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संपादकीयः आधार का पीठ

एक तरफ केंद्र सरकार आधार कार्ड को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अनिवार्य बनाने पर तुली है और दूसरी तरफ तमाम याचिकाकर्ता इसे निजता में दखलंदाजी मानते हुए इसके विरोध पर अड़े हुए हैं।
Author November 1, 2017 02:23 am
आधार कार्ड आज सभी लोगों के लिए एक अहम दस्तावेज बन चुका है। (फाइल फोटो)

एक तरफ केंद्र सरकार आधार कार्ड को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अनिवार्य बनाने पर तुली है और दूसरी तरफ तमाम याचिकाकर्ता इसे निजता में दखलंदाजी मानते हुए इसके विरोध पर अड़े हुए हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुआई वाले खंडपीठ ने इस पर विस्तृत सुनवाई करने का फैसला किया है। मंगलवार को याचिकाओं की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि वह इस बारे में संविधान पीठ का गठन करने जा रहा है, जो नवंबर के अंतिम सप्ताह में विस्तृत सुनवाई करेगा। हाल ही में नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया है। दरअसल, यह फैसला भी आधार की अनिवार्यता को लागू करने के संदर्भ में ही आया। जब अदालत के सामने याचिकाकर्ताओं ने यह याचना रखी कि आधार की अनिवार्यता, निजी अधिकारों का उल्लंघन है तो पहला सवाल यही उठा कि निजता, मौलिक अधिकार है भी या नहीं? लेकिन अब जबकि शीर्ष न्यायालय का फैसला आ चुका है तो स्वाभाविक ही याचिकाकर्ताओं के हौंसले इस मामले में बुलंद हुए हैं। आधार योजना का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के नंबर को बैंक खातों और मोबाइल आदि से जोड़ना गैरसंवैधानिक है। यहां तक कि सीबीएसई के परीक्षार्थियों के परीक्षा में शामिल होने के लिए आधार की अनिवार्यता बताई जा रही है, जो कि कहीं से कानूनसम्मत नहीं है।

गौरतलब है कि 25 अक्तूबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए आधार की अनिवार्यता की समय-सीमा 31 मार्च, 2018 तक बढ़ा दी गई है। लेकिन असल मुद्दा यह है कि सरकार आधार पर इतना जोर क्यों दे रही है? ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब झारखंड में राशन कार्ड से आधार जुड़ा न होने के कारण डीलरों ने लाभार्थियों को कोटे में मिलना वाला राशन नहीं दिया, जिससे तीन लोग भुखमरी के शिकार हो गए। इनमें एक ग्यारह साल की बच्ची भी शामिल थी। आधार कार्ड के लागू करने के कुछ फायदे होंगे जरूर, लेकिन इसे तमाम तरह की योजनाओं से जोड़ने की जो दुश्वारियां हैं, सरकार ने उस पर व्यापक तैयारी नहीं की है। देश की बहुत बड़ी आबादी आज भी निरक्षर है, जो इसके तकनीकी पहलुओं को नहीं समझती। सरकार को चाहिए कि गांव-गांव इसके लिए शिविर लगवाए।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की ओर से आधार कार्ड को चुनौती देने पर आपत्ति जताई है। न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण के खंडपीठ ने कहा कि इस तरह की याचिका कोई व्यक्ति तो दाखिल कर सकता है लेकिन राज्य सरकार ऐसा नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि संघीय ढांचे में संसद के कानून को एक राज्य कैसे चुनौती दे सकता है। अगर ऐसा हुआ तो फिर केंद्र भी राज्य के कानून को चुनौती देगा। यह कहीं से उचित नहीं होगा। हालांकि, बाद में ममता बनर्जी ने कहा कि अगर ऐसा है तो वे निजी तौर पर याचिका दाखिल करेंगी। बहरहाल, समझा जाना चाहिए कि संविधान पीठ के गठन के बाद इस मामले के जल्दी सुलटने के आसार बने हैं, जो कि एक शुभ संकेत है।

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  1. G
    Ghanshyam Bairagi
    Nov 1, 2017 at 10:31 am
    कल बीस सूत्रीय कार्यक्रम था । इस सरकार सेंटर आधार है ।।
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    1. G
      Ghanshyam Bairagi
      Nov 1, 2017 at 10:29 am
      नमस्कार ।।
      (0)(0)
      Reply