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संपादकीयः बढ़ता खतरा

कोरोना का कहर सबसे ज्यादा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बरपा है। अगर दिल्ली को छोड़ दें, तो बाकी राज्यों के आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि संकट से निपटने के लिए उस स्तर पर काम नहीं हो पाया, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी।

Author Published on: August 1, 2020 12:11 AM
कोरोना का कहर सबसे ज्यादा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बरपा है।

भारत में कोरोना के मरीजों की तादाद जिस तेजी से बढ़ रही है, वह अब गंभीर चिंता का विषय इसलिए ज्यादा है कि कहीं यह महामारी सामुदायिक प्रसार का रूप तो नहीं ले चुकी है! पिछले कुछ दिनों से रोजाना पचास हजार से ज्यादा संक्रमित सामने आ रहे थे। अब यह आंकड़ा पचपन हजार से ऊपर निकल चुका है। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या सोलह लाख के पार जा चुकी है और करीब पैंतीस हजार लोग मारे जा चुके हैं। आने वाले दिनों में ये आंकड़े बढ़ते रहेंगे, फिलहाल इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि राहत की बात यह है कि दस लाख से ज्यादा लोग ठीक भी हो चुके हैं। इस बीच, देश की राजधानी दिल्ली में अब हालात काबू में होने के दावे के किए जा रहे हैं और संक्रमितों के ठीक होने की दर में आशातीत वृद्धि देखने को मिली है। लेकिन देश के दूसरे राज्यों की स्थिति बता रही है कि भारत में कोरोना संक्रमण से जल्दी ही कोई राहत नहीं मिलने वाली। महामारी विशेषज्ञों की यह चेतावनी कि आने वाले दिनों में कई राज्यों में कोरोना संक्रमण भयावह रूप ले सकता है, अब सही साबित होती दिख भी रही है।

कोरोना का कहर सबसे ज्यादा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बरपा है। अगर दिल्ली को छोड़ दें, तो बाकी राज्यों के आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि संकट से निपटने के लिए उस स्तर पर काम नहीं हो पाया, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। शायद इसीलिए प्रधानमंत्री ने कुछ दिन पहले कोरोना से निपटने में दिल्ली के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा भी था कि दूसरे राज्यों को दिल्ली का मॉडल अपनाना चाहिए और कोरोना को हराना चाहिए। लेकिन महाराष्ट्र में चार लाख से ज्यादा और तमिलनाडु में ढाई लाख के करीब संक्रमितों का पाया जाना बता रहा है कि इन राज्यों में सरकार से लेकर जनता के स्तर तक पर बचाव के प्रयासों में कहीं न कहीं खामियां रही हैं। कर्नाटक और आंध प्रदेश में भी संक्रमितों की संख्या एक लाख से ज्यादा हो चुकी है। हाल में कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु के एक कोविड अस्पताल से साढ़े तीन हजार मरीजों का गायब हो जाना बताता है कि सरकारी अस्पतालों में किस तरह से संक्रमितों का इलाज और निगरानी हो रही होगी।

इसमें कोई संदेह नहीं कि मरीजों की संख्या बढने का बड़ा कारण जांच में आई तेजी है। अब तक एक करोड़ से ज्यादा लोगों की जांच हो चुकी है और इस वक्त रोजाना पांच लाख से ज्यादा लोगों की जांच हो रही है। हालांकि कोरोना जांच को लेकर कई तरह के सवाल भी उठे हैं और एक ही मरीज की अलग-अलग जांच में नतीजे भिन्न आने जैसे मामले भी बड़ी संख्या में देखने को मिले हैं। इसके अलावा पृथकवास केंद्रों में जिस तरह की यातना भरी स्थितियों से लोगों को गुजरना पड़ रहा है, उस खौफ की वजह से भी कई लोग कोरोना जांच कराने से बच रहे हैं। इसलिए सबसे ज्यादा जोर सही जांच पर होना चाहिए। केंद्र सरकार यह तो स्पष्ट कर ही चुकी है कि भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में संक्रमण से लड़ने के लिए लोगों में प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्युनिटी) विकसित हो पाना तब तक संभव नहीं है जब तक कि कोरोना का टीका नहीं आ जाता। सरकार कोरोना महामारी के सामुदायिक प्रसार की बात को खारिज करती आई है, लेकिन बीमारी का दायरा जिस तेजी से फैल रहा है, उसमें इस खतरे से कैसे इंकार किया जा सकता है!

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