यह समझना मुश्किल है कि पिछले कुछ समय से लोगों के भीतर सहिष्णुता और धीरज में हो रही तेज गिरावट का कारण क्या है। छोटी-सी बात पर लोगों का उग्र हो जाना और आए दिन किसी न किसी की हत्या की घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। हरियाणा के बल्लभगढ़ के एक सामुदायिक केंद्र के पास मधुशाला में बुधवार देर रात एक कर्मचारी को महज इस कारण पीटा गया, क्योंकि उसने शराब परोसने से इनकार कर दिया था। दरअसल, एक विवाह समारोह में आए बाराती शराब पीने वहां गए थे, जहां समय ज्यादा हो जाने की वजह से कर्मचारी ने मना कर दिया।
कायदे से बारातियों को लौट जाना चाहिए था, लेकिन वे आपा खो बैठे और उस कर्मचारी की पीट-पीट कर हत्या कर दी। न पुलिस और कानून का खौफ और न ही अपने भीतर समझ पाने की चेतना कि इस तरह की मामूली बात पर क्या एक अपराध को अंजाम देना जरूरी था? यह घटना तेजी से बदलते समाज की एक बानगी है, जहां लोगों को अब किसी की सुविधा-असुविधा का खयाल रखना जरूरी नहीं लगता और न ही वे इनकार सुनना चाहते हैं।
यह विचित्र है कि कुछ लोग किसी दोस्त या परिजन की शादी की खुशी में शामिल होने के मौके को अपनी कुंठा को अभिव्यक्त करने की सुविधा मान लेते हैं। सवाल है कि बारात में आए लोगों को हर हाल में अपनी सुविधा के वक्त शराब उपलब्ध होने की जरूरत क्यों महसूस होती है। इसके पीछे कौन-सा मनोविज्ञान काम काम करता है कि अगर उनकी यह इच्छा पूरी नहीं होगी, तो वे किसी निर्दोष व्यक्ति की हत्या तक कर दे सकते हैं?
क्या सोचने-समझने का यह ढांचा लोगों को यह भी समझने से वंचित नहीं कर रहा है कि वे इस भाव का शिकार होकर अपराध और सामान्य व्यवहार तक में फर्क कर पाने में असमर्थ हो जाते हैं? अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ऐसी स्थिति में लोग कानून को भी ताक पर रखने से गुरेज नहीं करते। जरूरत इस बात की है कि खुशी के मौके पर मनमर्जी करने के शौक पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन कानूनी तौर पर सख्त उपाय करे और समाज अपने स्तर पर सोचे।
यह भी पढ़ें: बंगाल में शराब तो तमिलनाडु में कैश का बोलबाला, चुनावी राज्यों से 650 करोड़ की अवैध सामग्री जब्त
चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चल रहे चुनावों में मतदाताओं को रिझाने के लिए चुनावों में पैसा और शराब का सबसे ज्यादा इस्तेमाल की कोशिश हो रही है। चुनाव आयोग ने रविवार को कहा कि चुनावी प्रदेशों में प्रवर्तन अधिकारियों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 650 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध नकदी, मादक पदार्थ और शराब जब्त की है। चुनाव आयोग ने जहां पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के लिए सबसे अधिक शराब, तो वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु में पैसे की जब्ती की है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
