ऑनलाइन खेल मनोरंजन का साधन हो सकता है, लेकिन इसके लिए सीमित समय तय करना और आत्मनियंत्रण बेहद जरूरी है। अगर किसी बच्चे या किशोर को इसकी लत लग जाए, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं। आज की आभासी दुनिया में ऐसे खेल भी आ गए हैं, जिनमें उपयोगकर्ताओं को जोखिम भरे कार्य दिए जाते हैं। बच्चे इन खेलों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं, जिससे वे न केवल शारीरिक एवं मानसिक विसंगतियों का शिकार हो जाते हैं, बल्कि कई बार आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में ऐसी ही एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। यहां तीन नाबालिग बहनें मंगलवार देर रात इमारत की नौवीं मंजिल से कूद गईं, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस को प्रारंभिक जांच-पड़ताल में पता चला कि ये तीनों बहनें एक ऐसे आनलाइन खेल की आदी थीं, जिसमें खेल के दौरान कुछ इस तरह के कार्य दिए जाते हैं, जो खतरे से खाली नहीं होते।
इसमें दोराय नहीं कि इंटरनेट और स्मार्ट फोन ने हमारे जीवन को सुविधाजनक बना दिया है, लेकिन तकनीक के इस साधन में कई तरह के खतरे भी छिपे हुए हैं। मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से न केवल बच्चों और किशोरों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि उनके व्यवहार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। गाजियाबाद में इमारत से कूदकर जान देने वाली लड़कियों के परिवारवाले भी इस बात से चिंतित थे और उनके आनलाइन गेम खेलने पर आपत्ति जताते थे।
कहा जा रहा है कि परिवार वालों ने इन तीनों बहनों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी, जिससे वे बेहद निराश थीं। सवाल है कि ऐसे आनलाइन खेलों की अनुमति कैसे दे दी जाती है, जो किसी बच्चे के जीवन को खतरे में डाल दे या फिर उसकी मौत का कारण बन जाए? जाहिर है, इसके पीछे कानून में स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव हो सकता है। मगर अभिभावकों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे इस तरह के जोखिम को हल्के में न लें और बच्चों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल के दौरान उन पर नियमित नजर रखें।
