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संपादकीयः वादा और हकीकत

किसी भी राज्य सरकार की सबसे बड़ी कसौटी यही होती है कि लोगों के जान-माल की रक्षा में वह कहां तक खरी उतरी है।

Author Updated: November 18, 2017 2:26 AM
Shiva Kumar,BJP leader Shot Dead,Shiv Kumar shot dead(PHOTO_ANIT)

किसी भी राज्य सरकार की सबसे बड़ी कसौटी यही होती है कि लोगों के जान-माल की रक्षा में वह कहां तक खरी उतरी है। फिर, भाजपा ने तो उत्तर प्रदेश के चुनाव में कानून-व्यवस्था को एक बड़ा मुद््दा बनाया था। लेकिन खुद भाजपा के राज में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की क्या हालत है? गुरुवार को ग्रेटर नोएडा में एक ग्राम प्रधान और भाजपा नेता, उनके निजी अंगरक्षक और ड्राइवर की खुलेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। गोलीबारी से भाजपा नेता का वाहन अनियंत्रित हो गया था और उसकी चपेट में आई एक किशोरी की भी मौत हो गई। हत्यारे भाजपा नेता को मारने के लिए दूर तक उनकी गाड़ी का पीछा कर गोलियां चलाते रहे। वे मौके से तभी भागे, जब उन्हें तसल्ली हो गई कि जिसे मारने आए थे उसकी मौत हो चुकी है। इससे पहले 22 अक्तूबर को गाजीपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता और संवाददाता की दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी गई। जुलाई में बिजनौर में एक दरोगा की गला काट कर हत्या कर दी गई थी।

यहां अपराधों की फेहरिस्त पेश करना मकसद नहीं है। ये चंद घटनाएं हैं, जिनसे साबित होता है कि उत्तर प्रदेश में कानून का भय बदमाशों में नहीं हैं। बदमाश जैसा चाह रहे हैं, वैसा कर ले जा रहे हैं। फिल्मी तर्ज पर पुलिस अक्सर घटना के काफी देर बाद पहुंचती है और ज्यादातर मामलों में बहानेबाजी और लीपापोती ही उसकी कार्यप्रणाली होती है। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा अखिलेश यादव सरकार पर अपराधों से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगा रही थी। भाजपा ने जब अपना चुनाव घोषणापत्र जारी किया तो उसमें गुंडाराज से मुक्ति दिलाने का संकल्प सर्वोपरि था। ‘न गुंडाराज न भ्रष्टाचार’ भाजपा का प्रमुख नारा था। इसके लिए साल भर के भीतर 1.5 लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती करने, सौ नंबर डॉयल करने पर पंद्रह मिनट में मौके पर पुलिस पहुंचने, तीन नई महिला पुलिस बटालियन गठित करने और हर जिले में तीन महिला पुलिस स्टेशन गठित करने का वादा किया गया था। इसके अलावा सौ फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने तथा एक हजार महिला अफसरों की विशेष जांच टीम गठित करने की भी बात कही गई थी। हकीकत यह है कि चाहे शहर हों या देहात, उत्तर प्रदेश में सब तरफ अपराध बढ़े हैं। चोरी, डकैती, हत्या से लेकर बलात्कार तक की घटनाओं में इजाफा हुआ है।

उत्तर प्रदेश में भाजपा को सत्ता में आए कोई दस महीने ही हुए हैं, पर इतने वक्फे में ही वह कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर नाकाम दिखने लगी है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के एक हफ्ते बाद योगी आदित्यनाथ ने चेताया था कि बदमाश या तो सुधर जाएं या राज्य छोड़ कर चले जाएं। थानों का औचक निरीक्षण और थोक में पुलिस अफसरों के तबादले करके शुरू में योगी आदित्यनाथ ने शुरू में ऐसा माहौल बनाता था मानो कानून-व्यवस्था ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पर अब उनकी प्राथमिकता बदली हुई जान पड़ती है। पुलिस और प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त और जवाबदेह बनाने के बजाय दर्शन-पूजन पर उनके अधिक ध्यान देने की खबरें आती रहती हैं। क्या इसी तरह वे उत्तर प्रदेश को भयमुक्त बनाने के वादे को पूरा करेंगे! क्या यही वह परिवर्तन है जिसके लिए राज्य के लोगों ने भाजपा और मोदी पर भरोसा जताया था?

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