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संपादकीयः अवांछित सहारा

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर समर्थन जुटाने के लिए अलग-अलग पार्टियों के अभियान में देश के सिनेमा से जुड़े मशहूर कलाकारों से प्रचार कराना कोई नई बात नहीं है। लेकिन पड़ोस के किसी देश के फिल्मी सितारे से अपने देश में चुनाव प्रचार कराने की बात हैरान करती है।

पड़ोस के किसी देश के फिल्मी सितारे से अपने देश में चुनाव प्रचार कराने की बात हैरान करती है। मौजूदा समय में जैसी राजनीतिक परिस्थिति बनी हुई है, उसमें वैसे भी इस मसले पर काफी सावधानी बरतनी चाहिए। मगर विचित्र है कि तृणमूल कांग्रेस के एक उम्मीदवार के पक्ष में बांग्लादेश के एक फिल्म अभिनेता फिरदौस अहमद ने रायगंज लोकसभा सीट के लिए वहां के मतदाताओं से वोट डालने की अपील की।

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर समर्थन जुटाने के लिए अलग-अलग पार्टियों के अभियान में देश के सिनेमा से जुड़े मशहूर कलाकारों से प्रचार कराना कोई नई बात नहीं है। लेकिन पड़ोस के किसी देश के फिल्मी सितारे से अपने देश में चुनाव प्रचार कराने की बात हैरान करती है। मौजूदा समय में जैसी राजनीतिक परिस्थिति बनी हुई है, उसमें वैसे भी इस मसले पर काफी सावधानी बरतनी चाहिए। मगर विचित्र है कि तृणमूल कांग्रेस के एक उम्मीदवार के पक्ष में बांग्लादेश के एक फिल्म अभिनेता फिरदौस अहमद ने रायगंज लोकसभा सीट के लिए वहां के मतदाताओं से वोट डालने की अपील की। इस मामले में पहला सवाल तो यही है कि बांग्लादेशी फिल्मों के अभिनेता अगर भारत में पर्यटन वीजा पर आए थे, तो यहां किसी पार्टी के पक्ष में प्रचार क्यों करने लगे? फिर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को क्या इस बात का खयाल नहीं रखना चाहिए था कि कोई जानी-मानी हस्ती अगर भारत में आई है तो वे उसका राजनीतिक इस्तेमाल न करें? किसी विदेशी हस्ती के एक भारतीय उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार करने की बात पहली नजर में ही आपत्तिजनक लगती है। इसलिए तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत चुनाव आयोग के पास दर्ज कराई गई है।

हालांकि इससे पहले ही आव्रजन विभाग की ओर से वीजा नियमों का उल्लंघन करने के बारे में जानकारी मिलने के बाद गृह मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया और फिरदौस अहमद का वीजा रद्द करने के साथ-साथ उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस भी दे दिया। इसके अलावा उन्हें काली सूची में भी डाल दिया गया है। यह किसी से छिपा नहीं है कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से भारत में अवैध तरीके से आए लोगों का मुद्दा संवेदनशील रहा है। तृणमूल कांग्रेस पर ऐसे आरोप भी लगते रहे हैं कि उसकी ओर से बांग्लादेश से गैरकानूनी तरीके से भारत में आकर बस गए लोगों को आकर्षित करने और उनका वोट हासिल करने के लिए तरह-तरह की गतिविधियां चलाई जाती हैं। जाहिर है, बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस अहमद की भारत यात्रा के दौरान तृणमूल कांग्रेस को वोट देने की अपील को वहां स्थानीय स्तर पर एक खास समुदाय के वोटों को प्रभावित करने की कोशिश करने के रूप में देखा जा सकता है। सवाल है कि पिछले काफी समय से सक्रिय राजनीति करने वाली पार्टी के नेताओं को क्या इस बुनियादी बात की भी जानकारी नहीं है कि अगर इस तरह की शिकायत तूल पकड़ती है तो कैसी स्थिति खड़ी हो सकती है?

अब अगर तृणमूल कांग्रेस पर फिरदौस अहमद के जरिए एक खास समुदाय के वोटों को सांप्रदायिक आधार पर आकर्षित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं तो यह स्वाभाविक ही है। लेकिन इस पर पार्टी नेताओं की चूक स्वीकार करने के बजाय तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने सफाई के तौर पर कहा कि आचार संहिता में विदेशी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने की मनाही है, लेकिन कोई विदेशी प्रचार में हिस्सा लेता है तो उसमें कोई हानि नहीं है। सवाल है कि क्या तृणमूल कांग्रेस के पास राज्य में अपना चुनाव प्रचार करने के लिए समर्थ और प्रभावी चेहरों की कमी हो गई थी? क्या पार्टी के नेताओं को अपने बीच के मशहूर चेहरों और कार्यकर्ताओं पर इस बात का भरोसा नहीं था कि वे स्थानीय मतदाताओं के वोट को उनके पक्ष में आकर्षित कर सकेंगे? हालांकि तृणमूल कांग्रेस सहित दूसरी पार्टियां भी चुनावों के दौरान अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए फिल्मी कलाकारों का सहारा लेती रही हैं। मगर विदेशी कलाकार का इस्तेमाल करके मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश को उचित कहना मुश्किल है।

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