ताज़ा खबर
 

संपादकीयः फ्रांस में फिर

एक बार फिर आतंकवाद ने दुनिया को दहला दिया है। फ्रांस के एक प्रमुख समुद्रतटीय शहर नीस में आतंकवाद ने जो कहर बरपाया उससे फ्रांस तो गमगीन है ही, बाकी दुनिया भी स्तब्ध है।

Author July 16, 2016 03:22 am

एक बार फिर आतंकवाद ने दुनिया को दहला दिया है। फ्रांस के एक प्रमुख समुद्रतटीय शहर नीस में आतंकवाद ने जो कहर बरपाया उससे फ्रांस तो गमगीन है ही, बाकी दुनिया भी स्तब्ध है। यह हमला उस वक्त हुआ जब नीस में राष्ट्रीय दिवस का जश्न मनाने के लिए भारी भीड़ जमा थी। हमलावर एक ट्रक पर सवार था और उसने तेज रफ्तार से चलाते हुए ट्रक को भीड़ में घुसा दिया। यही नहीं, वह ट्रक को लगातार टेढ़े-मेढ़े, अलग-अलग कोण से चलाता रहा। इरादा था कि अधिक से अधिक लोग कुचले और मारे जाएं। ट्रक का इससे ज्यादा क्रूर इस्तेमाल और क्या हो सकता है! इस हमले में चौरासी लोग मारे गए। फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस के जश्न का माहौल चंद पलों में आंसुओं में डूब गया। फ्रांस सरकार ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का एलान किया है।

इस घटना ने आतंकवाद की एक नई शक्ल पेश की है और तमाम सुरक्षा विशेषज्ञों को नए सिरे से सोचने को विवश किया है। जिस वारदात को कई हमलावर मिल कर अंजाम देते हैं, उसकी बाबत भनक मिल पाने की संभावना अधिक होती है। पर यह गौरतलब है कि नीस पर हुए हमले को मौके पर सिर्फ एक व्यक्ति ने अंजाम दिया, जैसा कि अमेरिका के ओरलैंडो में हुआ था। नीस में हुए हमले के मद््देनजर यह विकट सवाल भी खड़ा हुआ है कि क्या भीड़ की सारी जगहों पर सुरक्षा के अभेद्य प्रबंध करना संभव है? नीस में हुए हमले की जिम्मेवारी आइएस ने ली है। इसमें कोई हैरत की बात नहीं है। इससे पहले, इराक और सीरिया के बाहर, वह इक्कीस देशों में पचहत्तर आतंकी हमले कर चुका है, जिनमें डेढ़ हजार लोगों की जान गई है। अलबत्ता यह अभी जांच का विषय है कि नीस कांड को सीधे आइएस ने खुद अंजाम दिया, या यह आइएस-प्रेरित किसी उन्मादी व्यक्ति की ही करतूत है।

कई आतंकवादी संगठन जो पहले अल-कायदा से जुड़े थे, अब आइएस की ताकत को देखते हुए उसकी सरपरस्ती कबूल कर चुके हैं। ऐसे गुटों को हमले करने में आइएस से मिदद मिलती होगी, ऐसे हमलों की भी जिम्मेदारी स्वीकार करने में आइएस देरी नहीं करता। इसलिए आइएस से पार पाना है तो विभिन्न देशों में विभिन्न नामों से सक्रिय आतंकी गुटों को भी नेस्तनाबूद करना होगा। नीस से पहले बगदाद में आइएस के हमले में एक सौ सैंतालीस लोग मारे गए। उससे पहले ढाका में बीस और उससे पहले इस्तांबुल के अतातुर्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड््डे पर हुए हमले में बत्तीस लोग मारे गए थे।

जाहिर है, आइएस की दहशतगर्दी का दायरा भी बढ़ा है और उसमें तेजी भी आई है। यूरोप के लिहाज से देखें, तो मई 2014 में ब्रसेल्स में हुए हमले से लेकर वह दहशतगर्दी के कई बड़े कांड कर चुका है। फ्रांस में भी इस तरह की यह पहली घटना नहीं है; इससे पहले पिछले साल जनवरी में और फिर नवंबर में उसने पेरिस में कहर बरपाया था। ये घटनाएं इसी ओर इशारा करती हैं कि आइएस का प्रत्यक्ष नियंत्रण भले सीरिया व इराक के कुछ-कुछ हिस्से पर हो और हाल में उसे अपना जमीनी कब्जा थोड़ा खोना पड़ा हो, पर उसके उन्मादी समर्थक अनेक देशों में मौजूद हैं। उसके हमलों में तेजी आने की एक वजह क्या सीरिया तथा इराक में कुछ भूभाग खोने से उपजी हताशा भी होगी? जो हो, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को ध्वस्त करने के तकाजे पर दुनिया को और भी गंभीरता से सोचना होगा तथा बहुआयामी रणनीति बनानी होगी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App