों पर हमले की जाने कितनी घटनाएं हो चुकी हैं। कई बार रमजान के पवित्र महीने में भी आतंकवाद ने कहर बरपाया है। संकीर्ण नजरिए का उन्माद और किसी तथाकथित मकसद के नाम पर हिंसा को जायज मानने का भाव ही आतंकवाद के मूल में है। आतंकवाद के समूल नाश के लिए, सुरक्षा के मोर्चे पर मुस्तैदी के अलावा, इस मानसिकता से भी लड़ना होगा।

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