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जानलेवा होर्डिंग

विज्ञापन की दुनिया में होर्डिंगों की भूमिका बेशक बहुत बढ़ चुकी है, लेकिन ज्यादातर शहरों-महानगरों में सड़कों के किनारे से लेकर घरों की छतों पर लगे होर्डिंग कई बार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

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प्रतीकात्मक फोटो
विज्ञापन की दुनिया में होर्डिंगों की भूमिका बेशक बहुत बढ़ चुकी है, लेकिन ज्यादातर शहरों-महानगरों में सड़कों के किनारे से लेकर घरों की छतों पर लगे होर्डिंग कई बार लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें आंधी या तेज हवा के झोंके से कोई होर्डिंग अचानक गिर गया और उसकी चपेट में आकर लोग घायल हो गए या फिर किसी की जान चली गई। सोमवार को दिल्ली और आसपास के इलाके में आई तेज आंधी से नोएडा में सड़क किनारे लगा एक बड़ा होर्डिंग चलती मोटरसाइकिल और कार पर गिर गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। जाहिर है, यह होर्डिंग ऐसी जगह लगाया गया था और इस कदर भारी था कि गिरने पर किसी के लिए जानलेवा साबित हो सकता था। इसके बावजूद प्रशासन की नजर पहले उस पर क्यों नहीं पड़ी थी? किन्हीं खास हालात में गली-मोहल्लों की छोटी जगहों तक की खबर रखने वाले पुलिसकर्मियों या प्रशासन से जुड़े लोगों को सड़क किनारे लगे इतने बड़े होर्डिंग और उसके खतरे का अंदाजा कैसे नहीं हुआ! इसलिए होर्डिंग से दब कर जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों ने उचित ही नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। दरअसल, वह होर्डिंग प्राधिकरण की ओर से लगाया गया था और फिलहाल उस पर कोई विज्ञापन नहीं था। सवाल है कि अगर प्राधिकरण को किसी सूचना या फिर विज्ञापनों से अतिरिक्त आय के लिए इस तरह के होर्डिंग्स लगाने की जरूरत महसूस हुई तो उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? वैसी जगह पर होर्डिंग लगाते समय यह ध्यान रखना जरूरी क्यों नहीं समझा गया कि अगर किन्हीं हालात में यह गिरा तो सड़क पर गुजर रहे वाहनों या दूसरे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है?

इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने दिशा-निर्देशों में कई बिंदुओं का ध्यान रखने को कहा है। इसमें एक यह भी है कि होर्डिंग सड़क के समांतर और इतनी दूरी पर हो सकते हैं, जिससे किसी भी हाल में सड़क बाधित न हो और उस पर चलने वाले वाहनों को कोई नुकसान न पहुंचे। मगर न केवल सड़कों पर, बल्कि मोहल्लों और बाजारों तक में ऐसे तमाम होर्डिंग लगे दिख जाते हैं जो अचानक गिर जाएं तो बड़ा नुकसान हो सकता है। आज भी नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर ऐसे बड़े-बड़े होर्डिंग देखे जा सकते हैं, जो यातायात नियमों का उल्लंघन करके लगाए गए हैं और उनके चलते कभी भी कोई हादसा हो सकता है। यह हालत हर शहर में है। कई बार कुछ पैसों के लिए लोग खुद भी अपने घरों की छत पर बिना इस बात की फिक्र किए भारी वजन के बड़े-बड़े होर्डिंग लगाने की इजाजत दे देते हैं, जो अगर आंधी या दूसरी वजहों से गिरे तो खुद उस घर और दूसरे लोगों को भारी नुकसान झेलने पड़ सकते हैं। यानी लोग निजी स्तर पर अपनी जगहों या घरों पर होर्डिंग लगाने की इजाजत दें या खुद प्रशासन ऐसा करे, मकसद आमतौर पर उससे आय अर्जित करना होता है। सवाल है कि कोई सूचना विज्ञापित करने या फिर किसी कंपनी या वस्तु के विज्ञापन के लिए लोगों की जान को जोखिम में डालना कितना सही है? अगर होर्डिंग लगाए जाते हैं तो नियमों के मुताबिक उनके पूरी तरह सुरक्षित होने और रखरखाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होगी! प्रधिकरणों को इसकी जवाबदेही लेनी होगी।

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