पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से उपजे संकट का असर अब भारत पर भी साफ दिखने लगा है। अभी तक सरकार यह दावा कर रही थी स्थिति नियंत्रण में है, मगर बुधवार को वाणिज्यिक एलपीजी और विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से स्पष्ट हो गया है कि समस्या अब गहराने लगी है और इसकी सबसे गंभीर मार आम लोगों पर पड़ने वाली है। अगर ईरान तथा अमेरिका-इजराइल का संघर्ष लंबा चला, तो यह तय है कि हालात और ज्यादा बिगड़ेंगे। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में आए उछाल के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने उन्नीस किलोग्राम वाले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम 195.50 रुपए बढ़ा दिए हैं।
इसका असर यह होगा कि होटल, रेस्तरां और ढाबों पर भोजन करना तथा डिब्बाबंद खाद्य सामग्री अब महंगी हो जाएगी। इसके अलावा विमान ईंधन के दाम बढ़ाकर 2.07 लाख रुपए प्रति किलोलीटर से अधिक कर दिए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने इस बढ़ोतरी को घरेलू विमानन कंपनियों के लिए 8.5 फीसद तक ही सीमित रखा है। फिर भी आने वाले दिनों में हवाई यात्रा पहले के मुकाबले महंगी हो सकती है।
हाल ही में ऐसी खबरें आईं थी कि ईरान ने भारत समेत पांच देशों के तेल जहाजों को होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है, लेकिन बीते सोमवार को कहा गया कि भारत आ रहे तेल और गैस के उन्नीस जहाज अभी भी इस जलमार्ग में फंसे हुए हैं। यानी युद्ध की वजह से खाड़ी क्षेत्र में स्थितियां इतनी जटिल हो गई हैं कि औपचारिक राहत के बावजूद भारत के लिए तेल जहाजों को इस क्षेत्र से बाहर निकालना आसान नहीं है। जाहिर है, ऐसी स्थिति में ईंधन के वैश्विक संकट के असर से भारत भी अछूता नहीं रहेगा।
घरेलू बाजार में जिस तेजी से वस्तुओं के दाम बढ़ने शुरू हुए हैं, उससे रोजमर्रा की चीजों की खरीदारी में आम लोगों को यह सोचने पर विवश होना पड़ रहा है कि क्या ज्यादा जरूरी है और क्या नहीं। खासतौर पर रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर जिस तरह की स्थिति पैदा हुई है, उसे नियंत्रित करने के लिए सरकार के समक्ष भी बड़ी चुनौती है। अभी तो वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम में वृद्धि की गई है, लेकिन गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले समय में घरेलू रसोई गैस के दाम बढ़ाए जाने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में आए उछाल के कारण देश में चुनिंदा प्रीमियम या ब्रांडेड पेट्रोल और डीजल के दाम में भी 1.50 रुपए से लेकर 11 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। यानी घरेलू रसोई गैस और सामान्य पेट्रोल-डीजल के दामों में ही बढ़ोतरी नहीं हुई है, क्योंकि सरकार इसकी कीमतें स्थिर रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन देखना होगा कि यह स्थिरता कब तक रहती है। सरकार के समक्ष भी यह चुनौती है कि इस समस्या के बीच आम लोगों को राहत बरकरार कैसे रखी जाए।
उत्पाद शुल्क में कटौती से खुले बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन अभी असली समस्या उपलब्धता की है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार कच्चे तेल की खरीद के लिए अन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार करे। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि मध्यपूर्व में अगर हालात सामान्य नहीं हुए, तो ईंधन की आपूर्ति और ज्यादा प्रभावित होगी तथा घरेलू स्तर पर इस समस्या से निपटना आसान नहीं होगा।
