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संपादकीयः वोट की कीमत

कालेधन के इस बढ़ते इस्तेमाल ने शासन तंत्र और राजनीति में स्थायी जगह बना ली है। देश में पिछले दिनों जिस तरह से भारी मात्रा में नगदी जब्त हुई है उससे तो लगता है बिना कालेधन के राजनीति नहीं हो सकती या चुनाव जीतना मुश्किल है।

तमिलनाडु की वेल्लोर लोकसभा सीट का चुनाव इसीलिए रद्द कर दिया गया कि इस सीट पर चुनाव लड़ रहे द्रमुक उम्मीदवार के ठिकानों पर पिछले दिनों आयकर विभाग के छापों में साढ़े ग्यारह करोड़ रुपए से ज्यादा की नगदी बरामद हुई थी। इस सीट पर 18 अप्रैल को वोट पड़ने थे।

चुनावों के दौरान पकड़ी जाने वाली भारी नगदी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उम्मीदवार चुनाव जीतने के लिए खुल कर पैसे का इस्तेमाल कर रहे हैं। अपने पक्ष में वोट डालने के लिए मतदाताओं को लुभाने की खातिर पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। राजनीति में कालेधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने का यह एक बड़ा कारण है। कालेधन के इस बढ़ते इस्तेमाल ने शासन तंत्र और राजनीति में स्थायी जगह बना ली है। देश में पिछले दिनों जिस तरह से भारी मात्रा में नगदी जब्त हुई है उससे तो लगता है बिना कालेधन के राजनीति नहीं हो सकती या चुनाव जीतना मुश्किल है। चुनावों में दलों और उम्मीदवारों द्वारा ऐसा किया जाना कोई नई बात नहीं है। पंचायत चुनाव से लेकर स्थानीय निकाय चुनाव, विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक में यह आम है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि राजनीतिक दल एक तरफ तो चुनावी राजनीति को साफ-सुथरा बनाने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और दूसरी ओर पैसे की ताकत से चुनाव जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।

हाल में तमिलनाडु की वेल्लोर लोकसभा सीट का चुनाव इसीलिए रद्द कर दिया गया कि इस सीट पर चुनाव लड़ रहे द्रमुक उम्मीदवार के ठिकानों पर पिछले दिनों आयकर विभाग के छापों में साढ़े ग्यारह करोड़ रुपए से ज्यादा की नगदी बरामद हुई थी। इस सीट पर 18 अप्रैल को वोट पड़ने थे। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी ही कार्रवाइयों में करोड़ों रुपए पकड़े गए हैं जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं है। इस बात की क्या गारंटी है कि इस पैसे का इस्तेमाल चुनाव में मतदाताओं को देने के लिए नहीं किया जाएगा! तमिलनाडु में अब तक बहत्तर करोड़ रुपए से ज्यादा की नगदी बरामद हो चुकी है। पिछली बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को पैसा बांटने के मामले सामने आने के बाद दो सीटों पर चुनाव रद्द कर दिया गया था। हाल में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री के ओएसडी के यहां छापे में करोड़ों की नगदी मिली थी। यह किसका पैसा था, कहां से आया, कहां दिया जाना था, सब कुछ विस्तार से जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन बिना हिसाब का करोड़ों रुपया किसी के पास होना संदेह और आशंकाओं को जन्म देता है।

तमिलनाडु में राजनीतिक दल मतदाताओं पर जरा ज्यादा ही मेहरबान रहते हैं। शराब, घरेलू सामान जैसे टीवी, मिक्सी, ब्लेंडर, साड़ियां तो पुराने किस्से हो चुके हैं। अब सीधे नगदी का चलन है। इतना ही नहीं, चुनावों में सबसे ज्यादा वोट दिलाने वाले चुनाव प्रबंधकों को भारी रकम दी जाती है। तमिलनाडु में इस बार भी सभी उनतालीस सीटें चुनावी खर्च के हिसाब से संवेदनशील घोषित हैं। यानी चुनाव आयोग भी इस हकीकत से वाकिफ है कि राज्य में उम्मीदवार खुल कर पैसे का खेल खेल रहे हैं। चुनाव आयोग ने वेल्लोर सीट पर चुनाव रद्द करके उन उम्मीदवारों को कड़ा संदेश दिया है जो चुनाव जीतने के लिए पैसे को सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने में जरा नहीं झिझकते हैं। हालांकि यह भी सत्य है कि इतने बड़े देश में चुनाव के दौरान पूरी तरह से इस बुराई को रोक पाना आयोग के बूते के बाहर की बात है। चुनावों में इस तरह के धन का बड़ा स्रोत हवाला कारोबार है। लेकिन हमारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास इस समस्या से निपटने का कोई ठोस उपाय नहीं है। वरना कालेधन की समस्या पैदा ही नहीं होती। चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों को मिल कर ही इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी होगी, तभी वोट खरीदने की बुर

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