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संपादकीयः लापरवाही की हद

कारखानों में मामूली लापरवाही की वजह से आग लगने, गैस सिलेंडर या फिर बॉयलर फटने से लोगों के नाहक मारे जाने की घटनाएं जब-तब हो जाती हैं। पर ये हादसे शायद ही कभी बाकी औद्योगिक इकाइयों के लिए सबक बनते हैं।

Author February 22, 2018 04:39 am
(File PIC)

कारखानों में मामूली लापरवाही की वजह से आग लगने, गैस सिलेंडर या फिर बॉयलर फटने से लोगों के नाहक मारे जाने की घटनाएं जब-तब हो जाती हैं। पर ये हादसे शायद ही कभी बाकी औद्योगिक इकाइयों के लिए सबक बनते हैं। पंजाब में पटियाला जिले के शंभु कस्बे में स्थित एक कारखाने में सोमवार को आधी रात अमोनिया गैस का सिलेंडर फट गया। इस धमाके के बाद समूचे उद्योग परिसर में तेजी से आग फैल गई। इस हादसे में तीन लोगों के मारे जाने और ग्यारह लोगों के घायल होने की खबर है। यह कोई ऐसी अकेली घटना नहीं है, जिसमें लापरवाही और सुरक्षा उपायों में चूक का खमियाजा वहां काम करने वालों को उठाना पड़ा। विडंबना यह है कि जब भी ऐसे हादसे सामने आते हैं, तो सरकार और प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया जाता है। मगर उस पर कितना अमल हो पाता है, यह शायद ही कभी किसी को पता चलता है।

आमतौर पर ऐसे तमाम हादसों के बाद किसी रिवायत की तरह प्रबंधकों के खिलाफ मामला दर्ज करने, जांच कराने और मुआवजा देने की घोषणाएं होती हैं। सवाल है कि इसका उन औद्योगिक इकाइयों की आंतरिक गतिविधियों, संसाधनों और वहां काम करने वालों के लिए सुरक्षित होने की गारंटी, हादसे की स्थिति में पुख्ता सुरक्षा-व्यवस्था आदि के मोर्चे पर क्या असर पड़ता है? आखिर वे कौन-सी वजहें हैं कि हर कुछ समय के अंतराल पर किसी कारखाने में गैस रिसने, बॉयलर फटने या आग लगने की वजह से लोगों के मारे जाने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन कार्रवाई के दावों का कोई हासिल नहीं दिखता।

क्या यह स्थिति इसलिए भी कायम है कि ऐसे कारखानों या औद्योगिक इकाइयों में हादसों की स्थिति में जान गंवाने वाले लोग आमतौर पर कमजोर तबकों से आते हैं? एक महीने पहले दिल्ली के बवाना औद्योगिक क्षेत्र के तीन कारखानों में आग लग गई थी और उसमें सत्रह लोग मारे गए थे। उसमें भी यही तथ्य सामने आया था कि कारखाना मालिक सुरक्षा से संबंधित नियम-कायदों की अनदेखी कर रहे थे। पिछले साल नवंबर में उत्तर प्रदेश में रायबरेली के ऊंचाहार स्थिति एनटीपीसी में आपराधिक लापरवाही के चलते बॉयलर फट गया था, जिसमें छब्बीस लोगों की जान चली गई और सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
जाहिर है, इस तरह की घटनाएं केवल तकनीकी खराबी का नतीजा नहीं होती हैं, बल्कि ऐसा गड़बड़ियों की अनदेखी और उनके प्रति लापरवाही की वजह से होता है।

कारखानों या औद्योगिक इकाइयों में न केवल संसाधनों को बेहतर करने और उनके काम करने की स्थितियों पर लगातार निगरानी में व्यापक लापरवाही बरती जाती है, बल्कि हादसों की स्थिति में सुरक्षा के इंतजाम की भी अनदेखी की जाती है। इसकी कीमत वहां काम करने वाले लोग चुकाते हैं, जो अचानक हुए किसी विस्फोट या आग लगने के दौरान मारे जाते हैं। जब तक इस तरह की सभी औद्योगिक इकाइयों या कारखानों में समय-समय पर जांच, सुरक्षित स्थिति में काम और गतिविधियों पर नियमित निगरानी, मामूली तकनीकी खराबी पर भी कोई जोखिम नहीं लेने की शर्त और वहां के कामगारों की सुरक्षा-व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे हादसों पर काबू पाना मुश्किल बना रहेगा। जरूरत इस बात की है कि तमाम औद्योगिक इकाइयों में नियमित रूप से प्रशासनिक निगरानी के साथ-साथ तकनीकी जांच की व्यवस्था हो, ताकि वहां के कामगार जोखिम रहित माहौल में काम कर सकें।

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