जनसत्ता संपादकीय : धरोहर की जगह

अपनी विरासत को सहेजना-संजोना हर जागरूक राष्ट्र का कर्तव्य है। ऐतिहासिक धरोहर से उसके सांस्कृतिक विकास का पता चलता है।

Author नई दिल्ली | June 9, 2016 3:24 AM
new delhi, monuments, disappearing, evidences, independence of indiaकुतुबमीनार (Photo: Indian Express)

अमेरिकी सरकार ने भारत से चोरी गई दो सौ से ज्यादा कलाकृतियां और ऐतिहासिक महत्त्व की वस्तुएं लौटा कर अपने सांस्कृतिक भाईचारे की नई मिसाल पेश की है। यह धरोहर अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोहों ने मंदिरों, संग्रहालयों आदि से चुरा ली थी। इनमें से कुछ कलाकृतियां दो हजार साल से ज्यादा पुरानी हैं। निश्चय ही इससे भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विकास का अध्ययन करने वालों को काफी मदद मिलेगी। भारत की प्राचीन मूर्तियों, कलाकृतियों, ऐतिहासिक महत्त्व की वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में खासी मांग है।

कई वस्तुओं की मुंहमांगी रकम मिल जाती है। यही वजह है कि तस्करी करने वाले गिरोह ऐसी चीजों को चुराने की फिराक में रहते हैं। कई देशों में ऐसी वस्तुओं-कलाकृतियों आदि की नीलामी करने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं। कई मौकों पर भारत सरकार के लिए मुश्किल भी खड़ी हो जाती है, जब किसी ऐतिहासिक धरोहर को नीलामी के लिए प्रदर्शित किया जाता है। करीब दो साल पहले गांधीजी की निजी उपयोग की कुछ वस्तुओं को ब्रिटेन में नीलामी के लिए प्रदर्शित किया गया तो यहां दबाव बनना शुरू हो गया कि भारत सरकार को उन्हें किसी भी तरह वापस लाना चाहिए। तब सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।

कुछ मौकों पर बोली के लिए रखी गई ऐसी ऐतिहासिक वस्तुओं को कुछ उद्योगपतियों और संपन्न लोगों ने खरीद कर सहेजा या फिर सरकार को वापस दे दिया। मगर अब भी बहुत सारी कलाकृतियों और ऐतिहासिक वस्तुओं का पता लगाना या उन्हें वापस लाना कठिन बना हुआ है। मसलन, रवींद्रनाथ ठाकुर के चोरी गए नोबेल पदक का अब तक पता नहीं चल पाया है। कोहेनूर हीरा वापस लाने का दबाव काफी समय से बनता रहा है, पर उसे वापस लाना मुश्किल बना हुआ है।

अपनी विरासत को सहेजना-संजोना हर जागरूक राष्ट्र का कर्तव्य है। ऐतिहासिक धरोहर से उसके सांस्कृतिक विकास का पता चलता है। मगर जब ऐसी कोई वस्तु चोरी करके दूसरे देश में पहुंचा दी जाती है तो उसे वापस लाना कठिन हो जाता है। इसलिए अब कई देशों ने तय किया कि वे तस्करों से बरामद वस्तुओं को संबंधित देशों को वापस लौटाएंगे। इस क्रम में भारत को ऐतिहासिक महत्त्व की बहुत सारी चीजें विभिन्न देशों से प्राप्त हो चुकी हैं। अमेरिका से वापस मिली वस्तुएं शायद अब तक की सबसे बड़ी धरोहर है। इनमें से ज्यादातर चीजें वहां चलाए गए आॅपरेशन हिडन आइडल के दौरान बरामद की गई हैं।

अच्छी बात है कि बहुत सारे देशों ने महत्त्वपूर्ण कलाकृतियों, ऐतिहासिक महत्त्व की वस्तुओं आदि की चोरी पर नकेल कसने के मकसद से ऐसे अभियान चलाने की नीति बना रखी है। इससे ऐसी चीजों की तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। अमेरिका ने ऐसी वस्तुएं वापस कर भारत की धरोहर को समृद्ध किया है। पर हमारे यहां इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि संग्रहालयों, मंदिरों आदि में रखी बेशकीमती और नायाब कलाकृतियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों आदि की सुरक्षा कैसे की जाए। संग्रहालयों की निगरानी में मुस्तैदी की कमी के तथ्य अनेक मौकों पर उजागर हो चुके हैं। कई बार इनकी देखरेख करने वालों की चोरों से मिलीभगत के तथ्य भी उजागर हो चुके हैं। इसके अलावा रखरखाव में संजीदगी न होने के कारण अनेक दस्तावेज धूप, गरमी, सीलन वगैरह के चलते विरूपित या नष्ट हो जाते हैं। इसलिए चोरी गई वस्तुओं को दूसरे देशों से प्राप्त करने के साथ-साथ इन कमजोर पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

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